गुड़ी पड़वा विशेष : मानव देह का प्रतीक है गुड़ी

 

 
'गुड़ी पड़वा', चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी साढ़े तीन शुभ मुहूर्तों में से एक। सोने की लंका जीत राम के अयोध्या लौटने का दिन यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा। जब अयोध्यावासियों ने गुड़ी तोरण लगाकर अपनी खुशी का इजहार किया था। बस तभी से चैत्र प्रतिपदा पर गुड़ी की परंपरा का श्रीगणेश हुआ व यह दिन 'गुड़ी पड़वा' बतौर जाना गया। जानिए गुड़ी पड़वा का पौराणिक महत्व  
'गुड़ी पड़वा' में अध्यात्म मंदिर के दरवाजे यानी मोक्ष द्वार का गहरा गुरुमंत्र छिपा है। तन कर खड़ी 'गुड़ी' परमार्थ में पूर्ण शरणागति यानी एकनिष्ठ शरणभाव का संदेश देती है,जो ज्ञानप्राप्ति के, परमानंद का अहम साधन है। वहीं 'पड़वा' साष्टांग नमस्कार (सिर, हाथ, पैर, हृदय, आंख, जांघ, वचन और मन आठ अंगों से भूमि पर लेट कर किया जाने वाला प्रणाम) का संकेत देता है।> > नवसंत्सर प्रतिपदा : श्रीखंड, पूड़ी और गुड़ी का उत्सव  
गुड़ी मानव देह की प्रतीक है। इस एक दिन के त्योहार में आपको आदर्श जीवन के प्रतिबिंब नजर आते हैं। 'गुड़ी' की लाठी को तेल, हल्दी लगा गर्म पानी से नहलाते हैं। उस पर चांदी की लोटी या तांबे का लोटा उल्टा डाल रेशमी जरी वस्त्र पहनाकर फूलों और शक्कर के हार और नीम की टहनी बांधकर घर के दरवाजे पर खड़ी करते हैं।
'देहयष्टि' हम इस लफ्ज का इस्तेमाल करते हैं। और स्नान, सुगंधित वस्तुओं, षटरस (मीठा, नमकीन, कडुवा, चरपरा, कसैला और खट्टा छः तरह के रस) वस्त्र, अलंकार, पकवान इन तमाम वस्तुओं का उपभोग इसके लिए जरूरी है। तनी हुई रीढ़ से इज्जत के साथ गर्दन हमेशा ऊंची रख जीना यही तो 'गुड़ी' हमें सिखाती है,लेकिन इस सामर्थ्य के साथ ईश्वरीय अधिष्ठान भी जरूरी हैं, यह बताने से भी नहीं चूकती।
शक्कर के श्वेत-केशरी हार और नीम के फूलों की डाल को समभाव से कंधे पर डाले शान से खड़ी 'गुड़ी' कामयाबी और नाकामयाबी में भी बिना गिरे उसे हजम करना भी तो बगैर बोले ही सिखाती है। ऋतु संधिकाल में तृष्णा हरण के लिए शक्कर और अमृत गुणों से भरपूर रोगप्रतिबंधक नीम और गुड़, धनिए की योजना हमारे पूर्वजों के रूढ़ी और आयुर्वेद समन्वय के नजरिए को दर्शाती है। पोर-पोर की लाठी में 'रीढ़' की समानता नजर आती हैं, तो चांदी का बर्तन मस्तक का प्रतीक है।
 
उत्तम चैत्रमास और ऋतु वसंत का यह दिन जब सूर्य किरणों में नई चमक होती है, तनी हुई रीढ़ पर अधिष्ठित बर्तन सूर्य किरणों को इकट्ठा कर उन्हें परावर्तित भी करता है। परिपूर्ण विचारधन और आत्मज्ञान सूर्य से तपस्वी गुरु से साध तेजस्वी बुद्धि हासिल कर लोककल्याण की प्रेरणा से उसे समाज को दान देने का संकेत भी 'गुड़ी' ही देती है।
के पहले दिन शालिवाहन शक की शुरुआत होती है। शालिवाहन राजा ने शंक पर विजय हासिल की और तभी से शालिवाहन कालगणना की शुरुआत हुई। शालिवाहन राजा की सत्ता आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में होने से यह त्योहार बड़े धूमधाम से लेकिन अपनी-अपनी तरह से मनाया जाता है।
 
इसी दिन राम की नवरात्रि आरंभ होती है। जिसके नौ दिन यानी भक्ति के नौ प्रकार और नौ पायदान हैं-(1)वण (कान से भगवान के बाबद सुनना), (2) कीर्तन, (3) नामजप, (4)पाद्य पूजा, (5) प्रार्थना,पूजा, (6)वंदन, (7)सेवा, (8)ईश्वर से सखाभाव, (9)समर्पण। इसीलिए चैत्र शक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर यह चैत्र शुक्ल नवमी यानी 'रामनवमी' पर समाप्त होता है।
 
लेकिन जरा कुदरत के नजरिए से भी गौर करें तो चैत्र वैशाख यानी वसंत ऋतु में जंगली वृक्षों यानी पलाश, गुलमोहर आदि में नई कोंपले फुटाव लेती हैं। इन वृक्षों को कोई भी ,कभी भी खाद-पानी नहीं देता। इनके पूरे विकास की जवाबदारी कुदरत पर होती है। इसलिए वसंत ऋतु को पहली ऋतु और कुदरत के सृजन का प्रतीक माना जाता है। और इसी वसंत की शुरुआत होती है 'गुड़ी पड़वा' से।
'गुड़ी पड़वा' यानी सिर्फ वस्त्रालंकार, गुड़, धनिए, पुरी का पर्व नहीं वरन विद्या विनय की सीख देने का दिन हैं। तन कर खड़ी 'गुड़ी' स्वाभिमान से जीने और जमीन पर लाठी की तरह गिरते ही साष्टांग नमस्कार कर जिंदगी के उतार-चढ़ाव में बगैर टूटे उठने का संदेश देती है।
ज्योत्स्ना भोंडवे

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :

ज्योतिष के अनुसार मंगल की खास विशेषताएं, जो आप नहीं जानते ...

ज्योतिष के अनुसार मंगल की खास विशेषताएं, जो आप नहीं जानते होंगे...
ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह की परिभाषा अलग है। पौराणिक कथाओं में नौ ग्रह गिने जाते हैं, ...

विवाह के प्रकार और हिंदू धर्मानुसार कौन से विवाह को मिली है ...

विवाह के प्रकार और हिंदू धर्मानुसार कौन से विवाह को मिली है मान्यता, जानिए
शास्त्रों के अनुसार विवाह आठ प्रकार के होते हैं। विवाह के ये प्रकार हैं- ब्रह्म, दैव, ...

कृष्ण के 80 पुत्रों का रहस्य, साम्ब के कारण हुआ मौसुल युद्ध

कृष्ण के 80 पुत्रों का रहस्य, साम्ब के कारण हुआ मौसुल युद्ध
भगवान श्रीकष्ण ने आठ महिलाओं से विधिवत विवाह किया था। इन आठ महिलाओं से उनको 80 पुत्र मिले ...

गुलाब का एक फूल बदल सकता है जीवन की दिशा, जानिए 10 रोचक ...

गुलाब का एक फूल बदल सकता है जीवन की दिशा, जानिए 10 रोचक टोटके
हम आपके लिए लाए हैं सुंगधित गुलाब के फूल के कुछ ऐसे उपाय या टोटके जिन्हें आजमाकर आप अपने ...

आखिर क्यों होती हैं हमारे कामों में देरी, जानिए, क्या कहता ...

आखिर क्यों होती हैं हमारे कामों में देरी, जानिए, क्या कहता है ज्योतिष
जानते हैं कि जन्मपत्रिका में वे कौन सी ऐसी ग्रहस्थितियां व ग्रह होते हैं जो कार्यों में ...

हवन के चमत्कारी फायदे वैज्ञानिक भी मान गए, पढ़ें यह दिलचस्प ...

हवन के चमत्कारी फायदे वैज्ञानिक भी मान गए, पढ़ें यह दिलचस्प जानकारी
ताजा शोध नतीजे बताते हैं कि हवन वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने के साथ ही अच्छी सेहत के ...

कौड़ियां बनाती हैं मालामाल, यह 4 उपाय पढ़कर चकित रह जाएंगे ...

कौड़ियां बनाती हैं मालामाल, यह 4 उपाय पढ़कर चकित रह जाएंगे आप...
कौड़ी सफेद, भूरी और पीली तथा चितकबरी आती हैं। इन्हें मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। ...

नौकरी की तलाश है तो यह 10 बहुत सरल और सुरक्षित टोटके आजमाएं

नौकरी की तलाश है तो यह 10 बहुत सरल और सुरक्षित टोटके आजमाएं
नौकरी हर इंसान की जरूरत है। लेकिन कई प्रयासों के बाद भी जब नौकरी न मिले तो स्वाभाविक रूप ...

रिश्तों को बचाएं व प्यार बढ़ाएं, 7 टिप्स अपनाएं

रिश्तों को बचाएं व प्यार बढ़ाएं, 7 टिप्स अपनाएं
हम सभी यही सोचकर रिश्ते बनाते हैं कि हमें उस रिश्ते से हमेशा खुशी मिलेगी व हमारी हमारे ...

महेश नवमी पर शिव उपासना से होती है हर कामना पूरी, यह 8 सरल ...

महेश नवमी पर शिव उपासना से होती है हर कामना पूरी, यह 8 सरल मंत्र हैं आपके लिए
प्रस्तुत है कुछ ऐसे विशेष मंत्र हैं जिनका महेश नवमी से लेकर प्रतिदिन रुद्राक्ष की माला से ...

राशिफल