महाराष्ट्र में हर्षोल्लास से मना गुड़ी पड़वा उत्सव (फोटो)

बुधवार,मार्च 29, 2017
शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही चंद्र की कला का प्रथम दिवस है। अतः इसे छोड़कर किसी अन्य दिवस को वर्षारंभ मानना उचित नहीं है।
पतझड़ और वसंत साथ-साथ आते हैं। प्रकृति की इस व्यवस्था के गहरे संकेत-संदेश हैं। अवसान-आगमन, मिलना-बिछुड़ना, पुराने का ...
गुड़ी यानी विजय पताका। भोग पर योग की विजय, वैभव पर विभूति की विजय और विकास पर विचार की विजय। मंगलता और पवित्रता को ...
'गुड़ी पड़वा', चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी साढ़े तीन शुभ मुहूर्तों में से एक। सोने की लंका जीत राम के अयोध्या लौटने का दिन ...
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'साधारण' के नाम का, नवसंवत्सर है वर्ष, चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा, नूतन-नवल-सहर्ष। राजा मंगल जानिए, मंत्री गुरु का साल, ...
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नवविक्रम संवत् (2074) का प्रारंभ होता है, जो कि इस वर्ष ...
त्योहार तो बस मनाने के लिए होते है। खुशी, मस्ती, जोश और अपनेपन की भावनाएं त्योहारों के माध्यम से अभिव्यक्त हो ही जाती ...
गुड़ी पड़वा के दिन 136 देवों को प्रसन्न किया जा सकता है। शास्त्रों में उनके मंत्र दिए गए हैं। पढ़ें विस्तार से...
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गुड़ी पड़वा और चैत्र प्रतिपदा का भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्व है। इस दिन व्रत करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
गुड़ी पड़वा या नव संवत्सर के दिन प्रातः नित्य कर्म कर तेल का उबटन लगाकर स्नान आदि से शुद्ध एवं पवित्र होकर हाथ में गंध, ...
आपको ज्ञात होगा कि देशभर में दशहरे पर रावण दहन होता है। लेकिन एक गांव ऐसा है, जहां हिन्दू नववर्ष की शुरुआत रावण दहन के ...
महाराज विक्रमादित्य बड़े पराक्रमी, यशस्वी, विद्वान, वीर एवं प्रजावत्सल शासक थे। इन्होंने विक्रम संवत् को शास्त्रीय विधि ...
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू पंचांग के अनुसार नव संवत्सर शुरु होता है, जिसे नववर्ष कहा जाता है। आखिर कैसे हुआ होगा ...
गुड़ पड़वा यानि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ माना जाता है। इस शुभ दिन पर कुछ विशेष उपाय एवं मंत्र, ...
फाल्गुन के जाने के बाद उल्लासित रूप से चैत्र मास का आगमन होता है। चहुंओर प्रेम का रंग बिखरा होता है। प्रकृति अपने पूरे ...
गुड़ी पड़वा यानि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, जिसे हिंदू नववर्ष का आरंभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार गुड़ी पड़वा नए ...
गुड़ी पड़वा या हिन्दू नववर्ष प्राय: सभी घरों में मनाया जाता है। हमारा नया साल हो और मिठास का बात न हो, यह तो संभव नहीं ...
अवनी से अंबर तक छाया नववर्ष। सिन्दूरी भोर लिए आया नववर्ष।। तैरते हवाओं में पंछी रंगीन। ले आए प्राची से उजियारे दिन। ...
फाल्गुन के जाने के बाद उल्लासित रूप से चैत्र मास का आगमन होता है। चहुंओर प्रेम का रंग बिखरा होता है। प्रकृति अपने पूरे ...