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क्यों मनाएं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही नया वर्ष?

शनिवार,मार्च 17, 2018
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गुड़ी पड़वा के दिन 136 देवों को प्रसन्न किया जा सकता है। शास्त्रों में उनके मंत्र दिए गए हैं। पढ़ें विस्तार से...
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मंदिर में प्राप्त नीम और शक्कर के प्रसाद के पीछे अति मधुर भावना छिपी होती है। जीवन में कभी सुख या दुख अकेले नहीं आते। ...
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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि का प्रारंभ हुआ था और इसी दिन भारत वर्ष में काल गणना प्रारंभ हुई थी। कहा है कि :-
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गुड़ी यानी विजय पताका। भोग पर योग की विजय, वैभव पर विभूति की विजय और विकार पर विचार की विजय।
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यही समय है नए के सृजन का, वंदन, पूजन और संकल्प का... जब सृष्टि नए का निर्माण करती है, आह्वान करती है, तब ही सांसारिक ...
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इस दिन नया वस्त्र धारण करना चाहिए तथा घर को ध्वज, पताका, बंदनवार आदि से सजाना चाहिए।
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गुड़ी पड़वा एक ओर आनंद का उत्सव है तो दूसरी ओर विजय और परिवर्तन का प्रतीक भी है। कृषकों के लिए इसका विशेष महत्व है। ...
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राजा विक्रमादित्य के काल में भारतीय वैज्ञानिकों ने इन सबसे पहले ही भारतीय कैलेंडर विकसित किया था। इस कैलेंडर की शुरुआत ...
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18 मार्च को वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर स्वयंसिद्ध मुहूर्त रहेगा। सनातन धर्म में मुहूर्त का विशेष महत्व होता है।
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'स्मृत कौस्तुभ' के मतानुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र के 'विष्कुंभ योग' में भगवान श्री विष्णु ने ...
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चैत्र माह से हिन्दू नववर्ष आरंभ होता है। सूर्योपासना के साथ आरोग्य, समृद्धि और पवित्र आचरण की कामना की जाती है।
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संत ऋतु का पहला हिस्सा पतझड़ का हुआ करता है... पेड़ों, झाड़ियों, बेलों और पौधों के पत्ते सूखते हैं, पीले होते हैं और फिर ...
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घर को ध्वजा, पताका, तोरण, बंदनवार, फूलों आदि से सजाएँ व अगरबत्ती, धूप आदि से सुगंधित करें।दिनभर भजन-कीर्तन कर शुभ कार्य ...
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नवसंवत्सर पूजन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उस दिन उदय में जो वार हो, वही उस वर्ष का ...
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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवसंवत्सर का आरंभ होता है, इसी तिथि से पितामह ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था। ...
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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा गुड़ी पड़वा पर 18 मार्च, रविवार को विक्रम संवत 2075 का आरंभ होगा। इस नववर्ष विरोधकृत संवत्सर रहेगा ...
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इस दिन से हिन्दुओं का नववर्ष आरंभ होता है, कहा जाता है महान गणितज्ञ भास्कराचार्य द्वारा इसी दिन से सूर्योदय से ...
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समूचे महाराष्ट्र में धर्मप्राण जनता ने नवसंवत्सर 2074 और गुड़ीपड़वा के शुभ अवसर पर विविध तरीकों से पर्व मनाया और ...
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शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही चंद्र की कला का प्रथम दिवस है। अतः इसे छोड़कर किसी अन्य दिवस को वर्षारंभ मानना उचित नहीं है।
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