FIFA WC 2018: ग्रुप- डी की टीमें मुश्किल से पहुंची है रशिया वर्ल्ड कप में, जानिए कैसा रहा सफर

पुनः संशोधित मंगलवार, 12 जून 2018 (15:00 IST)
का आगाज होने में कुछ ही घंटे शेष बचे हैं। सभी 32 टीमों की जीत की रणनीति बनकर तैयार है और फुटबॉल के दीवाने भी अपनी टीम को चीयर्स करने के लिए रूस पहुंच गए हैं। इन 32 टीमों को 8 ग्रुप में बांटा गया है।

ग्रुप डी में अर्जेंटीना, क्रोएशिया, और नाइजीरिया की टीम है। यह एक ट्रिकी ग्रुप है। आइसलैंड पहली बार विश्व कप खेलेगी। ग्रुप डी की इन टीमों का यहां तक का सफर बहु‍त मुश्किलोंभरा रहा है। बहुत सी टीमों ने अपने से दमदार टीमों को हराकर विश्व कप का टिकट पक्का किया है।

आइए, जानते हैं ग्रुप डी की इन टीमों का मुकाबलों में कैसा प्रदर्शन रहा था...

आइसलैंड-
आइसलैंड की टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप में प्रवेश हासिल कर लिया है। आइसलैंड ने विश्व कप क्वालीफायर मुकाबले में कोसोवो को 2-0 से हराने के बाद विश्व कप का टिकट पाया था। आइसलैंड की टीम ने फीफा के इतिहास में पहले ही मैच में यूरोप सरीखी टीमों को हराकर (जिसमें टर्की, क्रोटिया और यूक्रेन शामिल थे) फाइनल में जगह बनाई थी।

क्वालीफिकेशन राउंड के दौरान आइसलैंड के नौ खिलाड़ियों ने गोल करने में कामयाबी पाई थी, ऐसे में टीम को आसान समझना भूल होगी। इंग्लिश प्रीमियर लीग में खेलने वाले जिल्फी साइगरडसन काफी खतरनाक खिलाड़ी माने जाते हैं। यूरोपियन फुटबॉल चैंपियनशिप 2016 में ऑस्ट्रिया और इंग्लैंड जैसी टीमों को हराकर क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाले आइसलैंड ने यहां भी खुद को अव्वल साबित
करते हुए ग्रुप-ए में शीर्ष स्थान हासिल किया। आइसलैंड ने विश्व क्वालिफायर के अपने आखिरी तीन मैचों में एक भी गोल नहीं खाया। आइसलैंड अपने ग्रुप एक में 10 मैचों में 22 अंक लेकर ग्रुप विजेता रहा है।

नाइजीरिया-
नाइजीरिया की टीम पांच वर्ल्ड कप खेल चुकी है। हालांकि इसने एक भी बार खिताब नहीं जीता है। इस टीम का क्वा‍लीफायर मुकाबलों के शुरुआती दौर में प्रदर्शन अच्छा नहीं था। बहु‍त से लोग यह मानने को तैयार नहीं थे कि टीम टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करेगी।

उयो में खेले गए मैच में जांबिया को 1-0 से मात देकर विश्व कप
के लिए क्वालीफाई करने वाली नाइजीरिया की टीम अफ्रीकी महाद्वीप से पहली टीम बनी थी। नाइजीरिया ने एक मैच बाकी रहते वर्ल्ड कप का टिकट पाया है। इस टीम में इस बार एलेक्स इवोबी और अहमद मूसा जैसे खिलाड़ी हैं।

क्रोएशिया-
वर्ष 1998 के अपने पहले ही फीफा विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचकर तीसरे स्थान पर रहने वाली क्रोएशियाई टीम एक बार भी ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई है। टीम के हालिया प्रदर्शन पर अगर नजर डालें तो उसने मार्च में हुए दोस्ताना मैच में पेरू को 2-0 से और मेक्सिको को 1-0 से मात दी है।

क्रोएशिया ने विश्व कप क्वालीफाइंग मुकाबले में मिस्र को 4-1 से हराकर विश्व कप का टिकट कटाया। विश्व कप में क्रोएशिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी मिडफील्ड है। स्पेनिश क्लब रियल मेड्रिड के लुका मोड्रिक और माटिओ कोवाचिक के अलावा टीम में बार्सिलोना के इवान रेकिटिक तथा एटलेटिको मेड्रिड के सिमे वसाल्जको मौजूद है।


अर्जेंटीना-
दुनिया को मेराडोना और मैसी जैसे खिलाड़ी देने वाली अर्जेंटीना की फुटबॉल टीम का क्वालीफायर मुकाबलों में प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। एक समय तो ऐसा लग रहा था कि 1970 के बाद पहली बार अर्जेंटीना की टीम विश्व कप में क्वालिफाई नहीं कर पाएगी। अर्जेंटीना अपने से कमजोर टीम पेरू के खिलाफ अच्छा खेल नहीं दिखा पाई और मैच 0-0 से ड्रॉ में खत्म हुआ था। अपने स्टार स्ट्राइकर लियोनल मैसी के अंतिम समय में निलंबन के कारण कमजोर पड़ी अर्जेंटीना को बोलीविया के हाथों क्वालीफायर मुकाबले में 0-2 की हार का सामना करना पड़ा। अर्जेंटीना को विश्व कप में क्वालीफाई करने के लिए टूर्नामेंट के आखिरी मुकाबले में जीतना जरूरी हो गया था, तब अर्जेंटीना ने इक्वाडोर को 3-1 से मात दी।

इस मैच की शुरुआत के बाद पहले ही मिनट में इबारा ने इक्वाडोर के लिए खाता खोला। इसके बाद 12वें मिनट में मेसी ने गोल कर अर्जेंटीना का खाता खोलते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर लिया। 20वें मिनट में मैसी ने एक और गोल दागकर अर्जेंटीना को बढ़त दे दी। दूसरे हाफ में मैसी ने 62वें मिनट में तीसरा गोल कर अपनी हैट्रिक पूरी की और अपनी टीम को विश्व कप का टिकट दिलाया।


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