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कैसे करें वैष्णोदेवी की चढाई
तरूण हिंगोरानी
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माता की यात्रा पाँच चरणों में होती है। भक्त सबसे पहले नीचे कटरा में बाणगंगा नदी में स्नान करते हैं। कहते हैं कि जब माँ वैष्णव देवी का बाबा भैरवनाथ पीछा कर रहे थे, तब माता के साथ हनुमान जी भी थे। जब उन्हें प्यास लगी तो माता ने अपने धनुष से बाण चलाया और वहाँ से जल की एक धारा निकली, जिसे हम बाणगंगा कहते हैं।

कटरा से 2.5 किलोमीटर की चढ़ाई पर माता के चरणों के निशान हैं, जिसे चरण पादुका कहा जाता है। कटरा से 6 किलोमीटर की चढ़ाई पर माँ अर्धकुआँरी का स्थान है। यहाँ से आगे की 3.5 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है। 3.5 किलोमीटर की चढ़ाई के बाद जो स्थान आता है, उसे साँझी छत कहा जाता है। यहाँ से एक रास्ता माता वैष्णव देवी के भवन को जाता है, जिसकी दूरी 2.5 किलोमीटर है और दूसरा रास्ता बाबा भैरवनाथ के भवन को जाता है। इस रास्ते को वापस आने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

भवन के दर्शन के बाद जब आधा किलोमीटर वापस आते हैं तो यहाँ से बाबा भैरवनाथ के भवन की चढ़ाई शुरू होती है, जिसकी लंबाई 1.5 किलोमीटर है। यह पाँचवाँ चरण है। कहते हैं कि बाबा भैरवनाथ के दर्शन के बिना माता वैष्णो देवी के दर्शन अधूरे हैं।
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