विशेषज्ञ से जानिए, साइनस के 3 कारण, 9 लक्षण और इलाज...

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रवि श्रीवास्तव 
आजकल की अनियमित जीवन शैली में लोग अपनी का सही प्रकार से ख्याल नहीं रख पाते, जिसके कारण उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।  आज हम आप को के लक्षण और उपचार के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे अधिकतर लोग परेशान रहते हैं। यह बीमारी आम सर्दी के रूप में शुरू होती है और फिर एक बैक्टीरियल, वायरल या फंगल संक्रमण के साथ बढ़ जाती है। 
 
साइनस की बीमारी को लेकर लखनऊ में नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक वर्मा ने बताया कि साइनस नाक में होने वाला एक रोग है। इस रोग में नाक की हड्डी भी बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होती है। जो व्यक्ति इस रोग से ग्रसित होता है उसे ठंडी हवा, धूल, धुआं आदि में परेशानी महसूस होती है। 
 
डॉ. विवेक वर्मा ने बताया कि साइनस दरअसल मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती है, जो हमारे सिर को हल्कापन व श्वास वाली हवा लाने में मद्द करती है। श्वास लेने में अंदर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है। यह थैली, हवा के साथ आई गंदगी यानि धूल और दूसरी तरह की गंदगियों को रोकती है। जब व्यक्ति के साइनस का मार्ग रूक जाता है, तो बलगम निकलने का मार्ग भी रूक जाता है, जिससे साइनोसाइटिस नामक बीमारी होती है। साइनस का संक्रमण होने पर इसकी झिल्ली में सूजन आ जाती है, जिसके कारण झिल्ली में जो हवा भरी होती है उसमें मवाद या बलगम आदि भर जाता है और साइनस बंद हो जाते हैं। ऐसा होने पर मरीज को परेशानी होनी लगती है। 
 
डॉ. विवेक वर्मा ने बताया कि इस बीमारी का मुख्य कारण झिल्ली में सूजन का आना है। यह सूजन निम्न कारणों से आ सकती है - 
1 बैक्टीरिया
2 फंगल संक्रमण
3 या फिर नाक की हड्डी का ढ़ेडा होना। 
अगले पेज पर जानें...लक्षण, जांच और इलाज 
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