ये 25 'महामानव' जिन्होंने बनाया भारत को

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
सम्राट पुष्यमित्र शुंग (लगभग 185 ई. पू.) : पुष्यमित्र शुंग मौर्य वंश को पराजित करने वाला तथा शुंग वंश का प्रवर्तक था। वह जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय था। अत्यधिक हिंसा के बाद भारत की सनातन भूमि बौद्ध भिक्षुओं व बौद्ध मठों का गढ़ बन गई थी, जिसका संचालन अफगानिस्तान के बामियान और मगथ से होता था। मौर्य वंश का नौवां सम्राट वृहद्रथ मगध की गद्दी पर बैठा, तब उस समय तक आज का अफगानिस्तान, उत्तरी पाकिस्तान, कश्मीर, पंजाब और लगभग पूरा उत्तरी भारत बौद्ध बन चुका था। इसके अलावा भूटान, चीन, बर्मा, थाईलैंड आदि अनेक दूसरे राष्ट्र भी बौद्ध धर्म के झंडे तले आ चुके थे, लेकिन वृहद्रथ का शासन सिंधु के इस पार तक सिमटकर रह गया था।
 
भारत में बस नाममात्र के ही राजा थे, जो हिन्दू राजा कहलाते थे। उनमें भी ज्यादातर दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और राजस्थान के राजा थे। उत्तरी अफगानिस्तान बौद्धों का गढ़ और राजधानी बन चुका था।
 
जब भारत के मगथ में नौवां बौद्ध शासक वृहद्रथ राज कर रहा था, तब ग्रीक राजा मीनेंडर अपने सहयोगी डेमेट्रियस (दिमित्र) के साथ युद्ध करता हुआ सिंधु नदी के पास तक पहुंच चुका था। सिंधु के पार उसने भारत पर आक्रमण करने की योजना बनाई। इस मीनेंडर या मिनिंदर को बौद्ध साहित्य में मिलिंद कहा जाता है। किंवदंति के अनुसार उसने सीमावर्ती इलाके के कुछ बौद्ध भिक्षुओं को अपने साथ मिला लिया। उसने कहा कि अदि आप भारत विजय में मेरा साथ देंगे तो मैं विजय के पश्चात बौद्ध धर्म अंगीकार कर लूंगा। हालांकि 'मिलन्दपन्हो' में मिलिन्द एवं बौद्ध भिक्षु नागसेन के मध्य सम्पन्न वाद-विवाद के परिणामस्वरूप मिलिन्द ने बगैर किसी शर्तों पर बौद्ध धर्म स्वीकार किया था।
 
इतिहास के एक दूसरे पहलु अनुसार बौद्ध भिक्षुओं का वेश धरकर मिनिंदर के सैनिक मठों में आकर रहने लगे। हजारों मठों में सैनिकों के साथ-साथ हथियार भी छुपा दिए गए। इस गति‍विधि की जानकारी बौद्ध सम्राट वृहद्रथ के सेनापति पुष्यमित्र शुंग को लगी।
 
पुष्यमित्र ने सम्राट वृहद्रथ से मठों की तलाशी की आज्ञा मांगी, परंतु बौद्ध सम्राट वृहद्रथ ने यह कहकर मना कर दिया कि तुम्हें व्यर्थ का संदेह है। लेकिन पुष्यमित्र शुंग एक राष्ट्रभक्त था। उसने राजाज्ञा का पालन किए बिना मठों की तलाशी ली और सभी भिक्षुओं को पकड़ लिया और भारी मात्रा में हथियार जब्त कर लिए, परंतु वृहद्रथ को आज्ञा का उल्लंघन अच्छा नहीं लगा।
 
कहते हैं कि पुष्यमित्र शुंग जब वापस राजधानी पहुंचा तब सम्राट वृहद्रथ सेना परेड लेकर जांच कर रहा था। उसी दौरान पुष्यमित्र शुंग और वृहद्रथ में कहासुनी हो गई। कहासुनी इतनी बढ़ी कि वृहद्रथ ने तलवार निकालकर पुष्यमित्र शुंग की हत्या करना चाही, लेकिन सेना को वृहद्रथ से ज्यादा पुष्यमित्र शुंग पर भरोसा था। सेना में बौद्ध भी होते थे और हिन्दू भी। पुष्यमित्र शुंग ने वृहद्रथ का वध कर दिया और फिर वह खुद सम्राट बन गया। इस दौरान सीमा पर मिलिंद ने आक्रमण कर दिया।
 
फिर पुष्यमित्र ने अपनी सेना का गठन किया और भारत के मध्य तक चढ़ आए मिनिंदर पर आक्रमण कर दिया। भारतीय सैनिकों के सामने ग्रीक सैनिकों की एक न चली। अंतत: पुष्‍यमित्र शुंग की सेना ने ग्रीक सेना का पीछा करते हुए उसे सिन्धु पार धकेल दिया।
 
कुछ बौद्ध ग्रंथों में लिखा है कि पुष्यमित्र ने बौद्धों को सताया था, लेकिन क्या यह पूरा सत्य है? नहीं, पुष्यमित्र एक कट्टर राष्ट्रभक्त जरूर था लेकिन वह भिक्षुओं का सम्मान करता था। कहते हैं कि सम्राट ने उन राष्ट्रद्रोही बौद्धों को सजा दी, जो उस समय ग्रीक शासकों का साथ दे रहे थे। मिलिंद पंजाब पर राज्य करने वाले यवन राजाओं में सबसे उल्लेखनीय राजा था। उसने अपनी सीमा का स्वात घाटी से मथुरा तक विस्तार कर लिया था। अब वह पाटलीपुत्र पर भी आक्रमण करना चाहता था।
 
इतिहासकारों अनुसार पुष्यमित्र का शासनकाल चुनौतियों से भरा हुआ था। उस समय भारत पर कई विदेशी आक्रांताओं ने आक्रमण किए, जिनका सामना पुष्यमित्र शुंग को करना पड़ा। पुष्यमित्र चारों तरफ से बौद्ध, शाक्यों आदि सम्राटों से घिरा हुआ था। फिर भी राजा बन जाने पर मगध साम्राज्य को बहुत बल मिला। पुराणों के अनुसार पुष्यमित्र ने 36 वर्ष (185-149 ई.पू.) तक राज्य किया। इसके बाद उसके राज्य का जब पतन हो गया, तो फिर से बौद्धों का उदय हुआ। हालांकि पुष्यमित्र शुंग के बाद 9 और शासक हुए- अग्निमित्र, वसुज्येष्ठ, वसुमित्र, अन्ध्रक, तीन अज्ञात शासक, भागवत, देवभूति। पुष्यमित्र शुंग को बौद्ध विरोधी समझना इतिहास की भूल है। इतिहास को जवाहरलाल नेहरू विश्‍व विद्यालय में बैठे वामपंथियों ने लिखा इसलिए उन्होंने पुष्यमित्र शुंग खलनायक की तरह प्रस्तुत किया।
 
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