मोहक मोरपंख की मनभावन महक

इस बार मोरपंख की ब्लॉग चर्चा

ब्लॉग चर्चा
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मोहक होता है। उसकी बनावट मारू होती है। उसके रंग मनभावन होते हैं। नीले, हरे और चमकीले भूरे। उसके रेशे इतने कोमल होते हैं कि एक मखमली अहसास कराते हैं। उसमें बना एक खास आकार दिलकश होता है। आँखों और मन को एक साथ भाता है। इस मोरपंख से कई सारी स्मृतियाँ जुड़ी होती हैं।

ये स्मृतियाँ कभी किसी के सिर पर ताज की तरह लहराते पंख की याद दिलाती हैं तो किसी बाँसुरी की बावला कर देने वाली धुन की याद दिलाती हैं। किसी अनकहे प्यार की याद दिलाती हैं तो किसी अनसुनी प्रेमभरी तान की। इन सबसे बना सतरंगी संसार न भूली जा सकने वाली महक से सराबोर रहता है। यही महक कभी किसी बारिश के गीले लम्हों में महकती रहती है तो कभी किसी मंदिर की सीढि़यों पर बैठी किसी घंटी की तरह टुनटुनाती रहती है। कभी किसी नीली आँख में किसी सितारे की तरह टिमटिमाती रहती है तो कभी किसी गजल में गुनगुनाती रहती है।

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ऐसा ही मोरपंख ब्लॉग की दुनिया में चुपचाप चमकता रहता है, महकता रहता है। इसके भी अपने मनभावन रंग हैं। नीले, हरे और चमकीले। इसमें भी यादें हैं, धुन है, धुंध है। भीगी यादें और और कुछ गीले लम्हे हैं। प्रेमभरी तान है और जीवन का छोटे-मोटे खट्टे-मीठे गान हैं। ये कई कैटेगरीज में बँटे हुए हैं। यहाँ ड्रीम्ज हैं, मेमॉयर्स हैं, रोमांस है और यात्राएँ हैं। और यही नहीं गायिकाओं द्वारा गाई गई कुछ कालजयी गजलें भी हैं। यानी एक ही ब्लॉग में आपको मोहब्बत के सात रंग मिलेंगे। रोते-गाते, हंसते-गुनगुनाते। रूठते-मनाते। घूमते-गामते। पास बुलाते-पहलू में बैठाते। सिसकते-महकते। संभलते-गिरते।

यह ब्लॉग है मनीषा शर्मा का। इस ब्लॉग पर ज्यादातर कविताएँ हैं। कविताओं में बहते लम्हे हैं। सितारों से सपने या सपनों से सितारे हैं। ख्वाब हैं जो पलकों से गिरते हैं। जो काँच के नहीं बल्कि नाजुक अरमानों से बनते हैं। वे ख्वाबों को सितारे मानती हैं और उन्हें शबभर गिनने की बातें करती हैं। वे यह मानती हैं कि वे खुद के ही हिस्से हैं जो आसमान में दमकते हैं। उनकी नीली आँखों पर जरा गौर फरमाएँ-

जब देखी वो नीली आँखें..
क्या देखूँ उनमें..समझ न पाई
देखूँ उनमें नीला खुला आसमान
या नीले सागर की गहराई...

उनमें फैले सपने देखूँ ..
या देखूँ गमों की परछाई
नीली रोशनी अँधेरी रातों की!
या बरखा की नीली बदराई

दो बूँदें छलकाईं जब,
बिन बोले कितनी झल्लाई
समेटकर वो बूँदें बना दीं
रवींद्र व्यास|
मेरी कलम की नीली स्याही...

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