उस्ताद अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन

कला के लिए अवार्ड, अवार्ड के लिए कला नहीं

गायत्री शर्मा|
चल मेरे साथ ही चल, आया तेरे दर पर दीवाना...आदि गजलों में अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरने वाले उस्ताद और उस्ताद मोहम्मद हुसैन की जोड़ी का नाम आज भी गजल प्रेमियों की पसंदीदा जोड़ियों में शुमार है। इनकी जोड़ी ने जहाँ भी गाया, वहाँ अपनी गायकी से वो समा पैदा किया कि हर कोई मंत्रमुग्ध होकर 'वाह-वाह' करने लगा। आइए, आज हम भी मुखातिब होते हैं घराने के हुसैन बंधुओं की जोड़ी से।

प्रश्न : आपके गायकी के सफर के बारे में हमें कुछ बताएँ?
उत्तर : सर्वप्रथम हमारे सभी प्रेमियों को हमारा आदाब। हम आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं। अल्लाह के करम और माँ-बाप के आशीर्वाद से ही आज हम आप लोगों के बीच हैं। हम आपके सामने हाजिर होते हैं, अपनी परफार्मेंस देते हैं। आप उसे पसंद करते हैं। इससे बड़ा हमारा सौभाग्य नहीं हो सकता है।

संगीत की शिक्षा हमने बचपन में अपने पिता उस्ताद मरहूम अफजल हुसैन जयपुर वाले से प्राप्त की थी। उसके बाद हमने सन् 1959 में चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में आकाशवाणी, जयपुर से अपने सफर की शुरुआत की। उसके बाद यूथ, बी ग्रेड, ए ग्रेड में आए‍ फिर भारत सरकार द्वारा हमें टॉप ग्रेड से सम्मानित किया गया। इस प्रकार हम लोगों को गाते हुए आज तकरीबन 40-45 साल हो गए हैं।

प्रश्न : आपकी एल्बमों व आपको मिले सम्मानों के बारे में हमें कुछ बताएँ?
हमने एक ही घर में जन्म लिया। हमारे पिताजी ने हमें यही सिखाया था कि हमेशा साथ काम करो। उन्होंने ही हमारी जोड़ी बनाई थी इसलिए हमारा यह रिश्ता कमजोर रिश्ता नहीं बल्कि एक खून, एक खयालात व एक सुर का रिश्ता है।





उत्तर : अब तक हम दोनों भाइयों की गजलों की लगभग 65 एल्बमें बाजार में आ चुकी है। इनमें कुछ एल्बमों के नाम गुलदस्ता, हमख्याल, मेरी मोहब्बत, द ग्रेट गजल्स, कृष्ण जनम भयो आज, कशिश, रिफाकत, याद करते रहे, नूर-ए-इस्लाम आदि प्रमुख है।

यदि हम सम्मानों की बात करें तो हमें राजस्थान सरकार द्वारा स्टेट अवार्ड, राजस्थान संगीत नाटक अकेडमी अवार्ड, 'बेगम अख्तर अवार्ड', नईदिल्ली, उ.प्र. सरकार द्वारा 'मिर्जा गालिब अवार्ड', महाराष्ट्र सरकार द्वारा 'अपना उत्सव अवार्ड' आदि अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

प्रश्न : गीत-संगीत के जिस मुकाम पर आज आप हैं, उस मुकाम की पहचान आपको किस गजल से मिली?
उत्तर: पहचान तो अल्लाहताला देता है। यह आदमी की खूबी होती है कि वह उसे कितना निखारता है। सबसे पहले हमने अपनी 'गुलदस्ता' एल्बम के लिए गजल 'मैं हवा हूँ, कहाँ वतन मेरा' गाई थी। इस गजल में हमने हारमोनाईजेशन के कई प्रयोग किए थे। पहले तो लोगों ने हमारे इस नए प्रयोग पर ध्यान नहीं दिया परंतु बाद में जब लोगों ने उसे समझा, तब वहीं हमारी पहचान बनी।

प्रश्न : आखिर क्या वजह है कि आपके हर कार्यक्रम जुगलबंदी में ही होते हैं?
उत्तर : हमने एक ही घर में जन्म लिया। हमारे पिताजी ने हमें यही सिखाया था कि हमेशा साथ काम करो। उन्होंने ही हमारी जोड़ी बनाई थी इसलिए हमारा यह रिश्ता कमजोर रिश्ता नहीं बल्कि एक खून, एक खयालात व एक सुर का रिश्ता है।

प्रश्न : संगीत के क्षेत्र में आज पॉप, इंडीपॉप व रीमिक्स की जो लहर चल रही है, उसमें गजल का क्या मुकाम है?
उत्तर : यह तो कुदरत है, जिसमें मौसम, खयालात, दिमाग व हालात सब बदल जाते हैं तो संगीत बहुत बड़ी चीज है। लेकिन कभी-कभी इस तरह के नावाकिफ लोग अपने एक्सपेरीमेंट को सामने लाते हैं, जिसको आप पॉप, इंडीपॉप, रीमिक्स आदि कहते हैं। हम तो यही मानते हैं कि कोई भी संगीत खराब नहीं है। संगीत वो खराब है, जो बेसुरा है। वो लय वाकई में अच्छी है जिसको सुनकर आपको चैन मिले। जिस लय पर केवल आपका शरीर हरकत करे, वह अच्छी नहीं है।

प्रश्न : क्या कारण है कि गुलजार साहब की लेखनी का जादू ऑस्कर ले आया लेकिन ग़ज़ल इस मुकाम से अब तक अछूती है?
उत्तर : देखिए, ये तो पसंद करने पर होता है। यदि किसी चीज को अवार्ड मिलने का यह अर्थ नहीं है अन्य चीजें अच्छी नहीं हैं। संगीत किसी भी कला के लिए अवार्ड बन सकता है लेकिन अवार्डों के लिए ही कला नहीं होती है।
(कुछ सोचते हुए मजाक की मुद्रा में) लिहाजा फरमाइए ....

'खुद्दार तबीयत पर इल्जाम नहीं लूँगा
माँगे से जो हाथ आए वो जाम नहीं लूँगा।
इजहार-ए-तमन्ना भी तो अहिले तमन्ना है
वो खुद ही समझ जाए मैं नाम नहीं लूँगा।'

प्रश्न :आप दोनों की पसंदीदा कोई गजल, जो आपके दिल के बहुत करीब है?
उत्तर : हमारे दर्शकों को और हमें जो गजल बहुत अधिक पसंद है वो है 'ऐ मेरे साथी चल', 'मैं हवा हूँ कहाँ वतन मेरा'...
(दोनों भाई एक साथ गजल गाते हैं)

चल मेरे साथ ही चल
ऐ मेरी जाने ग़ज़ल
इन समाजों के बनाए हुए
बंधन से निकल
चल मेरे साथ ही चल ... .

प्रश्न : वेबदुनिया के पाठकों के नाम आपका कोई संदेश?
उत्तर : वेबदुनिया निरंतर आगे बढ़ता जाए तथा उन्नति के शिखर को छुएँ, हमारी यही शुभकामनाएँ है। साथ ही हम पाठकों से यह भी अनुरोध करना चाहेंगे कि यदि आप अच्छा संगीत सुनेंगे, अच्छे कलाकारों को सुनेंगे, तो वो हमारे लिए बहुत खुशी की बात होगी।

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