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सिने-मेल : अक्षय को आमिर या शाहरुख से सीखना चाहिए

Cine-Mail
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प्रिय पाठको,
वेबदुनिया के बॉलीवुड के सेक्शन में नित नई, मनोरंजक, आकर्षक, दिलचस्प और चटपटी सचित्र जानकारियाँ देने की हमारी कोशिश रहती है। इन्हें पढ़कर आपको कैसा लगता है, हम जानना चाहते हैं।

आपकी बॉलीवुड संबंधी प्रतिक्रिया और सुझाव हम ‘सिने-मेल’ में प्रकाशित करेंगे। हमें इंतजार है आपके ई-मेल का।

मुझे बेहद पसंद है। उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारियाँ दीजिए।
सुरेश ([email protected])

‘अब ‘गजनी’ को भेज दें’ आलेख में मैं लेखक से सहमत हूँ। आखिर देखा जाए तो ने जिसका विरोध किया था, आखिरी में उसका ही समर्थन कर दिया कि बच्चा हर चीज में अव्वल होना चाहिए, नहीं तो किसी काम का नहीं है।
मोहन ([email protected])

‘चुकानी पड़ती है शोहरत की कीमत’ पढ़ा और मैं लेखक से सहमत नहीं हूँ। मीडिया को अगर अमिताभ जी ने सलीका सिखाया है तो उसमें बुरा मानने वाली क्‍या बात है। आखिर उन्‍होंने बिल्‍ली के गले में घंटी बाँधने की कोशिश तो की। आप लोग कितने हवा में उड़ रहे हैं यह इसी से समझा जा सकता है कि उनकी सही बातें भी आपके अहंकार को चोट कर गईं। मीडिया के लोगों के बुरे कामों की खबरें इलेक्‍ट्रानिक मीडिया क्‍या प्रिंट मीडिया भी नहीं छापता, क्‍योंकि मीडिया वालों की बिरादरी का सवाल है । अ‌मिताभ ने जो भी बातें की, वो ठीक की हैं।
मोहन ([email protected])

ने भारत में ‘चाँदनी चौक टू चाइना’ का प्रचार क्यों नहीं किया, ये समझ से परे हैं। उन्हें आमिर या से कुछ सीखना चाहिए।
अक्षय राठौर ([email protected])

‘गजनी’ फिल्म में आमिर खान ने जो बॉडी बनाई है, उससे मैं बहुत प्रभावित हूँ। मैं भी उनके जैसी बॉडी बनाना चाहता हूँ।
पवन कुमार ([email protected])

‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ की अमिताभ बच्चन आलोचना इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे फिल्म में काम नहीं कर पाए।
सुशील ([email protected])

गीत-गंगा में ‘सांवले सलोने आए दिन बहार के...’ पढ़ा और मन खुशी से झूम उठा।
सुव्रो ([email protected])

फिल्मों की समीक्षा अच्छी की जाती है। फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ की समीक्षा भी की जानी चाहिए।
वर्तिका ([email protected])

ऊपर से आधुनिक भीतर से दकियानूसी नामक आलेख पढ़ा। लेखक जिस बात को दकियानूसी कह रहा है वो भारत में मर्यादा के नाम से जाती जाती है।
सुरेन ([email protected])

मैं मल्लिका शेरावत का प्रशंसक हूँ। उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा खबरें दी जाएँ।
योगेन्द्रनाथ मिश्रा ([email protected])

‘शेखर सुमन ने अक्षय कुमार से माफी माँगी’ खबर पढ़ी। इस पूरी खबर को पढ़ते समय एक बार भी यह पता नहीं चल पाता कि आखिर शेखर सुमन ने अक्षय कुमार पर कमेन्ट क्या किया था। ये पत्रकारिता के विरुद्ध है कि आप अपने एक पाठक की जिज्ञासा पूरी तरह से शांत करने में कामयाब न हो पाएँ। मैं इस खबर को पढ़ते समय यही खोजता रहा कि शेखर का वह कमेन्ट क्या था, लेकिन अंततः असफल रहा।
सचिन शर्मा ([email protected])

‘वेलकम टू सज्जनपुर’ बहुत अच्छी फिल्म है। आज के युग में ऐसी फिल्म किसी आश्चर्य से कम नहीं है।
रवि वर्मा ([email protected])

दीपिका पादुकोण चर्चा में बने रहने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही हैं।
ओमप्रकाश ([email protected])

‘गाने में सुनाई देगा करीना कपूर का नाम’ पढ़ा। आशा है कि गाना भी करीना की तरह खूबसूरती के साथ फिल्माया जाएगा।
सुनीता पाटीदार ([email protected])

मैं शाहरुख खान का बहुत बड़ा फैन हूँ और उनसे मिलना चाहता हूँ। पता नहीं भगवान मेरी इच्छा कब पूरी करते हैं।
चेतन ([email protected])

‘जन्नत’ फिल्म की नायिका सोनल चौहान खूबसूरत होने के साथ-साथ एक्टिंग भी अच्‍छी करती हैं। उनका भविष्य उज्जवल है।
निशांत माहिवाल ([email protected])

मदनमोहन पर लेख पढ़ा। यह एक दुर्लभ लेख है, जो आज के जमाने में पढ़ने को नहीं मिलता। इस लेख के लिए धन्वयाद।
समय ताम्रकर|
कल्याण सिंह धाकड़ ([email protected])


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