मेरे पास यह गुण नहीं है : अमिताभ बच्चन

बॉलीवुड के महानायक ने कहा है कि वह किसी एक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की बजाए हर फिल्म के साथ अपने अभिनय को और निखारने का प्रयास करते हैं। वह नई फिल्म “” में 102 साल के एक व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं। पिछले पचास वर्षों से फिल्मों में काम कर रहे 75 वर्षीय इस अभिनेता के मुताबिक जीवन का हर दिन कुछ न कुछ सिखाता है। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी रिकॉर्ड को बनाने या तोड़ने की नहीं है। एक साक्षात्कार में बच्चन ने कहा कि अगर दर्शक किसी कलाकार के काम पर गौर नहीं कर रहे तो उसे अगली बार और बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए।

फिल्म का ट्रेलर एक बाप और बेटे के बीच के संबंधों को दिखाता है। आप एक मशहूर बेटे से लेकर एक मशहूर पिता रहे हैं। अपने पिता प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन और अपने बेटे अभिषेक के साथ संबंधों को आप किस तरह बयां करेंगे?
मेरे पिता ने अपना और हमारा उपनाम बच्चन रख लिया। उन्होंने इस उपनाम को प्रतिष्ठा, मूल्य, रचनात्मकता और सम्मान दिलाया। मैं उनकी इस विरासत को आगे ले जाने का प्रयास करूंगा और अगली पीढ़ी से भी इसी बात की आशा करता हूं।

फिल्म “102 नॉट आउट” में काम करने के बाद आपने एक व्यक्ति और एक अभिनेता के तौर पर खुद के बारे में क्या खोज की?
काम के दौरान हर दिन आप कुछ सीखते हैं। हमें उम्मीद रहती है कि दर्शक हमारे काम पर गौर करें। अगर वह नहीं करते तो हमें अगली बार ज्यादा मेहनत करनी चाहिए।

आपको लगता है कि आज के डिजिटल दौर में नई पीढ़ियों के बीच भी पीढ़ियों का अंतर बदल रहा है?
हर दशक या कई बार इससे भी कम समय में विश्व को एक नई पीढ़ी मिलती है। वह जीवन के अपने विचार, नजरिए और समझ लेकर आते हैं। विकास इसी पर निर्भर होता है। मैं इसका स्वागत करता हूं और उनके साथ कदम मिलाने का प्रयास करता हूं। सोशल मीडिया से कुछ मदद मिलती है जैसे मैं अपने ब्लॉग और ऐसे अन्य मंचों पर इसका प्रयास करता हूं।

तीन दशक बाद के साथ फिर से काम करने का अनुभव कैसा रहा?
ऋषि जी के साथ 27 सालों के बाद काम करना ठीक वैसा ही था जैसे किसी साइकिल से उतर कर फिर उस पर सवार होना। उनके साथ काम करना बेहद सुखद और आनंददायी रहा।

निर्देशक उमेश शुक्ला के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? उनकी ‘‘ओएमजी: ओह माई गॉड’’ शानदार फिल्म थी।
वह बहुत उम्दा निर्देशक हैं और उनके साथ काम करना आसान रहा। वह अभिनेताओं को उनके किरदार की अपने तरह से व्याख्या करने की स्वतंत्रता देते हैं। मुझे उम्मीद है कि ‘102 नॉट आउट’ देखने के बाद आप उनकी उसी तरह तारीफ करेंगे, जिस तरह से आपने ‘ओएमजी’ की प्रशंसा की।
फिल्म में आपका चरित्र सबसे बूढ़े व्यक्ति के तौर पर रिकॉर्ड बनाने का है जो चीन के एक व्यक्ति के नाम पर है। हिंदी सिनेमा में 50 साल गुजारने के बाद अब आप और कितने रिकॉर्ड तोड़ना चाहते हैं ?
मुझे नहीं पता कि मैंने कोई रिकॉर्ड तोड़ा है या नहीं। लेकिन निश्चित ही मैं रिकॉर्ड तोड़ने के लिए काम नहीं करता, बल्कि मैं अपने काम के साथ न्याय कर सकूं इसके लिए मैं जी तोड़ मेहनत करता हूं।

आपकी बेटी श्वेता नंदा ने एक उपन्यास लिखा है। ऐसा लगता है कि वह लेखन की परंपरा को परिवार में जिंदा रखेंगी ?
बिलकुल। मैं ज्यादा गौरवान्वित पिता इसलिए भी हूं क्योंकि वह मेरे पिता की विरासत को आगे ले जा रही हैं।

क्या आप सोचते हैं कि तमाम व्यस्तताओं के बावजूद आपके भीतर का लेखक किसी दिन पुस्तक की शक्ल में सामने आएगा?
कभी नहीं। मेरे पास इस तरह का गुण नहीं है।(भाषा)

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