एसडी बर्मन... गाना गाकर जेल से छूटे

मुंबई। मशहूर के बारे में अन्‍नू कपूर ने रेडियो पर एक बहुत ही रोचक किस्सा सुनाया, जिसमें उन्‍होंने बताया कि एक मर्तबा वे किस तरह अपने दोस्तों के साथ लॉकअप में बंद हो गए थे और कैसे इस कैदखाने से बाहर निकले...वो भी अपनी कला के बूते पर...
महान संगी‍तकार के बारे में इससे पहले सिर्फ उनके संगीत के जुनून को लेकर ही चर्चे होते रहते थे, लेकिन लॉकअप में रहने की बात पहली बार सामने आई है। बिग एफएम पर 'सुहाना सफर विद अन्‍नू कपूर' में उन्होंने बताया कि बर्मन दादा बचपन में बहुत शरारती हुआ करते थे, ठीक दूसरे शरारती बच्चों की तरह..
जब बर्मन दादा 14 साल के थे, तब उन्हें दोस्तों के साथ नई जगह देखने और सैर-सपाटे करने का बहुत शौक था। एक मर्तबा वे अपने कुछ दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गए। ट्रेन में खूब मस्ती की और जब वे कोमिला स्टेशन पर उतरे तो सभी दोस्तों के होश उड़ गए, क्योंकि वहां पर टिकट चेकर यात्रियों के टिकट चेक कर रहा था और एसडी बर्मन व उनके सभी दोस्त बेटिकट थे।

फिर क्या होना था?.. ट्रेन में बेटिकट यात्रा करने के आरोप में टीसी ने सभी को पकड़ा और स्टेशन मास्टर के सामने पेश किया। स्टेशन मास्टर भी सख्त किस्म का इंसान था। उसने इन बच्चों को सबक सिखाने के लिए स्टेशन पर बने लॉकअप में बंद करवाने का आदेश दिया।
सभी की मस्ती काफूर हो चुकी थी। लॉकअप में एसडी बर्मन और उनके दोस्त जमा हो चुके थे। चूंकि दिनभर की थकान बच्चों पर हावी थी, लिहाजा दूसरे तो सभी सो गए, लेकिन बर्मन दादा को नींद नहीं आई। लॉकअप में मच्छर तो थे ही साथ ही उन्हें जमकर भूख लग रही थी। यही कारण था कि नींद उनसे कोसों दूर थी...

14 बरस के दु:खी बर्मन दादा रात के 2 बजे भगवान को याद करते हुए एक भजन गाने लगे...स्टेशन मास्टर का घर लॉकअप के पीछे ही था और वो कब का गहरी नींद में चला गया था, लेकिन उसकी बहन जाग रही थी। जब बहन के कानों में इस भजन की आवाज पहुंची तो वो चौंक गई।

बर्मन दादा अपनी सुरीली आवाज में भजन में खोए हुए थे और दूसरी तरफ स्टे‍शन मास्टर की बहन ने अपने भाई को सोते से जगाया और कहा कि देखो ये आवाज कहां से आ रही है। कोई बहुत सुर में कितना सुंदर भजन गा रहा है। स्टेशन मास्टर को भी अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ।

फिर ये दोनों भाई-बहन स्टेशन आए और वहां लॉकअप में बंद बर्मन दादा को भजन गाते देखा। इस सुरीली आवाज ने दोनों को दीवाना बना दिया था...स्टेशन मास्टर ने रात में ही लॉकअप खुलवाया और सभी बच्चों को अपने घर ले गए। उनकी बहन ने रात में बच्चों को खाना बनाकर खिलाया और सुबह ससम्मान विदा किया।

...तो देखा आपने, राहुल देव बर्मन के पिता यानी सचिन देव बर्मन को, जिन्होंने 14 साल की उम्र में अपनी प्रतिभा के बूते स्वयं को लॉकअप से आजाद करवा लिया...यकीनन भारतीय संगीत में एसडी बर्मन के गाए गीत और फिल्मों में दिया उनका संगीत कालजयी है। (वेबदुनिया न्यूज)

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