अमिताभ बच्चन की काला पत्थर आज 38 वर्ष की हुई

समय ताम्रकर| Last Updated: गुरुवार, 24 अगस्त 2017 (12:07 IST)
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24 अगस्त 1979 को यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित फिल्म 'काला पत्थर' रिलीज हुई थी। नाम से ही स्पष्ट है कि यह फिल्म कोयला खदान के बारे में हैं। इसमें शोषित मजदूर और खदान मालिकों के संघर्ष के साथ फिल्म के प्रमुख सितारों की प्रेम कहानी को भी अच्छे से पिरोया गया था। यह यश चोपड़ा के मिजाज के विपरीत की फिल्म लगती है। वे खूबसूरत लोकेशन पर गुड लुकिंग हीरो-हीरोइन की प्रेम कहानियां दिखाने के बारे में मशहूर थे, लेकिन में मेहनतकश पसीने से भीगे और चेहरे पर कोयले लगे मजदूर नजर आते हैं। 
 
फिल्म मल्टीस्टारर है। अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, राखी गुलजार, नीतू सिंह, परवीन बाबी जैसे सितारे इस फिल्म की शोभा बढ़ाते हैं। अमिताभ और शत्रुघ्न में उस समय तनाव चल रहा था। फिल्म की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, लिहाजा यह तनाव फिल्म में उभर कर आता है। यश चोपड़ा के अनुसार अमिताभ और शत्रुघ्न को साथ में लेकर शूटिंग करना मुश्किल था और उन्हें डर रहता था कि दोनों में हाथापाई न हो जाए। 
 
अमिताभ ऐसे मर्चेण्ट नेवी केप्टन बने थे जो 300 यात्रियों की जान खतरे में डालते हुए डूबते जहाज से भाग खड़ा होता है। उसका अपमान होता है और वह छोटी सी जगह में आकर कोयला खदान में मजदूर बन जाता है। उसके अंदर बहुत गुस्सा भरा हुआ है और अमिताभ ने एंग्री यंग मैन का यह किरदार क्या खूब निभाया है। उनके ताप को सिनेमाहॉल में बैठा दर्शक महूस करता है। राखी इसमें डॉक्टर की भूमिका में हैं। अमिताभ और राखी एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं। फिल्म में एक उम्दा दृश्य है। राखी अंग्रेजी बोलती है और अमिताभ भी अंग्रेजी में जवाब दे देते हैं। राखी एक मजदूर के मुंह से अंग्रेजी सुन कर दंग रह जाती है। 
 
शशि कपूर ने इंजीनियर का रोल अदा किया था, जो पैसा तो खदान मालिकों से लेता है, लेकिन मजदूरों का ध्यान रखता है। शत्रुघ्न सिन्हा एक अपराधी है जो पुलिस के डर से भाग कर यहां आ छिपा है और कोयले की खदान में काम करता है। दोनों की तनातनी फिल्म में खूब उभारी गई है। 
 
फिल्म में राजेश रोशन का संगीत है। एक रास्ता है जिंदगी, बांहों में तेरी, मेरी डोरो से आए बारात जैसे गाने हिट हुए थे। फिल्मफेअर श्रेणी के लिए यह आठ श्रेणियों में नामांकित हुई थी, लेकिन एक भी पुरस्कार इसे नहीं मिला। 
 
बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का प्रदर्शन औसत रहा था। अमिताभ की लोकप्रियता, यश चोपड़ा जैसा प्रतिष्ठित निर्देशक और इतने सारे सितारों की उपस्थिति के बावजूद यह फिल्म दर्शकों को लुभा नहीं पाई।
 
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