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Written By BBC Hindi
Last Modified: मंगलवार, 28 दिसंबर 2021 (08:33 IST)

रामपुर रियासत की 2600 करोड़ की संपत्ति का कैसे होगा बंटवारा, 49 साल से चल रहा विवाद

रामपुर रियासत की 2600 करोड़ की संपत्ति का कैसे होगा बंटवारा, 49 साल से चल रहा विवाद - rampur property battle
शहबाज़ अनवर, बीबीसी हिंदी के लिए
 
रामपुर में आख़िरी नवाब रज़ा अली ख़ान की संपत्ति के बंटवारे को लेकर रामपुर की ज़िला अदालत ने छह दिसम्बर को सुप्रीम कोर्ट को एक 'पार्टीशन स्कीम' भेजी है। इस पार्टीशन स्कीम के तहत नवाब रज़ा अली ख़ां की क़रीब 2600 करोड़ से अधिक की संपत्ति को शरिया क़ानून के तहत नवाब के 16 वारिसों में बांटे जाने का फ़ैसला सुनाया गया है।
 
इस प्रस्ताव पर अब सुप्रीम कोर्ट को अंतिम निर्णय लेना है। नवाब रज़ा अली ख़ान के पौत्र और उनके वारिसों में एक नवाब काज़िम अली के वकील संदीप सक्सेना ने कहा, " सुप्रीम कोर्ट ने 30 जुलाई 2019 को इस मामले में शरिया क़ानून के तहत फ़ैसला लेने के लिए रामपुर अदालत को आदेश दिया था। हालांकि इससे पहले निचली अदालत और हाईकोर्ट ने नवाब रज़ा अली ख़ान के बड़े बेटे मुर्तज़ा अली ख़ान के वारिसों के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था।"
 
क्या है मामला?
दरअसल, रामपुर सियासत के अंतिम शासक नवाब रज़ा अली ख़ान की चल-अचल संपत्ति को लेकर 1972 से ही विवाद चल रहा है। इस विवाद में एक तरफ़ मरहूम नवाब रज़ा अली के बड़े बेटे मरहूम नवाब मुर्तज़ा अली ख़ान के बेटे मोहम्मद अली ख़ान और बेटी निगहत अली ख़ान हैं। जबकि दूसरी तरफ़ नवाब रज़ा अली ख़ान के दो अन्य बेटों मरहूम नवाब ज़ुल्फ़िक़ार अली ख़ान व मरहूम नवाब आबिद अली ख़ान के बच्चे और छह बहनें हैं।
 
इस पक्ष का आरोप है कि नवाब मुर्तज़ा अली ख़ान और उनके परिवार ने नवाब रज़ा अली ख़ान की पांच अचल संपत्तियों सहित चल संपत्ति पर भी क़ब्ज़ा कर लिया था। इसको चुनौती देने वाली याचिका नवाब रज़ा अली ख़ान की बड़ी बेटी की बेटी ख़ुर्शीद लका बेगम तलत फ़ातिमा की ओर से 1972 में दाख़िल की गई थी।
 
इस याचिका में अदालत से मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत शरिया क़ानून के तहत सभी वारिसों में संपत्ति बंटवारे की मांग की थी।
 
49 साल से चल रहा है विवाद
नवाब काज़िम अली ख़ान के वकील संदीप सक्सेना कहते हैं, " रामपुर के जो आख़िरी नवाब थे, नवाब रज़ा अली ख़ान, उनकी रामपुर में पांच संपत्ति थी, कोठी ख़ास बाग़, बेनज़ीर बाग़, लखी बाग़, कुंडा और नवाब रेलवे स्टेशन। यह पांचों संपत्तियां नवाब रज़ा अली ख़ान की अपनी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी थीं।"
 
वह आगे कहते हैं, " जब देश आज़ाद हुआ और तमाम रजवाड़ों का विलय हुआ तो रामपुर की रियासत भी उसमें शामिल थी। उस मौके पर संभवत: नवाब रज़ा अली ख़ान को लगा होगा कि हमारे पास क्या बचेगा तो उन्होंने ये पांच संपत्तियां अपने पास रख ली थीं। वर्ष 1966 में नवाब अली रज़ा की मौत के बाद इन्हीं संपत्तियों को लेकर वर्ष 1972 में पार्टीशन के लिए दावा दायर किया गया।
 
ये मुक़दमा रामपुर ज़िला अदालत से होते हुए हाइकोर्ट पहुंचा और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। इसके उपरांत 30 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट से रामपुर की ज़िला अदालत को आदेश हुआ कि मुस्लिम पर्सनल लॉ, शरीयत के हिसाब से यह संपत्ति बांटी जाएगी।"
 
सर्वे कर आंकी गई संपत्तियों की क़ीमत
नवाब रज़ा अली ख़ान की इन पांचों संपत्तियों का मूल्यांकन करने के लिए एक सर्वे टीम बनाई गई। इस सर्वे के मुकम्मल होने में लगभग सवा साल का वक़्त लगा।
 
संदीप सक्सेना कहते हैं, "पार्टीशन स्कीम को अमली जामा पहनाने के लिए कोर्ट के निर्देश पर सर्वे टीम और एडवोकेट कमिश्नर ने चल-अचल संपत्ति का मूल्यांकन कर कोर्ट को ये रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद 15 जुलाई 2021 को सभी पक्षकारों के बीच क़रीब 143 पन्नों की प्रस्तवित पार्टीशन स्कीम को पेश किया गया और उनसे आपत्तियां मांगी गई थी।
 
आपत्तियों के निपटारे के बाद ज़िला अदालत की ओर से बंटवारा विभाजन योजना तैयार की गई। इसकी एक प्रति ज़िला अदालत की ओर से सुप्रीम कोर्ट को भेजी गई है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग दो साल चार माह से अधिक का समय लगा।"
 
कौन-कौन हैं वारिस जिनमें होगा संपत्ति का बंटवारा
रामपुर सियासत के आख़िरी शासक नवाब रज़ा अली ख़ान के परिवार में उनकी तीन पत्नियां, तीन बेटे और छह बेटियां थी।
 
नवाब रज़ा अली ख़ान के पौत्र काज़िम अली उर्फ़ नवेद मियां कहते हैं, "हमारे दादा नवाब रज़ा अली ख़ान की तीन बीवियां-रफ़त ज़मानी बेगम, केसर ज़मानी बेगम और तलत ज़मानी बेगम थीं। उनके तीन बेटे थे- मुर्तज़ा अली ख़ान, ज़ुल्फ़िक़ार अली ख़ान और आबिद अली ख़ान थे। छह बेटियों में पांच बेटियां एक दादी से थीं जिनमें ख़ुर्शीद लका बेगम, बिरजीस लका बेगम, क़मर लका बेगम, अख़्तर लका बेगम और नाहिद लका बेगम। सबसे छोटी फूफी दादी मेहरुन्निसा, तलत ज़मानी की बेटी हैं।"
 
"नवाब रज़ा अली ख़ान के पुत्रों की संतानों में नवाब मुर्तज़ा अली ख़ान के पुत्र मोहम्मद अली ख़ान और पुत्री निगहत अली ख़ान हैं जबकि नवाब ज़ुल्फ़िक़ार अली ख़ान के बच्चों में नवाब काज़िम अली उर्फ़ नवेद मियां और दो बेटियां समन अली ख़ान और सबा दुर्रेज़ अहमद हैं। नवाब ज़ुल्फ़िक़ार की पत्नी व पूर्व सांसद बेगम नूर बानो हैं। सबसे छोटे नवाब आबिद अली ख़ान के परिवार में सैयद रज़ा एंड्रूज़ अली ख़ान और सैयद नदीम अली ख़ान हैं जो वर्तमान में जर्मनी में रहते हैं। कुल मिलाकर 16 वारिसों में अब इस संपत्ति का बंटवारा होगा।"
 
हालांकि मुर्तज़ा अली ख़ान के इंतक़ाल के बाद उनके बेटे मोहम्मद अली ख़ान और उनकी पुत्री निगहत अली ख़ान इस संपत्ति पर अपना हक़ जताते रहे हैं। इस परिवार के ये दोनों सदस्य वर्तमान में गोवा और दिल्ली में रहते हैं।
 
रामपुर अदालत की पार्टीशन स्कीम को लेकर पूर्व सांसद बेगम नूर बानो ने कहा, "शरीयत के हिसाब से बंटवारे को लेकर हमारे बीच कोई रंजिश वगैरह नहीं है। सब कुछ इत्मीनान के साथ हुआ है। हां, अड़चनों आदि की वजह से इसमें थोड़ा विलंब ज़रूर हुआ है, 49 साल के लगभग का वक़्त लगा है, लेकिन अब जल्द ही कोर्ट इसमें अन्तिम निर्णय की तरफ़ है। हम उस वक़्त का ही इंतज़ार कर रहे हैं।"
 
दरअसल, ये सारा मामला नवाबी दौर और गणराज्य में विलय के बाद संपत्ति बंटवारा नियमों में पैदा हुई भिन्नता को लेकर माना जा रहा है।
 
रामपुर के वरिष्ठ वकील गजेंद्र सिंह कहते हैं, "देखिए नवाबी दौर में ये परंपरा थी कि राजा की मौत के बाद उसकी सल्तनत का उत्तराधिकारी घर का बड़ा बेटा ही होता था। जहां वारिस नहीं होता था वहां संपत्ति को कोर्ट ऑफ़ वार्ड्स के तहत अंग्रेज़ अपने हक़ में ले लिया करते थे। लेकिन स्टेट्स को भारत गणराज्य में शामिल करने के बाद नवाब या फिर राजा एक आम नागरिक की तरह ही क़ानून के दायरे में आ गए।"
 
रामपुर में नवाब रज़ा अली ख़ान की चल और अचल संपत्ति की जो क़ीमत सर्वे रिपोर्ट में सामने आई है, उसके मुताबिक़ ये क़ीमत 2600 करोड़ से अधिक है। मामले के वकील संदीप सक्सेना कहते हैं, "सर्वे रिपोर्ट में चल और अचल संपत्ति क़ीमत 2600 से 2700 करोड़ के बीच आंकी गई है।"
 
नवाब नवेद मियां कहते हैं, "ये बात बिल्कुल तय है कि नवाब रज़ा अली ख़ान के जो भी उत्तराधिकारी हैं जिनमें उनकी तीन बीवियां, छह बेटियां, तीन बेटे हैं, उनके वारिसों में इस्लामिक शरिया के हिसाब से संपत्ति बंटवारा होगा।"
 
देश के पूर्व राष्ट्रपति की बहू भी हैं वारिस
रामपुर के नवाब रज़ा अली ख़ान की पार्टीशन स्कीम के वारिसों में भारत के पूर्व राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की बहू सबा दुर्रेज़ अहमद भी हैं। सबा दुर्रेज़, नवाब रज़ा अली खां के पुत्र नवाब ज़ुल्फ़िक़ार अली खां की बेटी हैं। सबा दुर्रेज़ अहमद के पति दुर्रेज़ अहमद जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं।
 
उधर अन्य पक्षकारों में नवाब रज़ा अली ख़ान की बेटी मेहरून्निसा भी पक्षकार हैं। उनके पति पाकिस्तान के पूर्व एयर चीफ़ मार्शल अब्दुल रहीम ख़ान हैं। सभी वारिसों में सिर्फ़ नवाब नवेद मियां और उनकी मां बेगम नूर बानो ही रामपुर में रहते हैं।
 
रामपुर की शान है 55 एकड़ में फैला 205 कमरों वाला महल
इमामबाड़ा ख़ास बाग़ में बना महल रामपुर की शान माना जाता है। नवाब रज़ा अली ख़ान की संपत्तियों में ये ख़ास है। नवाब नवेद मियां कहते हैं, "यह संपत्ति सबसे बड़ी है। यहां जो महल है उसे 100 साल में तीन टुकड़ों में बनाकर तैयार किया गया था। नवाब हामिद अली ख़ान के समय में यह महल बनना शुरू हुआ था जो नवाब रज़ा अली ख़ान के समय वर्ष 1930 में बनकर तैयार हुआ। यहां तमाम लोग सेल्फ़ी लेने और घूमने के लिए आते हैं।" उनका यह भी दावा है कि 205 कमरों वाला ये महल एशिया का पहला पूर्ण वातानुकूलित महल था।
 
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