वो शहर जहां रेप आम है और हर तीसरा आदमी रेपिस्ट

Last Updated: सोमवार, 23 जुलाई 2018 (13:01 IST)
दक्षिण अफ्रीका में जोहानसबर्ग के सबसे खतरनाक इलाकों में से एक है। यहां महिलाओं का होना आम बात है। दक्षिण अफ्रीका के शहर डीपस्लूट के रहने वाले दो युवाओं ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अबतक कई महिलाओं का बलात्कार किया है। कैमरे के सामने ये कहते वक़्त उनके चेहरे पर एक शिकन तक नहीं थी।

उन्होंने दावा किया कि वो नहीं जानते थे कि वो कुछ गलत कर रहे हैं। उन्होंने कभी खुद को उन बलात्कार पीड़िताओं की जगह रखकर उनकी तकलीफ़ का अंदाज़ा लगाने की कोशिश नहीं की। वो कैमरे पर अपना चेहरा दिखाने को तैयार थे लेकिन अपने नाम गुप्त रखना चाहते थे। उन्होंने बड़े आराम से अपने अपराधों की कहानियां हमारे सामने रखीं।


उन्होंने बताया, "जैसे ही वो दरवाज़ा खोलतीं, हम उनके घर में घुस जाते और अपना चाकू निकाल लेते। वो चिल्लाती थीं। हम उन्हें चुप हो जाने को कहते। उन्हीं के बिस्तर में ले जाकर हम उनका करते थे।"

दोनों युवकों में से एक दूसरे की ओर मुड़ा और बोला, "यहां तक कि मैंने एक बार इसी के सामने इसकी गर्लफ्रेंड का रेप कर दिया था।" ये बयान हैरान कर देने वाले हैं, लेकिन डीपस्लूट में ये सब बेहद आम है।


हर तीसरा शख्स रेपिस्ट
इस शहर के तीन में से एक पुरुष ने माना कि उन्होंने कम से कम एक बार बलात्कार किया है। ये संख्या यहां की आबादी की 38 फ़ीसदी है। ये बात 2016 में किए गए एक सर्वे में सामने आई थी। इस सर्वे के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ विटवॉटर्सरंड ने 2,600 से अधिक आदमियों से बात की थी।

कुछ लोगों ने एक ही महिला का दो बार रेप किया था। मारिया का उनके ही घर में रेप किया गया था। जिस वक्त उनका रेप हुआ, उनकी बेटी बगल के कमरे में सो रही थी।


"मैं बेटी के ना उठने की प्रार्थना कर रही थी, मुझे डर था कि कहीं वो लोग उसे कुछ नुकसान ना पहुंचाएं।" उनके ने कहा कि वो किसी को मारेंगे नहीं, लेकिन वो जो करना चाहते हैं मारिया उन्हें करने दे।

मारिया बताती हैं, "मैंने कहा तुम्हे मेरे साथ जो करना है कर लो। इसके बाद उसने मेरा रेप किया। वो दूसरी बार मेरा रेप कर रहा था।" बहुत कम पीड़िताएं अपने रेपिस्ट का विरोध कर पाती हैं। डीपस्लूट में लोगों के मन में ये धारणा है कि बलात्कार अपराध नहीं है।

रेप की कोई सज़ा नहीं
बीते तीन सालों में डीपस्लूट में बलात्कार की 500 शिकायतें की गईं, लेकिन किसी भी मामले में कानूनी कार्रवाई नहीं हुई। रेप के मामले में ही नहीं बल्कि दूसरे अपराधों के मामलों में भी यहां का कानून अपाहिज नज़र आता है।

स्थानीय पत्रकार गोल्डन एमटिका क्राइम रिपोर्टिंग करते हैं। वो कहते हैं, "रात में डीपस्लूट की सड़कों पर निकलना बेहद खतरनाक है। कुछ बुरा होने पर मदद मिलना मुश्किल होता है।" "रात के 10 या 11 बजे भी किसी की हत्या हो सकती है और पुलिस अगले दिन तक उस व्यक्ति के शव को नहीं उठाती।"


लोगों ने कानून हाथ में लिया
एमटिका कहते हैं कि डीपस्लूट में कानून नाम की कोई चीज़ नहीं है। ऐसे में कई बार बड़े से बड़े अपराध हो जाते हैं। अपराधों के प्रति प्रशासन का ये ढीला रवैया यहां के आम लोगों को खूब अखरता है।

प्रशासन के कार्रवाई ना करने की वजह से यहां के लोग कानून को अपने हाथ में ले लेते हैं। अपराधियों को सज़ा देने के लिए लोग कई बार उन्हें पीट-पीट कर मार देते हैं।


एमटिका के मुताबिक ऐसी घटनाएं यहां हर हफ्ते होती हैं। उन्होंने आंखों देखी एक घटना के बारे में बताया, "भीड़ ने तीन लोगों पर पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी।"


एमटिका कहते हैं कि किसी इंसान को अपनी नज़रों के सामने तड़पते हुए देखना बहुत ही भयानक होता है, लेकिन वो उस व्यक्ति की मदद के लिए कुछ नहीं कर सके। क्योंकि अगर वो ऐसा करते तो उन्हें भी भीड़ के गुस्से का शिकार होना पड़ता। यहां तक की पुलिस भी इन मामलों में हस्तक्षेप नहीं करती, भले ही वो सब उनके सामने ही क्यों ना घट रहा हो।

यहां कई लोग लिंचिंग को सही ठहराते हैं, ख़ासकर अगर अपराधी रेपिस्ट हो। डीपस्लूट के एक निवासी कहते हैं, "उनका मर जाना ही अच्छा है, वो हमारे घर में घुस जाते हैं और हमारे पतियों के सामने हमारा रेप करते हैं। वो हमारे पति को कहते हैं कि देखो, देखो मैं कैसे तुम्हारी पत्नी का रेप कर रहा हूं।"


लेकिन लिंचिंग के बाद भी अपराध रुक नहीं रहे हैं। डीपस्लूट को "डीप डिच" यानी गहरी खाई कहा जाता है और यहां के लोगों को लगता है कि वो इसी गहरी खाई में फंस कर रह गए हैं।

ये शहर गरीबी और बेरोज़गारी की समस्या से जूझ रहा है। लेकिन महिलाओं के खिलाफ़ अपराध और रेप कल्चर ने यहां की आर्थिक स्थिति को और बुरा कर दिया है।

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