10 नायाब चीज़ें जिनसे फ़िनलैंड बन जाता है ख़ास

पुनः संशोधित शनिवार, 21 अप्रैल 2018 (10:38 IST)
दुनिया का हर देश हमारे आपके जीवन में किसी न किसी तरह मौजूद होता है। ख़ास बात ये है कि अक्सर हमें ये पता भी नहीं होता कि फलां चीज़, शब्द या खाने का सामान असल में किस मुल्क से आया है। अपनी ख़ास संस्कृति और पहचान के लिए चर्चित फ़िनलैंड भी एक ऐसा ही मुल्क है जिसने दुनिया को तमाम वो चीजें दी हैं जो अपने आप में बेहद ख़ास हैं।
1. कार्टून कैरेक्टर मूमिन
ये मुमकिन है कि आपने कभी न कभी मूमिन नाम के इस कार्टून कैरेक्टर को देखा हो और आपको ये बेहद पसंद हो। दरअसल ये फ़िनलैंड के उपन्यासकार, पेंटर, और इलस्ट्रेटर टॉव जेनसन की देन है। मस्ती से ज़िंदगी जीने वाले इस कार्टून किरदार की नाक दरियाई घोड़े जैसी होती है।

जेनसन ने साल 1945 में बच्चों के लिए पहली मूमिन किताब लिखी थी। साल 1945 से 1993 तक नौ किताबें, पांच तस्वीरों वाली किताबें और कॉमिक स्ट्रिप इस कार्टून कैरेक्टर पर रिलीज़ हो चुकी हैं। इसके अलावा इस कार्टून कैरेक्टर के आसपास तमाम कार्टून फ़िल्में भी बन चुकी हैं। यही नहीं अगर आप कभी जाएं तो मूमिन वर्ल्ड थीम पार्क भी जा सकते हैं।
2. जीसस से भी पुराना है सौना बाथ
दुनिया के कई देशों में सौना बाथ यानी गर्म भाप छोड़ने वाले बाथरूम को विलासिता से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन अगर कभी आपको फिनलैंड जाने का मौका मिले तो आप देखेंगे कि सौना बाथ रोजमर्रा की चीज़ है। यही नहीं, फिनलैंड वाले इस अपनी राष्ट्रीय पहचान से जोड़कर देखते हैं।

इस प्रथा की असल शुरुआत का पता लगाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन ये माना जाता है कि फिनलैंड के सौना जीसस के जन्म के सात हज़ार साल पहले भी मौजूद थे। फिनलैंड में 20 लाख सौना बाथ होंगे जिसका मतलब है कि औसत रूप से हर घर में एक सौना बाथ रूम होता है। फिनलैंड की महिलाएं अपने बच्चों को जन्म भी घरेलू सौना बाथ रूम में ही दिया करती थीं।
3. नोकिया फ़ोन्स का ज़माना
अगर आपको आज स्मार्टफोन के दौर में भी कभी-कभी अपने पुराने नोकिया फ़ोन की याद आ जाती है तो इसके पीछे एक कारण है। दरअसल, फिनलैंड से आने वाली नोकिया ने अपने सस्ते सुंदर और टिकाऊ मोबाइल फ़ोनों से दूरसंचार के क्षेत्र में क्रांति ला दी थी।

साल 2003 में लॉन्च होने वाला 1100 मॉडल दुनिया में सबसे ज़्यादा बिकने वाला मोबाइल बना। और लगभग 250 मिलियन लोगों ने इसका इस्तेमाल किया।
4. हार्ट रेट मॉनिटर
अगर आप वॉक करते समय अपने दिल की धड़कन को चेक करते हैं तो आपको फिनलैंड को शुक्रिया कहना चाहिए। साल 1977 को फिनलैंड की कंपनी पोलर इलेक्ट्रो ने एक डिवाइस बनाई जो एथलीट के शरीर पर बांधी जाने के बाद उसके दिल की धड़कन सुन सकती है।
ये एक बैटरी से चलने वाला और उंगलियों के पोरों पर पहनी जाने वाली डिवाइस थी। लेकिन 80 के दशक में ही ये डिवाइस वायरलैस तकनीक से लैस हो गई थी। अब आपको अपनी हार्टरेट सेंसिंग डिवाइस को उंगलियों पर लगाने की ज़रूरत नहीं है।

5. हार न मानने का मतलब सिसू
आपने कभी न कभी ये शब्द सुना ही होगा लेकिन शायद आपको ये पता नहीं है कि ये शब्द फिनलैंड से आया हुआ है। और इसका मतलब होता है भारी विपत्तियों में भी साहस का परिचय देना। ख़ास बात ये है कि अंग्रेजी भाषा में इसका समानार्थी कोई शब्द नहीं है।
6. कारेलियन पैस्टी
ब्रिटेन के कॉर्नवेल में रहने वाले ही पैस्टी के दीवाने नहीं हैं। फिनलैंड में राष्ट्रीय भोजन के रूप में चर्चिच कारेलियन पैस्टी भी अपने आप में ख़ास है। ये पैस्टी चावल, आलू, गाजर और अंडे आदि से बनती है। ये डिश आज के दौर में फिनलैंड से लेकर रूस तक में प्रसिद्ध हो चुकी है।

7. एंग्री बर्ड्स की दुनिया
अगर आप एंग्री बर्ड्स के दीवाने हैं तो आपको ये जानकर अचंभा होगा कि दुनिया में मोबाइल गेमिंग के क्षेत्र में क्रांति लाने वाला ये सॉफ़्टवेयर भी फिनलैंड की कंपनी रोविया एंटरटेनमेंट ने बनाया है।
दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय यह गेम अब तक तीन अरब बार डाउनलोड किया जा चुका है। मोबाइल गेम के अलावा इस कैरेक्टर पर फ़िल्म और एक थीम पार्क बनाया जा चुका है।

8. सैंटा क्लॉज़ का गांव
सैंटा क्लॉज़ के निवास स्थान को लेकर कई विवाद हैं। नॉर्वे के लोग मानते हैं कि सेंटा क्लॉज़ द्रोबक में तो दानिश लोगों मानते हैं कि वह ग्रीन लैंड में रहते हैं। वहीं, ब्रितानी और अमरीकी लोगों के अनुसार सैंटा क्लॉज़ उत्तरी ध्रुव पर रहते हैं। लेकिन फिनलैंड के लोग इस बात पर अड़े हैं कि असली सैंटा क्लॉज़ लैपलैंड में रहते हैं। और अगर आप रोवेनिमी में जाएं तो आपको उनका गांव मिल सकते हैं।
9. फिनलैंडिया
साल 1899 में फिनलैंड के संगीतकार जीन सिबेलस द्वारा बनाए गई धुन फिनलैंडिया के बारे में माना जाता है कि इसने फिनलैंड के लोगों के संघर्ष को एक आवाज़ दी। आप ये ऐंथम हॉलीवुड की फ़िल्म डाइ हार्ड 2 के फिल्म स्कोर के रूप में भी सुन सकते हैं।

10. बबल चेयर
अगर कोई भी फ़िल्मकार किसी भविष्य के समय के लेकर बनाई जा रही फ़िल्म की तैयारी करेगा तो वह बबल चेयर को जरूर चुनना चाहेगा। प्लास्टिक से बनी हवा में झूलती हुई ये चेयर एक फिनलैंड के डिज़ाइनर ऐरो आर्नियो की करामात है। आर्नियो ने साल 1968 में इस चेयर को डिज़ाइन किया था।
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