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अटलजी से जुड़े रोचक किस्से, मटके से कर डाली थी खुद की तुलना, मनमोहन सिंह को इस्तीफा देने से रोका था

बुधवार,अगस्त 22, 2018
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तुम्हारी देह और हमारे मन को जलाते अंगारों में हवा में घुल चुके तुम्हारे ही विचारों में आकाश के तारों में
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कुछ ही लोगों से सभी का नाता होता है नाता आदर्शों का, प्रेरणा का, सेवाभाव का, देशप्रेम के जज्बे का एक सार्वजनिक नाता, उन ...
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सूर्य उदय से सूर्यास्त तक सुनहरी गुलाबी बदलती किरणों को निहारकर शब्दों में
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अटलबिहारी वाजपेयी की पूरी जीवन यात्रा के मूल्यांकन के लिए कुछ आधार बनाना होगा। उनको भारतीय राजनीति का शलाका पुरुष मानने ...
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ऐसा चरित्र जब आंखों के सामने से होकर गुजरता है, तो यह सवाल मन में आना स्वभाविक है कि आखिर ऐसा क्या था इस शख्स में, क्या ...
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बहुत उदास, बहुत निराश है आज की सुबह, अपने लाड़ले के बिना हुई है आज की सुबह।
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जींद। हरियाणा के शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने सहयोगियों का खासा ...
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु को लेकर भी कुछ इसी तरह की भविष्यवाणी की गई थी। और यह भविष्यवाणी बिल्कुल ...
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अटल जी ने भले ही मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्म लिया लेकिन वह उत्तरप्रदेश के लखनऊवासियों के हर दिल में वास करते थे। ...
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एक छात्र ने उनसे पूछा, आपने शादी क्यों नहीं की। अटलजी ने ठहाका लगाते हुए कहा, ‘यार जब शादी की उम्र थी तब ...
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जो जिया हो भारत भारती के लिए, जिसने ताउम्र केवल राष्ट्र को जिया, कविता के शब्दों से संसद के गर्भगृह को सुशोभित किया ...
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बदला मौसम, ढलती छाया, रिसती गागर, लुटती माया, सब कुछ दांव लगाकर घाटे का व्यापार हुआ। नए मील का पत्‍थर पार हुआ।
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शब्दों को एकत्र किया, सजाया, संजोया और जब लिखने बैठी तो फिर सब बिखर गए, मन टूट गया कि अटल जी चले गए... बार-बार की कोशिश ...
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लखनऊ। आज जब राष्ट्र के शलाका पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी चिरनिद्रा में सो गए हैं तो उनके बारे में इस समय कुछ कहने में गला ...
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अटल मौन देखो हुआ, सन्नाटा सब ओर। अंतिम यात्रा पर चले, भारत रत्न किशोर।
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मौत को देखा है सिसकते हुए, देखा है वटवृक्ष को निढाल होते हुए। जिसकी छत्रछाया में पनपे सभी, उनके लिए आंसू बह निकले।
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हानि-लाभ के पलड़ों में तुलता जीवन व्यापार हो गया, मोल लगा बिकने वाले का, बिना बिका बेकार हो गया,
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नानाजी देशमुख ने अटल जी से कहा कि आज तुम्हारी बहन की शादी है। अटल जी बोले, ‘अखबार, शादी से ज्यादा जरूरी है।’
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तन पर पहरा, भटक रहा मन, साथी है केवल सूनापन, बिछुड़ गया क्या किसी का, क्रंदन सदा करुण होता है।
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