21 अगस्त को सूर्य ग्रहण और सोमवती अमावस्या

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को सूर्यग्रहण है। इससे पहले 7 अगस्त 2017 को रक्षाबंधन वाले दिन खंडग्रास चंद्र ग्रहण था। चंद्र ग्रहण के दो सप्ताह बाद हमेशा सूर्य ग्रहण होता है। सूर्य ग्रहण भी चंद्र ग्रहण की तरह एक खगोलीय घटना है। अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण होता है तो पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण होता है। दोनों ग्रहणों का असर सभी प्राणियों पर पड़ता है। हालांकि, जहां-जहां ग्रहण दिखाई देता है, उन्हीं स्थानों पर ग्रहण का असर अधिक होता है।
 
इस बार है। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण रात में 9.15 मिनट से शुरु होगा और रात में 2.34 मिनट पर खत्म होगा। भारत में इस दौरान रात रहेगी तो यहां पर कहीं भी सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा तो इसका असर भी नहीं होगा।

ज्योतिषियों का कहना है कि बेशक दिखाई ना दे, लेकिन इसका असर राशियों पर जरूर होगा और भारत में भी सूतक लगेगा। सूर्य ग्रहण का लाइव प्रसारण अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा करेगी। सूर्य ग्रहण का वेधकाल यानी  12 घंटे पहले यानि 21 अगस्त को सुबह 11.15 बजे से लग जाएगा। बताया जा रहा है कि यह सूर्यग्रहण साल 2017 का दूसरा बड़ा ग्रहण है।
   
सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य और धरती के बीच में चंद्रमा आ जाता है। सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है। जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को अपनी छाया में ले लेता तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं। ऐसी स्थिति में सूर्य की किरणें धरती तक नहीं पहुंच पाती हैं और धरती पर अंधेरा छा जाता है। दूसरा ग्रहण है आंशिक सूर्य ग्रहण। इसमें चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को ढक लेता है। इस दौरान धरती के कुछ हिस्सों पर सूर्य नजर नहीं आता।
 
तीसरा है वलयाकार सूर्य ग्रहण। इसमें चंद्रमा, सूर्य को इस प्रकार से ढकता है कि सूरज का मध्य हिस्सा ही इससे कवर हो पाता है और सूर्य का बाहरी हिस्सा दिख रहा होता है। ऐसी स्थिति में वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं। सूर्यग्रहण के साथ ही इस दिन सोमवती अमावस्या भी है और उज्जैन में महाकालेश्वर भगवान की आखिरी शाही सवारी भी है। 
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