ग्रहण के दौरान क्यों रखते हैं मंदिर बंद, पढ़ें कारण


से तो आप सभी भलीभांति परिचित हैं। ग्रहण किस प्रकार लगता है यह बताकर आपकी विद्वत्ता को कम करके आंकने का मेरा कोई उद्देश्य नहीं है। यहां हमारा उद्देश्य केवल ग्रहण से जुड़ी कुछ रूढ़ियों के बारे में चर्चा करना है।

के नाम पर अक्सर मन्दिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। जनसामान्य का बाहर निकलना और भोजन करना भी माना गया है। ग्रहण समाप्त होने पर अर्थात् मोक्ष होने पर स्नान करने का विधान है। इसमें मूल बात के पीछे तो वैज्ञानिक है शेष उस कारण से होने वाले दुष्प्रभावों को रोकने के उद्देश्य से बनाए गए देश-काल-परिस्थिति अनुसार नियम।

वैज्ञानिक कारण तो स्थिर होते हैं लेकिन देश-काल-परिस्थिति अनुसार बनाए गए नियमों को हमें वर्तमान समयानुसार अद्यतन (अपडेट) करते रहना आवश्यक होता है तभी वे अधिकांश जनसामान्य द्वारा मान्य होते हैं। किसी भी नियम को स्थापित करने के पीछे दो बातें मुख्य रूप से प्रभावी होती हैं, पहली-भय और दूसरी-लालच। इन दो बातों को विधिवत् प्रचारित कर आप किसी भी नियम को समाज में स्थापित कर सकते हैं।

धर्म में इन दोनों बातों का समावेश होता है। अतः हमारे समाज के तत्कालीन् नीति-निर्धारकों ने वैज्ञानिक कारणों से होने वाले दुष्प्रभावों को रोकने लिए अधिकतर धर्म का सहारा लिया। जिससे यह दुष्प्रभाव जनसामान्य को प्रभावित ना कर सकें किन्तु वर्तमान सूचना और प्रौद्योगिकी के युग में जब हम विज्ञान से भलीभांति परिचित हैं तब भी इन नियमों के पालन हेतु धर्म का सहारा लेकर आसानी से ग्राह्य ना हो सकने वाली बेतुकी दलीलें देना अनुचित है।

आज की युवा पीढ़ी ऐसे नियमों को स्वीकार करने से झिझकती है। आज की पीढ़ी को तो सीधे-सीधे यह बताना अधिक कारगर होगा कि चन्द्र व सूर्य से कुछ ऐसी किरणें उत्सर्जित होती हैं जिनके सम्पर्क में आ जाने से हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और यदि ना चाहते हुए भी इन किरणों से सम्पर्क हो जाए तो स्नान करके इनके दुष्प्रभाव को समाप्त कर देना चाहिए।
मन्दिरों के पट बन्द करने के पीछे भी मुख्य उद्देश्य यही है क्योंकि जनमानस में नियमित मन्दिर जाने को लेकर एक प्रकार का नियम व श्रद्धा का भाव होता है। अतः जिन श्रद्धालुओं का नियमित मन्दिर जाने का नियम है उन्हें ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए मन्दिरों के पट बन्द कर दिए जाते हैं।


-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com

Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :

राशिफल

क्या सच में ग्रहों की चाल प्रभावित करती है हमारे जीवन को, ...

क्या सच में ग्रहों की चाल प्रभावित करती है हमारे जीवन को, जानिए कैसे
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड 360 अंशों में विभाजित है। इसमें 12 राशियों में से प्रत्येक राशि के 30 ...

सूर्य वृषभ राशि में, किन 5 राशियों को मिलेगा अधिक लाभ... ...

सूर्य वृषभ राशि में, किन 5 राशियों को मिलेगा अधिक लाभ... (जानें 12 राशियां)
15 मई को सूर्यदेव अपनी राशि परिवर्तन कर वृषभ में विराजे हैं। अब आने वाले 1 माह यानी 15 ...

बुध का वृषभ राशि में आगमन, क्या होगा आपकी राशि पर असर

बुध का वृषभ राशि में आगमन, क्या होगा आपकी राशि पर असर
27 मई से बुध वृषभ राशि, भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा, जिसके परिणाम स्वरूप आपकी राशि पर ...

बहुत खास है बुधादित्य योग, 27 मई से मिलेगा 12 राशियों को ...

बहुत खास है बुधादित्य योग, 27 मई से मिलेगा 12 राशियों को शुभाशुभ फल
27 मई को बुध अपनी राशि परिवर्तन कर वृष राशि में प्रवेश करेंगे। आइए जानते हैं कि किन-किन ...

आपके लिए जानना जरूरी है पुरुषोत्तम मास की ये 8 खास विशेष ...

आपके लिए जानना जरूरी है पुरुषोत्तम मास की ये 8 खास विशेष बातें...
ज्योतिष गणित में सूक्ष्म विवेचन के बाद अब स्वीकारा जा चुका है कि- जिस चंद्रमास में सूर्य ...

ऐसे घर में हो जाता है गृहस्वामी का नाश या आकस्मिक मौत

ऐसे घर में हो जाता है गृहस्वामी का नाश या आकस्मिक मौत
तो निश्चित ही उस घर के गृहस्वामी पर संकट बना रहता है, उसका नाश हो सकता है या आकस्मिक मौत ...

कैसे होते हैं रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक, किस व्यवसाय ...

कैसे होते हैं रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक, किस व्यवसाय में मिलेगी सफलता... (जानें लग्नानुसार)
रोहिणी नक्षत्र आकाश मंडल में चौथा नक्षत्र है। राशि स्वामी जहां शुक्र है, वहीं नक्षत्र ...

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर क्यों किया जाता है वट वृक्ष का पूजन, ...

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर क्यों किया जाता है वट वृक्ष का पूजन, जानें पौराणिक महत्व...
भारत के पूज्यनीय वृक्षों में वट यानी बरगद का महत्वपूर्ण स्थान है। इसे अमरता का प्रतीक भी ...

29 मई को ज्येष्ठ पूर्णिमा, सुहागिनें वट वृक्ष की पूजा करके ...

29 मई को ज्येष्ठ पूर्णिमा, सुहागिनें वट वृक्ष की पूजा करके लेंगी आशीष...
इस बार 29 मई 2018, मंगलवार को अधिक मास की पूर्णिमा आ रही है। अत: सोमवार, 28 मई से शाम ...

जानिए रोहिणी नक्ष‍त्र का स्वरूप, कथा और खास बातें...

जानिए रोहिणी नक्ष‍त्र का स्वरूप, कथा और खास बातें...
रोहिणी जातक सुंदर, शुभ्र, पति प्रेम, संपादन करने वाले, तेजस्वी, संवेदनशील, संवेदनाओं से ...