कहीं आपके उपहार अनिष्ट लेकर तो नहीं आए हैं.... पढ़ें अनोखी जानकारी


किस ग्रह से संबंधित वस्तु का ना करें

और दान दोनों का ही संबंध किसी वस्तु को देने से है, परंतु दोनों के उद्देश्य में भिन्नता है। दान का संबंध परमार्थ या ग्रह-शांति से है, जबकि उपहार किसी खुशी के अवसर पर या किसी को प्रसन्न करने के लिए दिया जाता है। व्यावहारिक रूप से कोई आदमी कल्पना भी नहीं कर सकता कि उसे द्वारा दी जाने वाली या ग्रहण की जाने वाली वस्तु उसके लिए हानिकारक हो सकती है, परंतु जातक की कुंडली इस बात की सूचना अवश्य देती है कि अमुक व्यक्ति को अमुक ग्रह से संबंधित वस्तु लेनी चाहिए या देनी चाहिए।
प्रत्येक ग्रह का उससे संबंधित वस्तुओं पर अधिकार होता है या दूसरे शब्दों में निश्चित वस्तुओं का कारकत्व निश्चित ग्रहों को होता है।

अत: दान के पीछे यही धारणा होती है कि अशुभ फल देने वाले ग्रहों से संबंधित वस्तु को बांट दिया जाए तो उसकी अशुभता कम हो जाती है। परंतु अनजाने में ही यदि शुभ फलदायी ग्रहों से संबंधित वस्तु को दान या उपहारस्वरूप बांट दिया जाए तो उसके शुभत्व में न्यूनता आ जाती है और संबंधित ग्रह उस वर्ष अपेक्षित परिणाम नहीं देता है। जानकारी के लिए हम देखते हैं कि किसी ग्रह का आधिपत्य किन वस्तुओं पर है, किसे लेना चाहिए व किस जातक को देना चाहिए।


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