अगर आप भी हैं इन बातों से परेशान तो अक्षय तृतीया पर ऐसे करें पूजन

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* परिस्थितियां अनुकूल बनानी है तो आखातीज पर करें लक्ष्मी पूजा और करें ये दान  
 
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आखातीज के रूप में मनाया जाता है। भारतीय जनमानस में तृतीया तिथि अक्षय तीज के नाम से प्रसिद्ध है। 
 
पुराणों के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान, दान, जप, स्वाध्याय आदि करना शुभ फलदायी माना जाता है तथा इस तिथि में किए गए शुभ कर्मों का कभी क्षय नहीं होता। है। अत: जो लोग जिंदगी में बहुत परेशान है और उन्हें कोई उपाय सूझ नहीं रहा हो तो ये जानकारी आपके लिए ही है। जैसे- 
 
* अत्याधिक मेहनत करने के बाद भी धन की प्राप्ति नहीं होती, 
 
* कोई भी कार्य करें तो नुकसान होता है, 
 
* पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बात को लेकर मन अशांत रहता है, 
 
* संतान गलत दिशा में है अथवा अपनी मनमानी करती है, जिससे घर में तनाव पैदा होता है। 
 
तो अक्षय तीज के दिन श्रीहरि विष्णु के साथ-साथ लक्ष्मी जी के पूजन का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन मां महालक्ष्मी का पूजन करने से परिस्थितियां अनुकूल बनने लगती तो ऐसे व्यक्ति को अक्षय तृतीया के दिन मां महालक्ष्मी का पूजन अवश्य करना ‍चाहिए। 
 
अक्षय तृतीया के दिन लक्ष्मी यंत्र प्रतिष्ठित करवाकर लाल वस्त्र पर चावल की ढेरी पर स्थापित करें तथा पूजन कर 11-11 आंवले, कमल गट्टे चढ़ाएं तथा कमल गट्टे की माला से निम्न मंत्र की 11 माला जपें -
 
मंत्र - 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।'
 
श्री महालक्ष्मी प्राण-प्रतिष्ठित यंत्र को सामने पूर्व की तरह स्थापित कर निम्न यंत्र की 21 माला कमल गट्टे की माला से जपें-
 
मंत्र -'ॐ भाग्य लक्ष्म्यै च विद्महे अष्ट लक्ष्म्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।'
 
इसके साथ ही इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा, साधना करके जल से भरा मिट्टी का घड़ा, मौसमी फल खरबूजा, तरबूज, बेल का शरबत, हाथ से झलने वाला पंखा, धूप से बचने के लिए छाता, टोपी, जूते-चप्पल, जैसी चीजें दान करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है और अनुकूल परिस्थितियां बनती है। ALSO READ: अक्षय तृतीया पर क्यों करते हैं कुंभ दान, पढ़ें महत्व
 


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