पालमपुर की सैर

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हवा में मधुर सी महक थी, शीतल हवा बह रही थी। प्रकृति के आँचल में फूल खिल रहे थे। कंगरा वादियों से पालमपुर की झलक दिखाई देती है। मान्यता है कि यह खूबसूरत स्थल जालंधर का स्थान रहा है। इस सुंदर स्थल की एक और विशेषता है कि यहाँ पर चाय के बगीचे, चावल के खेत नजर आते हैं

भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में पालमपुर की चाय बहुत ही प्रसिद्ध है। नगरों में लोग अँग्रेजों के समय बनाए गए वास्तुशिल्प इमारतों को देखकर दंग रह जाते हैं। हिमाचल प्रदेश में दलाई लामा के निवास स्थल से तीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पालमपुर। यहाँ का मौसम सुहावना है अप्रैल से लेकर जून तक गर्मी रहती है। नवंबर से लेकर फरवरी तक ठंड का मौसम रहता है।

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स्थानों को देखन

चाय की फैक्ट्री - कंगरा के चाय यहाँ पर देख सकते हैं।

सेंट जॉन के गिरिजाघर से 200 किलोमीटर हैं पालमपुर।

बुंदलामाता का मंदिर - पालमपुर से 2 किलोमीटर की दूरी पर हैं। पाँचवीं सदी के समय इस स्थान को स्थापित किया गया था।

गोपालपुर में एक छोटा सा चिड़ियाघर है। जोकि पालमपुर से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

चामुंड़ा देवी - देवी काली को यहाँ के निवासी चामुंड़ा के रूप में पूजा करते हैं।

अंडेट्टा - हस्तशिल्पाय एवं हाथ से बनाएँ चीजें पर्यटक को लुभाती हैं। कंगरा किले - कहते हैं कि इस किले का निर्माण हजार साल पहले किया गया था। बिर में लामाओं का मठ स्थित है।

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  मान्यता है कि यह खूबसूरत स्थल जालंधर का स्थान रहा है। इस सुंदर स्थल की एक और विशेषता है कि यहाँ पर चाय के बगीचे, चावल के खेत नजर आते हैं।       
बैजनाथ मंदिर - भगवान शिव को बैद्यनाथ का रूप मानते हैं। मान्यता है रावण ने भगवान शिव की अराधना की थी। भगवान शिव ने रावण की कठोर तपस्या एवं पूजा से प्रसन्न होकर रावण को अमरता का वरदान दिया था। इस मंदिर में हजारों श्रद्धालु आते हैं।
कैसे पहुँचें पालमपुर से हवाई अड्‍डा 37 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। टैक्सी एवं बस सब जगहों से उपलब्ध है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से पालमपुर 454 किलोमीटर की दूरी पर है।


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