वैज्ञानिकों की खोज, ब्रह्मांड में 'प्रेम त्रिकोण'

न्यूयॉर्क| ND|
वैज्ञानिकों ने में ऐसे का पता लगाया है, जो एक नहीं दो तारों (सूरज) के चक्कर लगा रहा है। यह ठीक उसी तरह है, जैसा फिल्म "स्टार वार्स" में दो और एक ग्रह की कहानी दिखाई गई थी। इस खोज की घोषणा अमेरिका के योमिंग में आयोजित सम्मेलन में की गई और इसका प्रकाशन पत्रिका "नेचर" में किया गया है।

हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के अनुसंधानकर्ता डॉ. जोश कार्टर ने कहा कि यह फिर साबित हो गया है कि ब्रह्मांड में सिर्फ ही नहीं है, वह तो अलग-अलग तरह के ग्रह-मंडलों का मात्र एक हिस्सा है।

ब्रह्मांड में दो तारों (सूरज) के चक्कर लगाने वाले आधिकारिक रूप से इस ग्रह का नाम केपलर-16बी है। यह गैस के गुब्बारे की तरह है और आकार में शनि ग्रह के बराबर है। यह अपने दोनों तारों से 10.50 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर अपने अक्ष पर चक्कर लगा रहा है।
यह दूरी उतनी ही है, जितनी शुक्र ग्रह की सूर्य से है। हालाँकि केपलर-16बी जिन दो तारों के चक्कर लगा रहा है, वे सूरज की तुलना में छोटे और ठंडे हैं। इसी कारण केपलर-16बी के तल का तापमान शून्य से 70 डिग्री सेल्सियस और 100 डिग्री सेल्सियस के बीच है।

कहाँ है केपलर-16बी : केपलर-16बी हमारी धरती से 200 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। इसकी खोज नासा के केपलर अंतरिक्ष दूरबीन ने उस समय की थी, जब यह धरती और उसके पितृ तारे के बीच से गुजरा था। इस घटना को ट्रांजिट कहते हैं। इसमें अंतरिक्ष विज्ञानियों को दूरबीन की सहायता से ग्रह के आकार और उसके पितृ तारे से दूरी का पता चलता है लेकिन केपलर-१६ बी के मामले में कठिनाई यह है कि यह दो तारों के चक्कर लगा रहा है। इस कारण ट्रांजिट की प्रक्रिया दो बार होती है और उसमें दूरबीन में दूरी और आकार भी अलग-अलग पता चलते हैं।
फिल्म सच हुई : सिडनी में ऑस्ट्रेलियन एस्ट्रॉनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी के अनुसंधानकर्ता डॉ. साइमन ओटूली ने कहा कि दो सूरज वाले एक ग्रह की संकल्पना फिल्म "स्टार वार्स" में की गई थी, जो सच साबित हो गई। हालाँकि डॉ. साइमन इस खोज का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि धरती जैसे कई हो सकते हैं, जो तारों का चक्कर लगा रहे हों लेकिन उनका पता लगाना संभव नहीं है। ताजा खोज से यह बात भी साबित हुई है कि ब्रह्मांड में विविध प्रकार के सौर मंडल हैं। (एजेंसी)


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