प्राकृतिक चिकित्‍सा

NDND
आधुनिक समय में जबकि बड़े शहरों में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, आहार अव्यवस्थित हो गया है। ऐसे में योग, प्राकृतिक चिकित्सा की आवश्यकता बढ़ गई है। अष्टांग योग में षट् क्रियाओं का विधान है। इसके अंतर्गत शरीर शोधन किया जाता है, अतः योग व प्राकृतिक चिकित्सा एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। शरीर शोधन प्राकृतिक चिकित्सा का मुख्य अंग है एवं योग से जीवन शक्ति का विकास होता है।

ईश्वर द्वारा प्रदत्त शरीर में स्वतः ही स्वस्थ होने की जीवन शक्ति विद्यमान है, किंतु आजकल पक्वाहार व भारी असमय के भोजन को ही पचाने में यह जीवन शक्ति व्यस्त रहती है व शरीर शुद्धि नहीं हो पाती, जबकि हर बीमारी का मुख्य कारण शरीर में विजातीय पदार्थों का इकट्ठा होना तथाबेमेल भोजन अधिक करना है। वहीं भोजन में अंकुरित अनाज को शामिल करना स्वस्थ रहने की ओर कदम बढ़ाना है।

अंकुरित अनाज के लाभ- यह उत्तम स्वास्थ्यवर्धक आहार है। इससे मोटापा घटता है। जीवन शक्ति बढ़ती है। शरीर के लिए आवश्यक सभी तत्व मिल जाते हैं। पाचन तंत्र को आराम मिलता है। टॉक्सिन, विजातीय द्रव्य शरीर में इकट्ठे नहीं हो पाते हैं।

भोजन में भूख अनुसार सम्मिलित करें- नीबू, सेवफल, प्याज, गाजर, शहद, अंकुरित मूँग, चना, गेहूँ, जल, सोया, टमाटर, खजूर, अंजीर, दही, मट्ठा, आँवला, लहसुन आदि।

कुछ विशेष बीमारियों में ध्यान दें- गठिया- धूप स्नान, आलू का रस, टमाटर का रस। चर्मरोग सोराइसिस आदि- चने, नीम, प्याज का उपयोग। खून की कमी- पालक का रस। बहुमूत्र- टमाटर। फेफड़ों के रोग- प्याज, लहसुन, पोदीना, धनिया की चटनी, धूप स्नान पुरानी बीमारियों का अचूक इलाज है।

योग क्या है?

योगाभ्यास इंद्रियों और नसों को अपने वश में करता है। लगातार योगाभ्यास से व्यक्ति में आहार, चरित्र, स्वच्छता, व्यवहार, क्रोध का परिवर्तन देखा गया है व इससे जीवन भी अनुशासित हो जाता है। स्थिरता, आरोग्य के साथ शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है तथा क्षमता व एकाग्रता में वृद्धि होती है।

ND|
- बलराज सबलो
याद रखने लायक बात यह है कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित रोगी बिना सही मार्गदर्शन के योग न करें। अन्यथा लाभ की जगह हानि भी हो सकती है। उदाहराणार्थ उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, कमर दर्द वाले आगे झुकने के आसन न करें।


और भी पढ़ें :