जानिए विटामिन-डी की कमी के लक्षण

डॉ. अप्रतिम गोयल

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विटामिन-डी शरीर के विकास, हड्डियों के विकास और स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। धूप के संपर्क में आने पर त्वचा इसका निर्माण करने लगती है। हालांकि यह विटामिन खाने की कुछ चीज़ों से भी प्राप्त होता है,लेकिन इनमें यह बहुत ही कम मात्रा में होता है। केवल इनसे विटामिन-डी की जरूरत पूरी नहीं हो जाती है। आइए जानते हैं विटामिन-डी की कमी के लक्षण क्या हैं?

वयस्कों में विटामिन-डी की कमी के लक्षण

- दर्द या तेज दर्द

- कमजोरी एवं ओस्टियोमेलेशिया

- हड्डियों का दर्द (आमतौर पर कूल्हों, पसलियों और पैरों आदि की हड्डियों में)

खून में विटामिन-डी की कमी होने पर ये आशंकाएं प्रबल होती हैं।
- कार्डियोवेस्क्युलर रोगों से मृत्यु

- याददाश्त कमजोर होना

- बच्चों के अस्थमा से गंभीर रूप से प्रभावित होना एवं कैंसर।

विटामिन-डी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ग्लुकोल इनटॉलरेंस और मल्टिपल स्क्लेरोसिस आदि बीमारियों से बचाव और इलाज में महत्वपूर्ण हो सकता है।
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बच्चों में विटामिन-डी की कमी के लक्षण

- शिशुओं में इसकी कमी होने पर मांसपेशियों में मरोड़े, सांस लेने में परेशानी और दौरे आने की परेशानी हो सकती है। उनके शरीर में कैल्शियम की भी कमी हो जाती है। सांस की तकलीफ के कारण बच्चे की पसलियां (रिब केज) नर्म रह जाता है और आस-पास की मांसपेशियां भी कमजोर रह जाती हैं।
- विटामिन-डी की गंभीर कमी होने से उनके पैरों की हड्डियां और खोपड़ी कमजोर रह जाती हैं। छूने पर यह हड्डियां नर्म महसूस होती हैं। हड्डियों से शरीर का बनुयादी ढांचा तैयार होता है, लेकिन रिकेट्स जैसी बीमारी में हड्डियां लचीली हो जाती हैं। पैरों की हड्डियां कमजोर हो कर मुड़ने लगें तो यह स्थिति रिकेट्स कहलाती है।

- समय पर दांत न आना विटामिन डी की कमी का ही लक्षण है।
बच्चों में विटामिन-डी विटामिन-डी की कमी के कई कारण हो सकते हैं

- लंबे समय तक शरीर को यह पर्याप्त मात्रा में न मिल पाना। यह समस्या उन लोगों में अधिक होती है, जो पूर्णतः शाकाहारी आहार ही लेते हैं। प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी केवल पशुओं से मिलने वाले आहार से ही प्राप्त होता है, इसलिए केवल शाकाहारी भोजन लेने वालों में विटामिन-डी की कमी की आशंका रहती है। शरीर पर धूप न लगना।
- त्वचा का रंग बहुत गहरा होना। त्वचा का गहरा रंग मिलेनिन नामक पिगमेंट के कारण होता है। मिलेनन बहुत अधिक होने के कारण धूप लगने पर त्वचा में विटामिन-डी का निर्माण ठीक से नहीं हो पाता।

- किडनी विटामिन-डी को उसके सक्रिय रूप में परिवर्तित न कर पाएं तो शरीर में इसकी कमी होने लगती है। उम्र बढ़ने के साथ किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, जिससे यह विटामिन-डी को परिवर्तित नहीं कर पाती। पाचन तंत्र इसे अवशोषित नहीं कर पाए तो भी इसकी कमी हो जाती है। कुछ बीमारियों के कारण पाचन तंत्र की विटामिन-डी अवशोषित करने की क्षमता प्रभावित होती है।
- मोटापा : रक्त में मौजूद विटामिन-डी को फैट की कोशिकाएं अवशोषित कर लेती हैं, जिससे शरीर को इसका फायदा नहीं मिल पाता है।

- रक्त में विटामिन-डी का स्तर जानने के लिए जांच की जा सकती है। अपने चिकित्सक से इसके बारे में जान सकते हैं।

बच्चों को विटामिन-डी की कमी न हो, इसके लिए ध्यान रखें
- गर्भावस्था में महिला के शरीर में विटामिन-डी की कमी होने पर शिशु में भी इसकी कमी की आशंका होती है। जिन महिलाओं का रंग गहरा होता है, उन्हें इसकी आपूर्ति का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

- समय से पहले जन्में शिशुओं में इसकी कमी हो सकती है। केवल स्तनपान करने वाले शिशुओं में विटामिन-डी की कमी हो सकती है। जिन बच्चों को फॉर्मूला मिल्क दिया जाता है, उनमें यह आशंका और भी बढ़ जाती है।
- मोटापा : मोटापा बढ़ने के साथ ही शरीर में विटामिन-डी का स्तर घटता जाता है। ऐसे लोगों को विटामिन-डी की आपूर्ति के साथ ही मोटापा घटाने की ओर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि रक्त में मौजूद विटामिन-डी को फैट कोशिकाएं अवशोषित कर लेती हैं और समस्या जस की तस बनी रह सकती है या फिर बदतर भी हो सकती है।


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