2009 : कला की दुनिया पर खास निगाह

रविवार,जनवरी 3, 2010
गृहमंत्री पी.चिदंबरम के पदभार सँभालने के बाद से आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था जरूर पुख्ता हुई है लेकिन विदेशमंत्री ...
नए वर्ष से समाज के हर तबके को कोई न कोई उम्मीद होती है। अब जबकि वर्ष 2010 की गेंद हमारी पृथ्वी पर लुढ़कना शुरू हो गई ...
यूँ तो साल 2009 स्वाइन फ्लू नामक भयावह बीमारी की चपेट में रहा लेकिन उसकी छाँव तले वो सारी उपलब्धियाँ भूला दी गईं जो ...
वर्ष 2009 में लेखनी के कई जादूगर हमसे जुदा हो गए। विश्व स्तर पर दिवंगत साहित्यकारों में कई ऐसे थे जिनके लेखन के ...
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क्रिकेट जगत के लिए साल 2009 कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। ट्वेंटी-20 विश्वकप, एशेज सिरीज, आईपीएल, चैंपियंस लीग, ...
वर्ष 2009 म्युचुअल फंड के लिए बुरे सपने की तरह रहा। आर्थिक मंदी से बेहाल भारत में निवेशक सालभर चैन की साँस लेने के लिए ...

राष्ट्रीय घटनाक्रम - 2009

गुरुवार,दिसंबर 24, 2009
बीत रहे वर्ष 2009 के दौरान भारत ने बहुत सारी घटनाओं को अपने आँचल में समेटा है। अच्छी बुरी दोनों तरह की घटनाओं के साथ इस ...
'कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ' नारे के उलट लोग भले ही सालभर महँगाई की मार से सिसकियाँ लेते रहे हों, लेकिन केन्द्र ...
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वर्ष 2009 जहाँ देश के लिए राजनीतिक व आर्थिक दृष्टिकोण से उथल-पुथल भरा वर्ष रहा, वहीं यह वर्ष भारतीय महिलाओं के लिए शुभ ...
2009 में धर्म का नए तरीके से दोहन किया गया एक और जहाँ उसे बाजारवाद के चलते बेचा गया वहीं उसके माध्यम से आतंक और ...
भारत में कहावत प्रचलित है कि पहला धन निरोगी काया। सेहत को लेकर अधिकांश कहावतें और सीख भारत में ही मिलती है। विडंबना यह ...

महँगाई : मुसीबत के 12 महीने

रविवार,दिसंबर 20, 2009
वक्त की रेत पर 21वीं सदी का नौवाँ साल भी फिसलने को है। अपने उदय से लेकर अस्ताचलगामी होने तक 2009 ने घटनाओं के कैनवास पर ...
श्रीलंका में लिट्‍टे प्रमुख वी प्रभाकरण की मौत के बाद श्रीलंका सरकार ने संगठन के सफाए का दावा किया और कहा कि तमिल ईलम ...
भारत में सूचना तकनीक के क्षेत्र में हुई उन्‍नति‍ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि‍ आज अमेरि‍का में स्‍कूल जाने ...
तंत्र-साधना के बल पर आदमी अलौकिक और चामत्कारिक शक्तियों का स्वामी बन सकता है? इस सवाल का हाँ या ना में जवाब देने के ...
वर्ष 2009 कॉरपोरेट इतिहास में सत्यम ‘महाघोटाले’ के लिए भी याद किया जाएगा जिसने पूरी दुनिया में भारतीय उद्योग जगत की छवि ...
कहीं साहित्य-संसार विवादों की काली छाया से घिरा रहा तो कहीं पारंपरिक लेखन में किसी तरह के बदलाव के लिए हम तैयार नहीं ...
आतंकवाद व आर्थिक मंदी से लड़खड़ाया भारत आज फिर से उसी जिंदादिली के साथ पर्यटकों के स्वागत को तैयार खड़ा है। पर्यटक भी ...
नौकरी के बाजार की शुरुआत 2009 में जैसी हुई उससे बुरी शुरुआत किसी साल की नहीं हो सकती लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजरे ...