विश्वकप ट्रॉफी को लेकर मचा बवाल

मुंबई/नई दिल्ली| WD|
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भारतीय क्रिकेट टीम को विश्वकप जीतने पर दी गई ट्रॉफी को लेकर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा क्योंकि विजयी टीम को दी गई असली ट्रॉफी मुंबई में कस्टम विभाग के पास है, जबकि टीम को इसकी प्रतिकृति भेंट की गई।

पिछले तमाम विश्व कप के कप्तानों को फाइनल जीतने के बाद असली ट्रॉफी दी गई थी जिसके बेस पर पिछले विजेताओं के नाम अंकित हैं। बाद में इस ट्रॉफी को आईसीसी ले लेती है और इसकी प्रतिकृति दी जाती है।

रिपोर्टों के अनुसार आईसीसी की मूल रिपोर्टों मुंबई कस्टम विभाग के पास है, जिसने आईसीसी से कस्टम शुल्क के 22 लाख रुपए माँगे थे। आईसीसी ने हालाँकि कहा कि महेंद्रसिंह धोनी की टीम को दी गई ट्राफी असली है, न कि प्रतिकृति ।
आईसीसी के सीईओ हारून लोर्गट ने विश्व कप फाइनल के बाद भारतीय टीम को दी गई ट्रॉफी को लेकर पैदा हुए विवाद को खारिज करते हुए कहा कि विजेताओं को वही ट्रॉफी दी गई है, जो देनी चाहिए थी।

उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यह निराशाजनक है कि मीडिया रिपोर्टों में सही तथ्य पेश नहीं किए गए हैं। मैंने अहमदाबाद में मैच फिक्सिंग पर बात की थी और अब ट्रॉफी विवाद सामने है। को वही ट्रॉफी मिली है, जो मिलनी चाहिये थी। लोर्गट ने कहा कि शनिवार को मैदान पर असली ट्रॉफी थी और भारतीय टीम के पास वही ट्रॉफी है, जो होनी चाहिए थी।
आईसीसी के पूर्व अध्यक्ष एहसान मनी ने कहा कि शनिवार की रात को भारतीय टीम को मूल ट्रॉफी दी जानी चाहिए थी। आईसीसी और बीसीसीआई को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि टीम का हर सदस्य मूल ट्रॉफी को थामना चाहता होगा। भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज फारूक इंजीनियर ने पूछा कि क्या यह अप्रैल फूल था। बल्लेबाज गौतम गंभीर ने इस प्रकरण पर निराशा जताई।
उन्होंने कहा कि इतनी मेहनत करने के बाद असली ट्रॉफी मिलनी चाहिए थी क्योंकि यह विश्वकप है। यह कोई द्विपक्षीय श्रृंखला या छोटा टूर्नामेंट नहीं है। यह सबसे बड़ा पल है। हमें यदि असली ट्रॉफी मिलती तो ज्यादा खुशी होती। वहीं कस्टम ने कहा कि मुंबई एयरपोर्ट पर रखी ट्रॉफी प्रमोशनल कप है, जो दुबई में आईसीसी मुख्यालय पर जाएगा और इसका भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा जीते गए विश्वकप से कोई सरोकार नहीं है।
केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क बोर्ड ने दिल्ली में जारी बयान में कहा कि बीसीसीआई ने उससे आईसीसी की ट्रॉफी अपने पास रखने के लिए कहा था क्योंकि इसके देश में आयात को सरकार से मंजूरी नहीं मिली थी। (भाषा)

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