वीरूबाला रामा की अंधविश्वास से लडा़ई

असम में डायन हत्या

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भारत के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी अंधविश्वास और रूढ़ियाँ इस कदर हावी हैं कि मनुष्य वहाँ हैवान बन जाता है। कभी टेलीविजन या अखबार के जरिए पता चले भी तो हम उन अशिक्षित लोगों को कुछ क्षण कोसकर भूल जाते हैं। लेकिन ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति असल में हमें खबरदार करती है कि अभी मानसिक रूप से हमें और विकसित होना होगा

यह सच है कि सिर्फ कानून बना देने से ही डायन हत्या की कुप्रथा समाप्त नहीं हो जाएगी, लेकिन इस तरह के कानून के सहारे इस कुप्रथा के खिलाफ जंग छेड़ी जा सकेगी। ऐसी ही एक जंग ग्वालपाड़ा जिले की एक निरक्षर महिला वीरूबाला रामा वर्षों से लड़ रही हैं। वे अपने समाज से डायन हत्या की कुप्रथा को समाप्त करने का अभियान चला रही हैं। सीमित संसाधन और असीमित संकल्प शक्ति के सहारे वीरूबाला रामा आज डायन की कुप्रथा के खिलाफ एक प्रतीक बनकर उभरी हैं। उल्लेखनीय है कि नोबल शांति समिति ने विश्व की जिन 1000 महिलाओं को सम्मानित किया, उनमें वीरूबाला रामा भी एक थीं।

देश के कई राज्यों के साथ-साथ असम में आज भी डायन हत्या जैसी कुरीति का प्रचलित होना सभ्य समाज के लिए शर्मनाक सचाई है। असम के विभिन्ना हिस्सों में समय-समय पर किसी महिला को डायन घोषित कर बर्बरतापूर्वक मार डाला जाता है। कई बार इस तरह की बर्बरता का शिकार पूरा परिवार होता है। असम के ग्वालपाड़ा, बौंगाईगाँव, कोकराझाड़ और शोणितपुर जिले में इस तरह की वारदातें सबसे अधिक होती हैं।

  गाँव में किसी की मौत होने, कोई अज्ञात बीमारी फैलने, मृत बच्चे का प्रसव आदि घटनाओं के लिए अशिक्षित और अंधविश्वासी ग्रामीण किसी गरीब और असहाय महिला को जवाबदेह मानकर उसे 'डायन' घोषित कर देते हैं और फिर नृशंसतापूर्वक उसकी हत्या कर देते हैं।      
गाँव में किसी की मौत होने, कोई अज्ञात बीमारी फैलने, मृत बच्चे का प्रसव आदि घटनाओं के लिए अशिक्षित और अंधविश्वासी ग्रामीण किसी गरीब और असहाय महिला को जवाबदेह मानकर उसे 'डायन' घोषित कर देते हैं और फिर नृशंसतापूर्वक उसकी हत्या कर देते हैं। कई बार महिला की हत्या करने के अलावा उसके परिवार के दूसरे सदस्यों की भी हत्या कर दी जाती है

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- दिनकर कुमा
किसी महिला को डायन घोषित करने के बाद गाँव के लोग सामूहिक रूप से दंड के स्वरूप का निर्धारण करते हैं। कई बार ऐसी महिला को गाँव से निष्कासित कर दियाजाता है या उसके परिवार से आर्थिक जुर्माना वसूला जाता है या उसे शारीरिक रूप से यातनाएँ दी जाती हैं। अंतिम सजा के रूप में महिला की हत्या कर दी जाती है।

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