ओडिशा की अर्पिता राउत का है इंजीनियर बनने का सपना

Arpita Raut
 
- रविकांत द्विवेदी> > ओडिशा के एक छोटे-से अनजान गांव की एक छोटी-सी लड़की। बचपन से ही इंजीनियर बनना चाहती थी। स्कूल, मां-पिता और शिक्षकों के सहयोग से अपने सपने को पूरा करने में लगी रही। मां-पिता से दूर भुवनेश्वर के कॉलेज में पढ़ाई कर रही अर्पिता के हजारों सपने हैं। उसे पूरा करने के लिए अपनी सामाजिक-आर्थिक सीमाओं से लड़ती हुई वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है लेकिन अपने भविष्य को लेकर शंकित भी है।
 
सर, हर साल लाखों बच्चे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हैं। पता नहीं कैसी नौकरी मिलेगी? मिलेगी भी या नहीं? कहते-कहते अर्पिता कहीं खो-सी जाती है और आंखों में हजारों सपने तैरने लगते हैं।
 
उसके साथ ही कटक जिले के फूलनखरा का सिद्धार्थ भी पढ़ता है। सिद्धार्थ के पिताजी नहीं हैं। घर की माली हालत भी बहुत अच्छी नहीं है, फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। लोन लेकर पढ़ाई कर रहा है। उसका सपना और डर भी अर्पिता से अलग नहीं है। अपने घर-परिवार को सहारा देना है लेकिन भविष्य को लेकर शंकित भी है। यही हालत साथ पढ़ रहे ऐश्वर्या, बादल, चंदन, लोकेश, संदीप जैसे अन्य सहपाठियों की भी है।
 
लेकिन इससे उनकी कोशिशों पर कोई असर नहीं पड़ा और कॉलेज ने भी उनकी कोशिशों को बल दिया है। सीवी रमन इंजीनियरिंग कॉलेज ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के दिशा-निर्देशों के मुताबिक इन बच्चों को इंजीनियरिंग काउंसिल ऑफ इंडिया (ईसीआई) के पास इंटर्नशिप के लिए भेजा।
 
ईसीआई ने इन बच्चों को ओरिएंटेशन कोर्स करने की जिम्मेदारी अपनी सदस्य संस्था निर्माण उद्योग विकास परिषद (सीआईडीसी) को दी है। इसलिए ये बच्चे अपने घर-कॉलेज से हजारों मील दूर फरीदाबाद में आयोजित इंटर्नशिप कार्यक्रम में इस कड़ाके की ठंड में भी दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। कोई गड्ढे खोद रहा है, तो कोई नापी ले रहा है, कोई ले-आउट बना रहा है, तो कोई कितनी मिट्टी निकली इसका हिसाब लगा रहा है।
 
प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर डॉ. सुचिता कुमार ने बताया कि हम इन बच्चों को रियल साइट का अनुभव करा रहे हैं। दिल्ली की ठंड भी ये बच्चे सुबह 7 बजे काम शुरू कर देते हैं और शाम के 7 बजे तक काम करते हैं। दरअसल, हम इन्हें मानसिक रूप से साइट पर काम करने के लिए तैयार कर रहे हैं। इन्हें यहां 1 महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, फिर प्रोजेक्ट साइट्स पर भेजेंगे। बच्चे भी काफी उत्साहित हैं। एक छात्र सूरज कुमार ढाल ने बताया कि कोई थकान नहीं होती है सर। इतने सारे लोग हमारे लिए अपना समय दे रहे हैं तो अपने भविष्य के लिए तो दर्द हमें ही लेना होगा न सर? लेकिन इसमें नया क्या है?
 
इंटर्नशिप तो पहले भी होते थे, फिर ऐसा क्या है कि बच्चों की उम्मीदें बढ़ गई हैं?दरअसल, देश में हर साल तकरीबन 15 लाख बच्चे इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी करते हैं और फिर रोजगार की तलाश में जुट जाते हैं। लेकिन मनचाहा रोजगार सपना ही रह जाता है, क्योंकि उद्योग जगत इन बच्चों को काम का नहीं मानता।
 
उद्योग जगत की शिकायत है कि लाखों की भीड़ तो है लेकिन उनके काम का कोई नहीं है और इन बच्चों को नए सिरे से प्रशिक्षित करना पड़ता है तथा इसमें 2-3 साल लगते हैं। हम 2-3 साल लगाकर अपने संसाधन से बच्चों को प्रशिक्षित करते हैं और अपने काम के लायक बनाते हैं लेकिन जब ये काम के लायक तैयार होते हैं तो किसी और कंपनी में चले जाते हैं।
 
उद्योग जगत के मुताबिक देश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की बढ़ती भीड़ ने पढ़ाई के स्तर को गिरा दिया है। दरअसल, इंजीनियरिंग फैशन का हिस्सा बन गया है। हर माता-पिता अपने बच्चे को डॉक्टर या इंजीनियर बनाना चाहते हैं, भले ही बच्चे की रुचि हो या न हो। इंजीनियरिंग का पेशा देश व समाज की जरूरतों से ज्यादा माता-पिता के लिए सामाजिक रुतबा हासिल करने का जरिया बन गया है। कभी-कभी बच्चे एक-दूसरे को देखकर भी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला ले लेते हैं, जबकि इनकी अभिरुचि ही नहीं होती है। लेकिन 8-10 लाख खर्च करके इंजीनियर बनने का सपना पाल लेते हैं।
 
कुछ निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों का स्तर अच्छा नहीं है। उद्योग जगत की लगातार शिकायतों और हर दिन खुलते नए-नए इंजीनियरिंग कॉलेजों की वजह से अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद पर इंजीनियरिंग शिक्षा का स्तर बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है। इसी के मद्देनजर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने वर्ष 2017-18 से सभी इंजीनियरिंग कॉलेज छात्रों के लिए 6 महीने की इंडस्ट्रियल इंटर्नशिप अनिवार्य कर दी है। इस इंटर्नशिप के बाद एक ज्यूरी कमेटी इन बच्चों की योग्यता की जांच करेगी और इसमें जो बच्चे पास होंगे, उन्हीं को डिग्री दी जाएगी।
 
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने छात्रों की इंटर्नशिप के लिए इंजीनियरिंग काउंसिल ऑफ इंडिया (ईसीआई), इंटर्न शाला और एनईटीआईआईटी (ताईवान में प्रशिक्षण के लिए) को अधिकृत किया है। ईसीआई ने अपने सदस्य संस्थाओं के सहयोग से इस इंटर्नशिप के लिए कोर्स तैयार किया है और उनके सहयोग से बच्चों को प्रशिक्षित कर रही है।
 
इसी के तहत ईसीआई की सदस्य संस्था सीआईडीसी, फरीदाबाद में सीवी रमन इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को प्रशिक्षण दे रही है। निर्माण उद्योग विकास परिषद (सीआईडीसी), योजना आयोग (अब नीति आयोग) द्वारा निर्माण उद्योग और सरकारी विभागों की मिली-जुली संस्था है। सीआईडीसी, निर्माण उद्योग के मानक निर्धारित करने से लेकर मानव संसाधन विकास तक का काम करती है।
 

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