बच्चे से जुड़ी है मां की दिनचर्या, आखिर क्या हैं एक मां की प्राथमिकताएं

"क्या मुझे इस समय सो जाना चाहिए?" इस समय बच्चा सो रहा है। एक मां के तौर पर इस तरह का सवाल आपके मन में भी आता होगा। जिसका जवाब बहुत मुश्किल है क्योंकि आप अभी भी अपनी प्राथमिकताएं करने में आ रही है समस्या। 
 
अभी बच्चा सो रहा है तो कितने काम करने हैं? कौन सा पहले निपटाना है? कितने समय में काम खत्म करना है? क्या पहले बर्तन साफ कर लूं? (परंतु तब क्या अगर शोर के कारण बच्चा जाग गया) बर्तन निपटाना जरूरी है परंतु बच्चे की नींद खराब करना बिल्कुल सही नहीं। इसे सबसे बाद में करती हूं। 
 
अपना कमरा साफ कर लूं? (हां, ये सही रहेगा परंतु जब वो जागा हो तब भी ये हो सकता है तो अभी का टाइम क्यों खराब प्राथमिकताएं निर्धारित करने की समस्या करूं) 
 
मुझे मेरी किताबों की अलमारी सही करनी है। (यह कई दिनों से साफ नहीं हुई है। हां चलो यही सबसे पहले करती हूं) तभी आपको ख्याल आए अन्य काम और फिर से वहीं पहुंच गईं जहां से शुरू हुआ था। 
 
कपड़े सुखा लेती हूं। (यही सबसे पहले करती हूं)
 
अब क्या?? 
 
क्या आज आराम ही कर लूं! (मैं पूरे टाइम काम करती हूं, मुझे भी आराम की जरूरत है।) 
 
दस दिन पहले जो किताब शुरू की थी उसे खत्म कर लेती हूं। (अरे सारा घर उथल पुथल हो रहा, किताब तो पढ ही नहीं सकते... अरे परंतु मुझे भी तो खुद के लिए समय चाहिए) 
 
सोती ही हूं और कुछ नहीं करती! बच्चे से ज्यादा चिढ़चिढ़ी तो मैं हो गई हूं, नींद जो पूरी नहीं हो रही। (परंतु आधा घंटा सोने से तो मेरा सिरदर्द होगा)  
 
यह है आपके दिमाग की लड़ाई। क्या आपके लिए बेहतर नहीं होगा कि आप अपनी प्राथमिकताएं तय करें, ताकि आपके बच्चे के जागने से पहले कुछ काम तो आप निपटा ही सकें। अपनी प्राथमिकताएं तय करें और पाएं जिंदगी पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है। 
 

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