यूरोप के आतंकवादी संगठन

Author अनवर जमाल अशरफ|
पेरिस हमले ने में आतंकवाद की बहस को नई दिशा दे दी है। समझा जाता है कि 9/11 की घटना के बाद मुस्लिम देशों के आतंकवादियों ने यूरोप को निशाना बनाया है। लेकिन यूरोप दशकों से अपने ही देशों के आतंकवादी संगठनों से जूझ रहा है। यूरोपीय देशों में दर्जनभर से ज्यादा हैं।
जून 1987 : स्पेन में बार्सिलोना शहर के एक भीड़भाड़ वाले शॉपिंग मॉल में अचानक कार बम धमाका हो गया। चारों तरफ अफरातफरी फैल गई। कम से कम 21 लोगों की जान चली गई। स्पेन का चहल-पहल वाला महानगर दहशत की चपेट में आ गया। शुरुआती जांच में ही हमलावरों का पता लग गया। वे बास्क इलाके के राष्ट्रवादी आतंकवादी संगठन एटा के सदस्य थे।
 
स्पेन का आतंकी संगठन : बास्क स्पेन का वह हिस्सा है, जहां अलग भाषा बोली जाती है और यहां के लोगों का मानना है कि सांस्कृतिक तौर पर उनकी अलग पहचान है। अलग बास्क राष्ट्र की मांग करने वाले संगठन एटा ने 1980 के दशक में स्पेन में कार बम धमाकों से दहशत मचा रखी थी। बार्सिलोना शॉपिंग मॉल से ठीक पहले उन्होंने छह और कार धमाके किए थे। पर बार्सिलोना विस्फोट को उनके सबसे क्रूर हमलों में गिना जाता है। अमेरिका और यूरोपीय संघ एटा को आतंकवादी संगठन मानते हैं।
 
पहली नजर में लगता है कि यूरोपीय संघ के देशों में सीमा संघर्ष नहीं है क्योंकि ज्यादातर देश शेंगन समझौते से जुड़े हैं। इसके तहत बिना पासपोर्ट और वीजा के एक दूसरे देश में जाया जा सकता है, लेकिन सच्चाई अलग है। यूरोपीय संघ के अधिकतर देश अलगाववादी संगठनों से जूझ रहे हैं। स्पेन और उत्तरी आयरलैंड में ये संगठन हिंसक रूप ले चुके हैं।
 
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब यूरोप में एक संघ की रूप रेखा तय की जा रही थी, लगभग उसी वक्त स्पेन की सीमाओं को लेकर भी झगड़ा बढ़ गया। बास्क इलाके के राष्ट्रवादियों ने अलग देश की मांग शुरू की। 1950 के दशक में छात्र आंदोलन ने धीरे-धीरे एटा का रूप धारण कर लिया और बाद में यह हिंसक आंदोलनों में शामिल हो गया। इलाके के लोगों और कुछ राजनीतिक दलों के समर्थन से एटा मजबूत होता चला गया।
 
आयरलैंड के अलगाववादी संगठन : कुछ ऐसा ही हाल उत्तरी आयरलैंड का है। यूनाइटेड किंगडम का यह देश सिर्फ धर्म नहीं बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट ईसाइयों में बंटा है। राजनीतिक तौर पर प्रोटेस्टेंट ईसाई चाहते हैं कि उत्तरी आयरलैंड यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा बना रहे, जबकि कैथोलिकों का मानना है कि यह आयरलैंड के करीब है और इसे आयरलैंड में शामिल हो जाना चाहिए। इंग्लैंड और यूनाइटेड किंगडम से संघर्ष कर रहा ऐसा ही एक संगठन सीरा (कंटीन्यूटी आईआरए) है, जो खुद को वृहत्त आयरलैंड की सेना मानता है। पिछले दो दशकों में इसने कई आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया है और यूरोपीय संघ इसे भी आतंकी सूची में रखता है।
 
उत्तरी आयरलैंड के कई संगठनों को यूरोपीय संघ की आतंकवादी लिस्ट में डाला गया है, जिनमें रियल आईआरए, लोयलिस्ट वॉलेंटियर फोर्स और ऑरेंज वॉलेंटियर शामिल हैं। ये संगठन लंदन के नियंत्रण से अलग होकर डबलिन के साथ मिलना चाहते हैं। उत्तरी आयरलैंड के लोग अलग होने के मुद्दे पर बंटे हुए हैं।
 
पिछली शताब्दी में यूरोप के कई देशों में बंटवारा हुआ। इनमें जर्मनी के अलावा यूगोस्वालिया, चेकोस्लोवाकिया और सोवियत रूस प्रमुख हैं। इन बंटवारों ने भी अलगाववादी संगठनों को बल दिया। हालांकि जर्मनी यूरोप या समूचे विश्व की इकलौती मिसाल है, जो बंटवारे के 40 साल बाद फिर से एक हो गया।
 
यूरोपीय संघ की लिस्ट : संयुक्त राष्ट्र की ही तरह यूरोपीय संघ भी आतंकवादियों और आतंकी संगठनों की सूची तैयार करता है और हर छह महीने में इनकी समीक्षा की जाती है। अलग खालिस्तान की मांग करने वाले बब्बर खालसा और खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स को भी इस सूची में शामिल किया गया है। संघ की लिस्ट में ज्यादातर मध्य पूर्व देशों के संगठन हैं लेकिन इसमें 15 से ज्यादा यूरोपीय देशों के संगठन भी शामिल किए गए हैं।
 
साझा यूरोप विरोधी : ऐसा नहीं कि यूरोप के आतंकवादी संगठन सिर्फ अलगाववादी अभियान से जुड़े हैं। धुर दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाले कुछ संगठन भी आतंकवाद की लिस्ट में हैं। ये एकीकृत यूरोप और वैश्वीकरण का विरोध करते हैं। ये शरणार्थियों को बसाने की यूरोपीय नीति के भी विरोधी हैं। इनमें इटली की रेड आर्मी और ग्रीस की रिवॉल्यूशनरी स्ट्रगल जैसे ग्रुप शामिल हैं, जिन्हें आतंकवादी संगठन करार दिया गया है।
 
ऐसे ही एक फासीवादी संगठन आर्म्ड रिवॉल्यूशनरी न्यूक्लियाई ने 1980 में इटली के बोलोनिया शहर के ट्रेन स्टेशन में टाइम बम फिट कर दिया, जिसमें 85 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। पिछली सदी में इसे यूरोप का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला माना जाता है।
 
हालांकि पिछले एक दशक में ऐसे संगठन कमजोर पड़े हैं और उनकी सक्रियता कम हुई है। इस बीच यूरोप में आतंकवाद का चेहरा भी बदल गया है और अब यह 'इस्लामी आतंकवाद' के तौर पर नजर आने लगा है। लेकिन भीतर ही भीतर दूसरे संघर्ष भी जारी हैं।

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