ऑस्ट्रेलिया के इतिहास से सजा राष्ट्रमंडल खेलों का रंगारंग उद्घाटन समारोह

Last Updated: बुधवार, 4 अप्रैल 2018 (19:51 IST)
गोल्ड कोस्ट। ऑस्ट्रेलिया के के में आज जगमगाती पृथ्वी पर ऑस्ट्रेलिया के नक्शे को उकेरकर 21वें राष्ट्रमंडल खेलों के में मेजबान देश के इतिहास और संस्कृति की झलक ने दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया।

ऑस्ट्रेलिया में उद्घाटन समारोह के साथ ही 21वें राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत हो गई और 11 दिनों तक चलने वाले राष्ट्रमंडल महाकुंभ में 71 देशों के 23 खेलों में 275 स्वर्ण पदकों के लिए जोर आजमाइश करेंगे। ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स ने ब्रिटेन की महारानी की ओर से इन खेलों के शुरू होने की घोषणा की।

रंग बिरंगे उद्घाटन समारोह में करीब 4000 कलाकारों ने कैरारा स्टेडियम में बैठे 35 हजार दर्शकों को सम्मोहित कर दिया। उद्घाटन समारोह की विशेषता स्टेडियम के बीचों-बीच उकेरी गई समुद्र और बीच की झलक थी जहां थ्री डी के जरिए समुद्री जीवन को बड़ी सजीवता के साथ पेश किया गया।

राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह को अंतिम समय तक गुप्त रखा गया था हालांकि इसकी एक झलक मेजबान देश के टीवी चैनल ने लीक भी कर दी थी। लेकिन इन खेलों की भव्य शुरूआत हुई और कैरारा स्टेडियम में जैसे ही धरती की नीली रोशनी में जगमगाती झलक दिखाई दी पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

उद्घाटन समारोह में पृथ्वी की जगमगाहट के बाद स्टेडियम में नीली रौशनी के बीच आदिवासी परिधानों में कलाकारों ने ऑस्ट्रेलिया के इतिहास को दुनिया के सामने रख दिया। सेई बाई द्वीप के ईगल डांस ने तो समां ही बांध दिया। स्टेडियम में बीच में ही ऑस्ट्रेलिया की पहचान उसके खूबसूरत बीच और सर्फिंग का नजारा तैयार किया जहां थ्री डी एफैक्ट से समुद्र की लहरों ने मानो दर्शकों को असल बीच पर ही पहुंचा दिया।

उस दौरान बीच पर ही गायिका रिकी ली कॉल्टर ने अपना गीत टेक्निकलर लव' गीत गाया जबकि बीच पर स्विमिंग कास्ट्यूम्स में बैठे कलाकारों ने सर्फिग बोर्ड हाथ में लेकर बेहतरीन डांस किया। शुरुआती कार्यक्रम के बाद मुख्य अतिथियों का मंच पर आना शुरू हो गया। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल, ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स और उनकी पत्नी कैमिला और गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष पीटर बिएटी मंच पर पहुंचे।

राष्ट्रमंडल खेलों की बैटन ने फिर स्टेडियम में प्रवेश किया। यह बैटन 71 देशों का सफर तय करते हुए वापिस गोल्ड कोस्ट पहुंची है। इसके बाद विभिन्न देशों के खिलाड़ियों का मार्च पास्ट शुरू हुआ। हर देश के दल के आगे एक युवा हाथ में सर्फिंग बोर्ड लेकर चल रहा था जिस पर उस देश का नाम लिखा था। स्टेडियम में सबसे पहले पिछले ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के मेजबान देश स्कॉटलैंड ने परंपरा के अनुसार सबसे पहले प्रवेश किया।

स्कॉटलैंड के 400 मीटर के बाधा धावक एलिद डोएल अपने दल के ध्वजवाहक थे। स्कॉटलैंड के बाद साइप्रस और फिर इंग्लैंड के दल ने स्टेडियम में प्रवेश किया। मार्च पास्ट में आइल ऑफ मैन, माल्टा, उत्तरी आयरलैंड, वेल्स, बोत्सवाना, कैमरून, घाना, जांबिया, केन्या, लेसोथो, मलावी, मॉरीशस, मोजांबिक, नामीबिया, नाइजीरिया, रवांडा, सेशेल्स, सिएरा लियोन, दक्षिण अफ्रीका, स्वाजिलैंड, युगांडा, तंजानिया के एथलीटों ने अपनी धमक से स्टेडियम को गुंजायमान कर दिया।

एशियाई देशों में बांग्लादेश का दल सबसे पहले निकला। ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू की अगुवाई में जैसे ही भारतीय दल मार्चपास्ट में मंच के सामने से गुजरा तो तालियों की गड़गड़ाट तेज हो गईं। सिंधू के साथ साथ भारत के कुछ पैरा एथलीट व्हीलचेयर्स पर बैठे दल में सबसे आगे चल रहे थे और दर्शकों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।

भारत के पुरुषऔर महिला खिलाड़ी पहली बार एक साथ ट्राउजर्स और ब्लेजर्स की एक जैसी ड्रैस में थे। इससे पहले तक भारतीय महिला खिलाड़ी ऐसे उद्घाटन समारोह में साड़ी और ब्लेजर में उतरती थीं जबकि पुरुष खिलाड़ी ब्लेजर्स के साथ पगड़ी बांधे रहते थे लेकिन इस बार भारतीय दल अलग नजर आया। भारत के पीछे मलेशिया और पाकिस्तान के छोटे दल थे। सिंगापुर और श्रीलंका ने भी मार्चपास्ट में अपनी जगह बनाई।

अधिकतर देशों के खिलाड़ी अपने देशों की परंपरागत पोशाक में थे। मार्च पास्ट के बाद पांच बार की राष्ट्रमंडल रजत विजेता सूसी ओ नील ने क्वींस बैटन लेकर स्टेडियम में प्रवेश किया। ऑस्ट्रेलिया में 3800 लोगों ने बैटन संभाली थी।

आयोजन समिति के अध्यक्ष पीटर बीटी ने स्वागत भाषण दिया। बीच बीच में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चलते रहे। प्रिंस चार्ल्स ने खेलों के शुरू होने की जैसे ही औपचारिक घोषणा की, स्टेडियम के ऊपर आसमान सतरंगी रोशनी से नहा उठा।

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