मोबाइल से दूर रहने वाले बजरंग को नहीं पता सिनेमा हॉल कैसा होता है

पुनः संशोधित शुक्रवार, 2 नवंबर 2018 (19:36 IST)
गोहाना (सोनीपत)। बजरंग पूनिया ने खुद का देश का सबसे सफल पहलवानों में से एक साबित किया है लेकिन अपनी लय को बरकरार रखने के लिए उन्हें प्रलोभनों से बचना होगा, जिसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है। राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाला यह खिलाड़ी में दो पदक जीतने वाले इकलौते भारतीय हैं।
बजरंग ने खुद को सात साल से मोबाइल फोन से दूर रखा, प्रतियोगिता के समय कभी भी घूमने नहीं जाते हैं और उन्हें नहीं पता कि सिनेमा हॉल कैसा होता है। ये प्रलोभन भले ही ज्यादा बड़े नहीं हो लेकिन बजरंग को लगता है कि इससे आसानी से ध्यान भटक सकता है। इसलिए खुद पर नियंत्रण रखना जरूरी है, उसका नतीजा आप सब देख सकते है।

हरियाणा के 24 साल के इस खिलाड़ी के लिए साल 2018 सफलताओं से भरा रहा है जिसमें उन्होंने 5 पदक जीते हैं। इन 5 में से तीन पदक बड़ी चैम्पियनशिप से आए हैं। बजरंग ने कहा कि मैं बहुत सारी चीजें करना चाहता हूं लेकिन खुद पर नियंत्रण रख रहा हूं। मुझे हमेशा अपने पास फोन रखने का शौक है लेकिन 2010 में जब मैंने अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में खेलना शुरू किया था, तब योगी भाई (योगेश्वर दत्त, जो उनके मेंटर भी हैं) ने मुझे ऐसा करने से मना किया था। अभी भी जब वे मेरे आस पास होते हैं तो मैं अपना फोन छुपा लेता हूं।

योगेश्वर दत्त की अकादमी में आयोजित हरियाणा गौरव कप के लिए यहां पहुंचे बजरंग ने कहा कि उन्हें पता है कि अब मेरे पास मोबाइल फोन है लेकिन उनके सामने मैं कभी भी इसका इस्तेमाल नहीं करता हूं। अगर वह मेरे साथ 10 घंटे तक है तो मैं 10 घंटे तक अपना मोबाइल छूता भी नहीं हूं। बजरंग से जब ट्‍विटर पर सक्रियता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनका ट्विटर हैंडल एक दोस्त संचालित करता है।

बजरंग ने प्रतियोगिताओं के सिलसिले में 30 से ज्यादा देशों की यात्रा की है लेकिन स्पर्धा के दौरान वह आयोजन स्थल, होटल और हवाईअड्डे के अलावा कहीं नहीं जाते। उन्होंने कहा कि मैं कभी किसी प्रतियोगिता के दौरान सैर-सपाटे के लिए नहीं जाता हूं। अब योगी भाई मेरे साथ यात्रा नहीं करते लेकिन मैं घूमने की जगह विश्राम और खेल पर ध्यान देना पसंद करता हूं।


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