सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो को जानिए

भारतीय संस्कृति को संजोए अमेरिकी द्वीप राष्ट्र

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भारत के बाहर भारत का होना बहुत अच्छा लगता है। भारत के बाहर कुछ ऐसे देश है जहां भारतीय धर्म और संस्कृति फल-फूल रही है। उन्हीं देशों में से हैं- सूरीनाम, और टोबैगो। उक्त समूह अमेरिकन समुद्र के तटवर्ती द्वीप है। एक संक्षिप्त परिचय

दक्षिण अमेरिका द्वीप में भारतीय मूल के लोग करीब 200 वर्ष पूर्व गिरमिटिया मजदूर के रूप में सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो गए थे। यहां के लोग भारतीय संस्कृति और सभ्यता से आज भी गहराई से जुड़े हुए हैं।

त्रिनिदाना और टोबैगो : इस द्वीप समूह की जनसंख्या लगभग 13 लाख है। इस द्वीप समूह देश को 1962 में आजादी मिली और 1973 में यह गणराज्य बना। यहां पर ईसाई धर्म को 40.6% है, हिंदू धर्म को 22.5% और इस्लाम को 7% लोग मानते हैं। यहां एक छोटा यहूदी धर्म भी है। यहूदी 0.1% हैं. 1.9% लोग नास्तिक है।
अंग्रेजी यहां की औपचारिक भाषा है, लेकिन डच, हिंदी, भोजपुरी, स्पेनी भाषा भी बोली जाती है। हालांकि त्रिनिदाद में अंग्रेजी का रूप अलग है इसे त्रिनिदाद में क्रेओले और तोबागोना में तोबागोना क्रेओले कहते हैं।
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: यूरोप से अटलांटिक महासागर पार करते ही लातिन अमेरिकी देश सूरीनाम उत्तरी छोर पर नजर आता है। 1975 में इस देश को नीदरलैंड से आजादी मिली। यहां की आबादी कुल 5 लाख है। यहां पर भारत के किसी छोटे से राज्य की छोटी सी राजधानी के छोटे से हवाई अड्डे जैसा हवाई अड्डा है पारामारिबो। पारामारिबो सूरीनाम की राजधानी है।
यहां की औपचारिक भाषा है डच लेकिन सभी को हिंदी या भोजपुरी में बातें करते देख आश्चर्य होता है। भारतीय लोग यहां की कुल आबादी का 38 प्रतिशत हिस्सा हैं। सूरीनाम में बहुत से मंदिर है।

यहां सूरीनाम नामक एक नदी भी बहती है जिसे श्रीराम के नाम से भी जाना जाता है। सूरीनाम की जनसंख्या करीब पांच लाख है, जिसमें करीब 38 प्रतिशत हिंदू हैं। सूरीनाम के पारामरिबो में भी कुंभ का आयोजन होने लगा है। सूर्य कुंभ पर्व के नाम से प्रसिद्ध इस अनोखे मेले का आयोजन हर साल होता है।
सूरीनाम द्वीप दस जिलों में सिमटा है - 1.ब्रोकोपोंडो, 2.कोमेविंजे, 3.कोर्निये, 4.मारोविंजे, 5.निकेरेइये, 6.पारा, 7.पारामारिबो, 8.सारामाचा, 9.सिपालिविनी, 10.वानीचा।

प्रस्तुति- शतायु

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