रामायण काल के इन आविष्कारों को जानकर चौंक जाएंगे...

'रामायण' का शब्‍दार्थ है- का ‘अयण' अर्थात ‘भ्रमण'। वाल्मीकि रामायण और उसके समकालीन ग्रंथों में ‘इतिहास' को ‘पुरावृत्त' कहा गया है। कालिदास के ‘रघुवंश' में विश्‍वामित्र को पुरावृत्त सुनाते हैं। मार्क्‍सवादी चिंतक डॉ.रामविलास शर्मा ने रामायण को महाकाव्‍यात्‍मक इतिहास की श्रेणी में रखा है। रामायण और महाभारत में विज्ञानसम्‍मत अनेक सूत्र व स्रोत मौजूद हैं। रामायण काल को लगभग 7323 ईसा पूर्व अर्थात आज से लगभग 9339 वर्ष पूर्व का बताया है, जबकि भगवान श्रीराम का जन्म 5114 ईसा पूर्व चैत्र मास की नवमी को हुआ था।
इतिहास तथ्‍य और घटनाओं के साथ मानव की विकास यात्रा की खोज भी है। यह तय है कि मानव अपने विकास के अनुक्रम में ही वैज्ञानिक अनुसंधानों से सायास-अनायास जुड़ता रहा और आगे बढ़ता रहा है। रामायण काल में कई वैज्ञानिक थे। नल, नील, मय दानव, विश्वकर्मा, अग्निवेश, सुबाहू, ऋषि अगत्स्य, वशिष्ठ, विश्वामित्र आदि कई वैज्ञानिक थे।
 
रामायण के काल को आर्यों के प्रारंभिक काल से जोड़ा जाता है। ऋग्‍वेद के लेखन-संपादन काल के समय संस्‍कृत भाषायी विकास के शिखर पर थी। रामायण काल में जो वैज्ञानिक उपलब्धियां या आविष्कार हासिल किए गए थे, वे सभी महाभारत काल में चरमोत्‍कर्ष पर थे।
 
रामायण भारत के जीवन का वृत्तांतभर नहीं है। इसमें कौटुम्‍बिक सांसारिकता है। राष्ट्रीयता, शासन और समाज संचालन के कूट-सूत्र हैं। भूगोल, वनस्‍पति और जीव-जगत हैं। अस्‍त्र-शस्‍त्र और यौद्धिक कौशल के गुण हैं। भौतिकवाद और अध्या‍त्मवाद के बीच संतुलन है। षठ दर्शन और अनेक वैज्ञानिक उपलब्‍धियां हैं। वाल्मीकि ने अपने ग्रंथ में वे सारी बातें समाहित करने का प्रयास किया, जो उस काल में प्रचलित थीं।
 
आओ जानते हैं कि आज से लगभग 10,000 वर्ष पूर्व हुए भगवान राम के काल में कौन-कौन-से ऐसे आविष्कार हो चुके थे, जो वर्तमान के आ‍धुनिक काल में भी प्रचलित हैं। 
 
 
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