जब हो गया था राम और लक्ष्मण का अपहरण

*रावण के कहने पर ने युद्ध से पहले युद्ध शिविर में उतरकर और का अपहरण कर लिया। वह दोनों को पाताल लोक ले गया और एक गुप्त स्थान पर बंधक बनाकर रख लिया। 
 
*राम और लक्ष्मण के अपहरण से वानर सेना भयभीत व शोकाकुल हो गई, लेकिन विभीषण ने यह भेद हनुमान के समक्ष प्रकट कर दिया कि कौन अपहरण करके ले जा सकता है।
 
*तब हनुमानजी वेग की गति से पाताल पुरी पहुंच गए। वहां उन्होंने देखा कि उनके ही रूप जैसा कोई बालक पहरा दे रहा है जिसका नाम था। मकरध्वज हनुमानजी का ही पुत्र था।  
*जब हनुमानजी लंकादहन कर लौट रहे थे तब समुद्र के किनारे अपनी पूंछ ठंडी कर रहे थे तब उनके पसीने की बूंद गिरी और उस बूंद को मछली ने निगल लिया और वह गर्भवती हो गई। बाद में जब मकरध्वज का जन्म हुआ तो वह अहिरावण को मिला। अहिरावण ने उसे पाला था।
 
*मकरध्वज और हनुमानजी का युद्ध हुआ। मकरध्वज हार गया तब हनुमानजी ने अहिरावण का वध कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया और मकरध्वज को पाताल लोक का राजा नियुक्त कर दिया।
 
* अंत में हनुमानजी राम और लक्ष्मण दोनों को अपने कंधे पर बिठाकर पुन: युद्ध शिविर में लौट गए और चारों ओर हर्ष व्याप्त हो गया।
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