ब्रह्मांड में कौन किससे बड़ी शक्ति है?

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
यह सही है कि न कोई बड़ा है और न कोई छोटा, लेकिन मनुष्‍य की बुद्धि भेद करना जानती है। उसे इसी तरह से समझ में आता है। यह कहना की सभी समान है या सभी उस परम सत्य के ही अंश है। ऐसा कहने से समझ में नहीं आता है। यहां हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि आपको के बारे में नहीं बल्कि हिन्दू धर्म के बारे में बताएंगे लेकिन भूमिका में थोड़ी सी ब्रह्मांड की जानकारी जरूरी ताकि आपको पता चल सके
कि ब्रह्मांड में हमारी क्या औकात है।

जानना चाहता है कि इस ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्ति क्या है। उससे छोटी क्या है और उससे भी छोटी शक्ति कौन है। अंत में सबसे छोटी शक्ति क्या है। इस तरह क्रम में समझने से ही अंत में समझ में आता है। अत: पहले हम यह समझने की ब्रहमांड क्या है?

हमें जो यह सूर्य दिखाई दे रहा है वह इतना बड़ा है कि धरती उसके आगे कुछ नहीं। वैज्ञानिक कहते हैं कि धरती से 13 लाख गुना बड़ा है। सूर्य एक तारा है, जो हमारे सौरमंडल में सबसे बड़ा है जिसके चक्कर सारे ग्रह, उपग्रह व अन्य पिंड लगाते हैं। सूर्य का व्यास लगभग 13 लाख 92 हजार किलोमीटर है, जो पृथ्वी के व्यास से लगभग 109 गुना बड़ा है। सूरज देखने में इतना बड़ा नहीं लगता क्योंकि वह धरती से बहुत दूर है। पृथ्वी को सूर्य के ताप का 2 अरबवां भाग मिलता है।
सूर्य आकाशगंगा के 100 अरब से अधिक तारो में से एक सामान्य मुख्य क्रम का G2 श्रेणी का साधारण तारा है। इससे कई गुना बड़े तारे हैं। उत्तर की दिशा में जो ध्रुव तारा दिखाई देता है वह वास्तव में एक तारामंडल है जो हमसे 390 प्रकाश वर्ष दूर है। इसे अंग्रेजी में पोल स्टार भी कहा जाता है। इस तारे का व्यास सूर्य से 30 गुना अधिक है। भार में यह सूर्य से 7.50 गुना अधिक है और इसकी चमक तो सूर्य से 22 सौ गुना अधिक है। वैज्ञानिक कहते हैं कि इससे भी बड़े तारे हैं। अब आप कल्पना करें की ब्रह्मांड कितना बड़ा है। इसमें जो अलौकिक शक्तियां विचरण कर रही है अब हम उसके बारे में बात करते हैं।

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