प्रेम कविता : उसकी याद फिर से आई है...




उसकी याद फिर से आई है,
दूर कहीं है।

रात रो-रोकर कटी है कहीं पर,
कहीं सुबह हो रही विदाई है।

किसी के अरमानों का गला गया घोंटा,
किसी के अरमान सजकर आए हैं।

जिंदगी किसी की बन गई कांटे,
फूल किसी की जिंदगी के मुस्कुराए हैं।
अश्क आंखों में भर आए किसी के,
हंसी ओठों पे किसी के आई है।

किसी की फूलों से सज गई अर्थी,
किसी के गजरों की खुशबू आई है।

रात अमावस की किसी की आई है,
किसी ने हाथों में मेहंदी रचाई है।

आंख रो-रोकर लाल हुई किसी की,
किसी के लबों पर हंसी आई है।
उसकी याद फिर से आई है,
दूर कहीं गूंज उठी शहनाई है।

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :