Widgets Magazine

रोमांस कविता : एक बार तो कहते...

Author सुशील कुमार शर्मा|

 
 
 
एक बार तो कहते मत जाओ तुम मेरी हो,
एक बार तो कहते आ जाओ तुम मेरी हो।
 
मन की पहली धड़कन तुम्हीं थे,
तन की पहली सिहरन तुम ही थे।
आंखों में तुम प्रथम दृष्ट्या प्रेमी थे,
जीवन का पहला सुमिरन तुम ही थे।
 
एक बार तो कहते रुक जाओ तुम मेरी हो,
एक बार तो कहते मत जाओ तुम मेरी हो।
 
जीवन के अनुरागों को तुमसे बल था,
हृदय के गहरे भावों को तुमसे बल था।
जीवन की हर खुशी शुरू थी तुमसे,
जीने के हर पल को तुमसे बल था।
 
एक बार तो कहते फिर आओ तुम मेरी हो,
एक बार तो कहते मत जाओ तुम मेरी हो।
 
तुम बिन जीवन सूना-सा मन थका-थका,
तुम बिन आंगन रूठा-सा सब रुका-रुका।
तूफानों में नाव किनारा मुश्किल है,
तुम बिन मन ये टूटा-सा दिल फटा-फटा।
 
एक बार तो कहते दिल दे जाओ तुम मेरी हो,
एक बार तो कहते मत जाओ तुम मेरी हो।

 
Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।
Widgets Magazine