2 पदकों के साथ समाप्त हुआ भारत का रियो ओलंपिक अभियान

Last Updated: रविवार, 21 अगस्त 2016 (21:34 IST)
रियो डि जेनेरो। स्टार पीवी सिंधू के रजत की चमक, महिला पहलवान के कांस्य की धमक और कई दिग्गजों के सुपर फ्लॉप प्रदर्शन के बीच का में अभियान रिकॉर्ड 118 सदस्यीय दल उतारने के बावजूद मात्र दो पदकों के साथ समाप्त हो गया।
        
भारत ने 2012 में पिछले लंदन ओलंपिक में दो रजत और चार कांस्य सहित छह पदक जीते थे जबकि 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भारत ने एक स्वर्ण और दो कांस्य सहित तीन पदक जीते। इस बार भारत के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने 10 से 15 पदक का दावा किया था जबकि पूर्व खेल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दस पदक और उनके बाद कुछ समय के लिए खेल मंत्रालय संभालने वाले जीतेन्द्र सिंह ने लंदन के पदक दोगुने होने का दावा किया था लेकिन सभी दावे धरे के धरे रह गए और भारत दो ही पदक जीत पाया। 
       
यह तो भला हो दो बेटियों सिंधू और साक्षी का, जिन्होंने 24 घंटे के अंतराल में जीतकर देश की इज्जत बचा ली वरना पहले 12 दिन तक तो भारत के हाथ एक भी पदक नहीं लगा था और तब ऐसा लग रहा था कि कहीं भारत को खाली हाथ न लौटना पड़े लेकिन पहले हरियाणा की साक्षी ने ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता और फिर हैदराबाद की सिंधू ने ऐतिहासिक रजत पदक जीत लिया। 
      
सिंधू और साक्षी के अलावा महिला जिमनास्ट दीपा करमाकर का वॉल्ट फाइनल में चौथा स्थान हासिल करना, निशानेबाज अभिनव बिंद्रा का दस मीटर एयर राइफल स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहना, एथलीट ललिता बाबर का 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में दसवें नंबर पर रहना, सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना का कांस्य पदक मुकाबले में हारना, किदांबी श्रीकांत का बैडमिंटन के पुरुष क्वार्टर फाइनल में हारना, पुरुष तीरंदाज अतानु दास का क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना, मुक्केबाज विकास कृष्णन यादव का भी क्वार्टर फाइनल में पहुंचना, 18 वर्षीय महिला गोल्फर अदिति अशोक का 41वां स्थान हासिल करना और युवा निशानेबाज जीतू राय का 10 मीटर एयर पिस्टल में आठवें स्थान पर रहना इस निराशाजनक अभियान के बीच कुछ उल्लेखनीय प्रदर्शन रहे। 
 
लंदन ओलंपिक के पिछले छह पदक विजेताओं में से तीन कांस्य पदक विजेता निशानेबाज गगन नारंग, बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और पहलवान योगेश्वर दत्त इस बार रियो में उतरे लेकिन तीनों ने ही बहुत ज्यादा निराश किया। डोपिंग के आरोपों से घिरे पहलवान नरसिंह यादव पर खेल पंचाट का चार वर्ष का प्रतिबंध लगाना भारत के लिए  इस ओलंपिक का सबसे बड़ा झटका था।
         
नरसिंह प्रकरण से एक बात सामने आ गई कि भारतीय अधिकारियों ने इस पूरे मामले को प्रोफेशनल तरीके से नहीं संभाला जिससे एक पहलवान को न केवल मानसिक तकलीफ से गुजरना पड़ा बल्कि उसके पूरे कॅरियर पर ही अब एक सवालिया निशान लग गया। रियो में भारतीय खिलाड़ियों के सुपर फ्लॉप प्रदर्शन की बात की जाए तो कई दिग्गज सितारों ने बहुत निराश किया। अपना सातवां ओलंपिक खेलने उतरे लिएंडर पेस पुरुष युगल के पहले ही राउंड में बाहर हो गए। साइना एक राउंड जीतीं और फिर घुटने की चोट के कारण दूसरा मैच हारकर बाहर हो गईं। 
          
गगन नारंग तीन स्पर्धाओं में उतरे लेकिन एक के भी फाइनल में नहीं पहुंच पाए। अपना आखिरी ओलंपिक खेल रहे बीजिंग के व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा चौथे स्थान पर रहकर खेलों से विदा हुए। पहलवान योगेश्वर  दत्त भी पहले ही राउंड में हारकर बाहर हो गए। लंदन ओलंपिक के फाइनलिस्ट डिस्कस थ्रोअर विकास गौड़ा इस बार फाइनल में नहीं पहुंच सके।
           
दुती चंद और टिंटू लुका जैसी धाविकाएं सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंच पाईं। ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की स्टार बैडमिंटन जोड़ी ग्रुप चरण में ही बाहर हो पाईं। चैंपियंस ट्राफी की रजत पदक विजेता पुरुष हॉकी टीम क्वार्टरफाइनल में बेल्जियम की बाधा पार नहीं कर पाई। सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना की जोड़ी पहले मिश्रित युगल के सेमीफाइनल में और फिर कांस्य पदक के मुकाबले में हार गई।
 
रियो में भारतीय खिलाड़ियों के लगातार होते निराशाजनक प्रदर्शन के बीच केन्द्रीय खेल मंत्री विजय गोयल भी बार-बार खिलाड़ियों के बीच पहुंचने को लेकर आलोचनाओं के घेरे में आए। ऐसी खबरें आईं कि आयोजन समिति ने भारतीय दल प्रमुख राकेश गुप्ता को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि यदि गोयल ने अपने साथ गैर मान्यता प्राप्त लोगों को ले जाना नहीं रोका तो उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। गोयल का मामला फिर संसद में भी उठा।
       
हॉकी खिलाड़ियों के लिए खेल गांव में उनके कमरों में फर्नीचर, कुर्सी तथा टीवी का न होना भी एक मुद्दा बना रहा। हॉकी टीम के कोच रोलैंट ओल्टमैंस ने खेलगांव पहुंचने के बाद ही इस मामले को लगातार उठाया। हालांकि हॉकी टीम नए फार्मेट के तहत अपने ग्रुप में चौथे स्थान पर रहकर क्वार्टर फाइनल में तो पहुंच गयी लेकिन वहां उसे बेल्जियम के हाथों 1-3 की हार झेलनी पड़ी।
       
पुरुष हॉकी टीम आठवें स्थान पर रही जो पिछले लंदन ओलंपिक के 12वें स्थान से चार स्थान का सुधार है। 36 साल बाद ओलंपिक खेलने उतरी महिला हॉकी टीम ने भी काफी निराश किया और मात्र एक अंक लेकर अपने ग्रुप में छठे स्थान पर रही।   
       
सातवां ओलंपिक खेल रहे लिएंडर पेस का देरी से खेलगांव पहुंचना, फिर कमरा न मिलना और बोपन्ना के साथ मतभेद की खबरें सामने आना भी भारतीयों के लिए शर्मनाक विवादों का मामला रहा। दल प्रमुख राकेश गुप्ता को इसे लेकर काफी सफाई देनी पड़ी। रियो खेलों के लिए सद्भावना दूत बनाए गए क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर भी रियो पहुंचे और खिलाड़ियों से मिलकर उन्हें प्रेरित करने की कोशिश की लेकिन वह खिलाड़ियों को इतना प्रेरित नहीं कर पाए कि वे पदक जीत सकें। सचिन भी कुछ दिन रियो रहकर वापिस लौट आए और स्वदेश लौटने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील की कि वे खिलाड़ियों को प्रेरित करने वाला संदेश दें।
        
ओलंपिक के शुरुआती दिनों में खिलाड़ियों के लगातार निराशाजनक प्रदर्शन पर लेखिका शोभा डे की टिप्पणी ने भी सुर्खियां बटोरने वाला काम किया। हालांकि शोभा डे को अपनी उस टिप्पणी पर काफी आलोचना झेलनी पड़ी और फिर इसकी भरपाई करते हुए उन्होंने बाद में सिंधू, साक्षी और दीपा को तीन देवियां कहा।
        
रियो में साइना नेहवाल और महिला पहलवान विनेश फोगाट की चोट भारत के लिए  भारी पड़ी। घुटने की चोट के कारण सायना का खेल प्रभावित हुआ और उन्हें जल्द ही बाहर हो जाना पड़ा। साइना ने फिर स्वदेश लौटकर मुंबई में अपने घुटने की सर्जरी कराई। विनेश ने अपना पहला मुकाबला 11-0 से जीता लेकिन दूसरे मैच में घुटने की चोट ने उन्हें भी बाहर कर दिया।
       
भारतीय एथलीटों में गणपति कृष्णन और गुरमीत सिंह 20 किमी पैदल चाल में और पुरुषों की चार गुणा 400 मीटर रिले टीम अयोग्य करार दी गई। सपना पूनिया 20 किमी पैदल चाल स्पर्धा पूरी ही नहीं कर सकीं। एथलीटों का यह प्रदर्शन काफी शर्मनाक है जिन पर सरकार ने अथाह पैसा खर्च किया था। साल बाद ओलंपिक में लौटे गोल्फ में भारत को अपने स्टार खिलाड़ी अनिर्बाण लाहिड़ी और एसएसपी चौरसिया से काफी उम्मीदें थीं लेकिन दोनों ने ही खासा निराश किया। चौरसिया 50वें और लाहिड़ी 57वें स्थान पर रहे। इनके मुकाबले 18 वर्षीय अदिति अशोक महिला गोल्फ में 41वें स्थान के साथ ज्यादा प्रभावित कर गईं।
         
भारत ने रियो में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, मुक्केबाजी, हॉकी, गोल्फ, जिमनास्टिक, जूडो, रोइंग, निशानेबाजी, तैराकी, टेबल टेनिस, टेनिस, भारोत्तोलन और कुश्ती में अपनी चुनौती रखी, जिनमें उसे बैडमिंटन तथा कुश्ती में ही पदक मिले। 
        
भारत को सबसे ज्यादा निराश निशानेबाजों ने किया। भारत ने पिछले तीन ओलंपिक में निशानेबाजी में पदक जीते थे लेकिन इस बार निशानेबाजों का हाथ खाली रहा। रियो में उतरे 12 निशानेबाजों में सिर्फ जीतू राय और अभिनव बिंद्रा ही फाइनल में पहुंच सके। बिंद्रा ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में चौथा स्थान और जीतू ने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में आठवां स्थान हासिल किया था। अन्य निशानेबाजों ने निराश किया और कोई भी चुनौती पेश नहीं कर पाया।
      
तीरंदाजी में अतानु दास, दीपिका कुमारी और बोम्बायला देवी प्री क्वार्टर फाइनल में हारे जबकि लक्ष्मीरानी माझी पहले राउंड में बाहर हो गयी। दीपिका, बोम्बायला और लक्ष्मी की टीम क्वार्टर फाइनल में पराजित हुई। बैडमिंटन में साइना नेहवाल ग्रुप चरण में ही बाहर हो गईं जबकि ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा तथा मनु अत्री और बी सुमित रेड्डी भी ग्रुप चरण में बाहर हो गए। 
 
मुक्केबाजी में विकास कृष्णन यादव क्वार्टर फाइनल में, मनोज कुमार प्री क्वार्टर फाइनल में और शिवा थापा पहले राउंड में बाहर हो गए। जूडो में अवतार सिंह (90 किग्रा) दूसरे राउंड में बाहर हो गए। रोइंग में दत्तू बब्बन भोकानल ने संतोषजनक प्रदर्शन करते हुए 13वां स्थान हासिल किया। तैराकी में साजन प्रकाश 200 मीटर बटरफ्लाई में 28वें और शिवानी कटारिया 200 मीटर फ्रीस्टाइल में 41वें स्थान पर रहे।
      
टेबल टेनिस में अचंत शरत कमल, सौम्यजीत घोष, मणिका बत्रा और मौमा दास पहले राउंड की बाधा पार नहीं कर सके। भारोत्तोलन में सतीश शिवालिंगम 77 किग्रा वर्ग में 11वें स्थान पर रहे जबकि सैखोम मीराबाई चानू 48 किग्रा वर्ग में अपनी स्पर्धा पूरी नहीं कर सके।
        
कुश्ती में फ्री स्टाइल में संदीप तोमर, ग्रीको रोमन में रविन्दर खत्री और हरदीप सिंह तथा महिलाओं में बबीता कुमारी ने भी निराश किया। एथलेटिक्स में दूती चंद (100 मी), श्रावणी नंदा (200मी) आैर निर्मला श्योरण (400 मी) हीट में ही बाहर हो गईं।
        
मनप्रीत कौर को शॉटपुट में 23वां और सीमा पूनिया को डिस्कस थ्रो में 20वां स्थान मिला। महिला मैराथन में ओपी जैशा 89वें और कविता रावत 120वें स्थान पर रहीं। पुरुष एथलीटों में मोहम्मद अनस (400 मी) और जिनसन जॉनसन (800 मी) भी हीट में बाहर हो गए। 20 किलोमीटर पैदल चाल में मनीष सिंह 13वें स्थान पर रहे। अंकित शर्मा लंबी कूद में 24वें, रंजीत महेश्वरी तिहरी कूद में 30वें और विकास गौड़ा डिस्कस थ्रो में 28वें स्थान पर रहे। पुरुष रिले टीम अयोग्य करार दी गई जबकि महिला रिले टीम फाइनल में नहीं पहुंच सकी। (वार्ता) 

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।
Widgets Magazine



और भी पढ़ें :