कैलाश-मानसरोवर यात्रा

आध्यात्मिक केंद्र चार धर्मों का

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-रेणुकमेहत
कैलाश मानसरोवर का नाम सुनते ही हर किसी का मन वहाँ जाने को बेताब हो जाता है। हमारे 34 सदस्यों के दल ने भी जब इस यात्रा पर जाने की ठानी तो प्रत्येक सदस्य उत्साहित हो कर अपने तन व मन को शक्तिशाली बनाने में लग गया।

कैलाश पर्वत समुद्र सतह से 22068 फुट ऊँचा है तथा हिमालय से उत्तरी क्षेत्र में तिब्बत में स्थित है। चूँकि तिब्बत चीन के अधीन है अतः कैलाश चीन में आता है। जो चार धर्मों तिब्बती धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू का आध्यात्मिक केन्द्र है।

  तिब्बतियों की मान्यता है कि वहाँ के एक सत कवि ने वर्षों गुफा में रहकर तपस्या की थीं, जैनियों की मान्यता है कि आदिनाथ ऋषभ देव का यह निर्वाण स्थल अष्टपद है। कहते हैं ऋषभ देव ने आठ पग में कैलाश की यात्रा की थी।      
कैलाश पर्वत की चार दिशाओं से चार नदियों का उद्गम हुआ है ब्रह्मपुत्र, सिंधू, सतलज व करनाली। कैलाश के चारों दिशाओं में विभिन्न जानवरों के मुख है जिसमें से नदियों का उद्गम होता है, पूर्व में अश्वमुख है, पश्चिम में हाथी का मुख है, उत्तर में सिंह का मुख है, दक्षिण में मोर का मुख है।

तिब्बतियों की मान्यता है कि वहाँ के एक सत कवि ने वर्षों गुफा में रहकर तपस्या की थीं, जैनियों की मान्यता है कि आदिनाथ ऋषभ देव का यह निर्वाण स्थल अष्टपद है। कहते हैं ऋषभ देव ने आठ पग में कैलाश की यात्रा की थी। हिन्दू धर्म के अनुयायियों की मान्यता है कि कैलाश पर्वत मेरू पर्वत है जो ब्राह्मंड की धूरी है।

उपर स्वर्ग है जिस पर कैलाशपति सदाशिव विराजे हैं नीचे मृत्यलोक है, इसकी बाहरी परिधि 52 किमी है। मानसरोवर पहाड़ों से घीरी झील है जो पुराणों में 'क्षीर सागर' के नाम से वर्णित है। क्षीर सागरकैलाश से 40 किमी की दूरी पर है व इसी में शेष शैय्‌या पर विष्णु व लक्ष्मी विराजित हो पूरे संसार को संचालित कर रहे है।

ND|
  20 जून को दिल्ली से हवाई यात्रा द्वारा 1घंटे 25 मिनट में हम काठमांडू पहुँच गये। अगले दिन हमने पशुपतिनाथ के दर्शन किये। यहाँ से आगे की यात्रा प्रारंभ की व दूसरे दिन शाम तक हमारा दल चीन में प्रवेश कर चुका था।      
हमने अपने रूपयों को चीनी मुद्रा में परिवर्तित किया क्योंकि अब चीनी मुद्रा जिसे युवान कहते हैं वह हमें काम में आनी वाली थी। जंगमु नामक कस्बें में हमने भोजन किया व रात 11 बजे हमारी 9 टोयटा, लेंड क्रूजर आगे की यात्रा के लिए हमें तैयार मिली। एक गाड़ी में 4 सवारी व एक ड्रायवर बैठ सकता था। यात्रा के दौरान रात में अचानक हमारी गाड़ी रूक गई। ज्ञात हुआ कि भूस्खलन के कारण रास्ता बंद है। लगभग 16 घंटे हम वहीं अटके रहे एक तरफ बड़े-बड़े पहाड़ और दूसरी तरफ बड़ी-बड़ी खाई।


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