जानिए स्वामी विवेकानंद के धार्मिक विचार


महापुरुषों के पत्रों से उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं के दर्शन होते हैं। इस दृष्टि से के पत्र उनके सर्वतोमुखी प्रतिभा संपन्न दिव्य जीवन पर प्रकाश डालते हैं। उन्होंने अपने पत्रों के द्वारा भारतीय संस्कृति और धर्म के कलेवर में नव चैतन्य का संचार किया था। स्वामीजी ने अपने अल्प जीवन में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और प्रगतिशील समाज की परिकल्पना की थी।
 
> अपने भारत भ्रमणकाल के दौरान स्वामीजी ने विभिन्न धर्मों के मूल को समझा और उन्होंने पाया कि सभी धर्मों में उन्हें शाश्वत एकत्व दिख रहा है। श्री रामकृष्ण जो कहा करते थे कि 'खाली पेट धर्म नहीं होता', इस कथन की सत्यता को उन्होंने प्राणों ही प्राणों में अनुभव किया। हिन्दू, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि धर्मों में विचार धन चारों ओर बिखरा हुआ था उसका उन्होंने संग्रह किया।
 
 
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