मनुष्य ऐसा प्राणी रहा है, जिसको हर समय कुछ जानने की जिज्ञासा रही है। इस गुण के कारण मनुष्य ने उन्नति बहुत की है। जिज्ञासा को प्रवृत्त एवं सफल बनाने के लिए प्रयत्नशील रहा है। प्रत्येक मनुष्य अपने भविष्य को जानने की इच्छा रखता है। कुछ जातक अपनी कुंडली के रहस्य को जानने की जिज्ञासा रखते हैं एवं उसके अच्छे-बुरे, शुभ-अशुभ फल को समझने एवं उसके निराकरण को ज्ञान करने की जिज्ञासा रहती है। कालसर्प के विषय में विविध प्रकार की भ्रांतियाँ प्रचलित हैं। आइए जानें, कालसर्प योग के बारे में:
परिवार में दो या चार भाई-बहन होते हैं एवं इनकी संतानें होती हैं। दोनों सगे भाई या बहन की संतान भाई-भाई कहलाते हैं। परंतु इनके गुण, कर्म, स्वभाव, मनोकामनाएँ अलग-अलग होती है अर्थात कर्म भिन्न-भिन्न हुए। कर्म के आधार पर फल का भोग भी भिन्न-भिन्न होगा।
यदि हम सर्प के परिवार पर दृष्टि डालें तो कद्रू और क्रोधवशा दो सगी बहनें थीं। कद्रू से नाग एवं क्रोधवशा से सर्प उत्पन्न हुए। नाग एवं सर्प के शरीर एक जैसे ही हैं, किंतु कर्म गुण अलग-अलग रहे हैं। ज्योतिषियों या यह कहें कि शास्त्रों में जातक की कुंडली में सर्पों का योग निर्धारित हुआ नागों का नहीं हुआ। इसलिए कालसर्प योग कहा जाता है या कहा गया परंतु नागदोष योग नहीं।
कालसर्प दोष दूर करने के कुछ छोटे उपाय
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1. यदि पति-पत्नी में क्लेश हो रहा हो, आपसी प्रेम की कमी हो रही हो तो भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या बालकृष्ण की मूर्ति जिसके सिर पर मोरपंखी मुकुट धारण हो घर में स्थापित करें एवं प्रतिदिन उनका पूजन करें एवं ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय अथवा ऊँ नमो वासुदेवाय कृष्णाय नम: शिवाय का यथाशक्ति जाप करे। कालसर्प योग की शांति होगी।
2. यदि आपको रोजगार में तकलीफ आ रही है अथवा रोजगार प्राप्त नहीं हो रहा है तो पलाश के फूल गोमूत्र में डूबाकर उसको बारीक करें। फिर छाँव में रखकर सुखाएँ। उसका चूर्ण बनाकर चंदन के पावडर में मिलाकर शिवलिंग पर त्रिपुण्ड बनाएँ। 21 दिन या 25 दिन में रोजगार की अवश्य प्राप्ति होगी।
3. यदि आपकी कुंडली में कालसर्प है तो आप नित्य प्रति भगवान भोलेनाथ के परिवार का पूजन करें। आपके प्रत्येक कार्य होते चले जाएँगे।
4. यदि आपको शत्रु से भय है तो चाँदी के अथवा ताँबे के सर्प बनाकर उनकी आँखों में सुरमा लगा दें, फिर किसी भी शिवलिंग पर चढ़ा दें, आपका भय दूर हो जाएगा।
5. शिवलिंग पर आप प्रतिदिन मीठा दूध (मिश्री मिली हो तो बहुत अच्छा) उसी में भाँग डाल दें, फिर चढ़ाएँ आपको पूर्ण शांति मिलेगी।
6. नारियल के गोले में सप्त धान्य, गुड़, उड़द की दाल एवं सरसों भर लें व बहते पानी में बहा दें अथवा गंदे पानी में (नाले में) बहा दें। आपका गुस्सा चिड़चिड़ापन दूर हो जाएगा। यह प्रयोग शूद्रकाल में करें।
7. सबसे सरल उपाय कालसर्प योग वाला व्यक्ति श्रावण मास में प्रतिदिन रूद्र अभिषेक कराए एवं महामृत्युंजय मंत्र की एक माला रोज करें। अवश्य जीवन में सुख शांति आएगी।