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सूर्य का गोचर
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हम सभी ने यह महसूस किया होगा कि वर्ष के बारह महीनों में कुछ महीने तो बड़े सुख शांति वाले होते हैं मगर कुछ महीने हमारी सुख-शांति भंग करने वाले, आर्थिक स्थिति बिगाड़ने वाले होते हैं।

वास्तव में इसके कारण सूर्य का गोचर होता है। सूर्य प्रत्येक राशि में एक-एक माह भ्रमण करता है। यदि किसी की कुंडली में सूर्य प्रबल कारक हो, तो गोचर में अशुभ होने पर उस व्यक्ति को उन माहों में प्रत्येक वर्ष कठिनाई का अनुभव होता है। विशेषकर आर्थिक मामलों में अशुभ गोचर तेजी से प्रभाव डालता है।

* लग्न या जन्म राशि से जब सूर्य प्रथम भाव में गमन करता है तो शारीरिक कष्ट, पति-पत्नी की चिंता, धन का व्यय व व्यर्थ परिश्रम कराता है।

* द्वितीय भाव का सूर्य रोग, धनहानि, चिंता कलह का कारण बनता है।

* तृतीय भाव का सूर्य पराक्रम व भाग्य में वृद्धि, शत्रुओं पर विजय, उत्सव-त्योहारों में शिरकत आदि फल देता है।

सूर्य का गोचर
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* चतुर्थ भाव का सूर्य राज्यभय, माता को कष्ट, पिता से विवाद, कार्यों में बाधा और सुख में कमी करता है।

* पंचम भाव का सूर्य धन हानि, आर्थिक तंगी, मन में अस्थिरता, बच्चों की चिंता जैसे फल देता है।

* छठे भाव का सूर्य रोग से मुक्ति, शत्रु विजय, यात्रा, धन लाभ व उन्नति केअवसर प्रदान करता है।

* सप्तम भाव का सूर्य उदर विकार, दांपत्य में तनाव, अपयश, आर्थिक तंगी व मानसिक कष्ट का कारण बनता है।

सूर्य का गोचर
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* अष्टम भाव का सूर्य धन हानि, मा‍नसिक अस्थिरता, दुर्घटना, राज्य हानि व रोग का कारण बनता है।

* नवम भाव का सूर्य व्यर्थ भागदौड़, असफलता व अपयश को दिखाता है।

* दशम भाव का सूर्य सुखों में वृद्धि, कार्यस्थिति में उन्नति, उपहार-लॉटरी, भ्रमण, सुख आदि फल देता है।

* ग्यारहवें भाव का सूर्य विद्या, लाभ, संतान सुख, धन लाभ, स्वास्थ्‍य लाभ और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

* बारहवें भाव का सूर्य व्यर्थ खर्च, शारीरिक कष्ट, विश्वासघात, राज्य भय व हानि के संकेत देता है।

विशेष : सूर्य के अलावा बुध, मंगल व शुक्र के गोचर का भी प्रभाव पड़ता है। अत: जो ग्रह आपकी कुंडली में प्रबल हो, उसके मुताबिक मिले-जुले परिणाम प्राप्त होते हैं और विशेष महीनों में विशेष फल (प्रति वर्ष) ‍िनर्धारित करते हैं।
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