- डॉ. एच.सी. जैन
2008 में वर्षा की स्थिति सभी राज्यों में अच्छी हो जिससे पानी का पर्याप्त लेवल हो सके, ऐसे संकेत नहीं मिलते। कुछ राज्यों में अच्छी वर्षा अवश्य होगी। वहाँ का वाटर लेवल बढ़ेगा, लेकिन कुछ राज्यों को मौसम की बेरुखी का सामना करना पड़ेगा।
इस बार सामान्य से कहीं अधिक वर्षा होगी, कृषक ऐसा समझने लगेगा। लेकिन फसल को सही समय पर पानी मिलना चाहिए, उस समय वर्षा के अभाव से किसान को चिंता होगी। आर्द्रा लग्न से ज्योतिष ग्रहों, नक्षत्रों में 21 जून 2008 को स्टैंडर्ड टाइम रात्रि 9.45 पर सूर्यदेव आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। उस समय मकर लग्न तृतीया तिथि शनिवार होगा। शनिवार को आर्द्रा प्रवेश होने से मेघेश शनि हुआ। यह अच्छी वर्षा के लिए शुभ नहीं।
इस वर्षा का कई राज्यों में अभाव, राजनीति में उथल-पुथल रहेगी। जनता में मौसमी रोग, उपद्रव, आतंकवाद से भय रहेगा। तृतीया तिथि होने से वर्षा सामान्य से कहीं कम रहेगी। तिल, उड़द, बिनौला, गुड़, हल्दी, सूत, कपास में तेजी रहेगी। नक्षत्र एवं योग शुभ हैं। कहीं-कहीं सामान्यतः अधिक वर्षा का योग बनाकर सुखकारक है, परंतु प्रथम श्रेणी के नेता इस बार के चुनाव में नीचे रहेंगे व द्वितीय श्रेणी के नेता आगे बढ़ जाएँगे। सामान्यजन का स्वभाव इन्द्रदेव को प्रसन्न करने व धार्मिक प्रार्थनाओं की तरफ बढ़ेगा।
आर्द्रा लग्न के समय मकर लग्न है तथा लग्न में राहु के साथ चन्द्र बैठा है। पंचम त्रिकोण में बुध है। लग्न में राहु व चन्द्र योग से कहीं भारी वर्षा से बाढ़ आएगी। ये इलाके देश के पूर्वी एवं दक्षिणी-पश्चिमी हो सकते हैं। उत्तरी भाग में सामान्य से कम वर्षा तथा दक्षिण में सामान्य वर्षा के योग बनते हैं। | | 2008 में वर्षा की स्थिति सभी राज्यों में अच्छी हो जिससे पानी का पर्याप्त लेवल हो सके, ऐसे संकेत नहीं मिलते। कुछ राज्यों में अच्छी वर्षा अवश्य होगी। वहाँ का वाटर लेवल बढ़ेगा, लेकिन कुछ राज्यों को मौसम की बेरुखी का सामना करना पड़ेगा। |
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शुक्र पर गुरु की सप्तम दृष्टि पड़ने से पूर्वोत्तर भारत, बिहार, बंगाल, असम में वर्षा आवश्यकता से अधिक हो सकती है जिससे बाढ़ का खतरा रह सकता है। मंगल आगे व सूर्य पीछे चले तो वर्षा अल्प रहे। शुक्र और बुध के बीच में सूर्य चले तो वर्षास्वल्प हो।
इस बार शुक्र व बुध के बीच सूर्य चल रहा है। 7 अप्रैल 08 को द्वितीया तिथि थी। अतः अल्पवर्षा का योग है। वैशाख शुक्ल प्रतिपदा को भरणी नक्षत्र हो तो वर्षा अच्छी होती है। इस बार 6 मई को वैशाख शुक्ल प्रतिपदा थी। भरणी नक्षत्र नहीं है अतः उत्तम वर्षा का योग नहीं है। ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को मृगशिरा नक्षत्र हो तो वर्षा अच्छी होती है। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को पुनर्वसु नक्षत्र हो तो वर्षा अच्छी होती है।
इस बार 4 जुलाई को आषाढ़ प्रतिपदा का क्षय है। वर्षा ऋतु के चार स्तंभ भी एकरूपता और अच्छी वर्षा के संकेत नहीं देते इसलिए इस वर्ष भी कई राज्यों में अच्छी वर्षा के बावजूद कई राज्यों में नुकसानदेह होगा। किसानों को शुरू में लगेगा कि वर्षा इस बार अच्छी होगी। सही समय पर जानकर खुश होगा। इसलिए राज्यों के कृषकों को अपने क्षेत्र की स्थिति एवं कम या अधिक वर्षा वाली फसलों को देखकर ही बुवाई करना चाहिए।
स्थानीय स्तर पर वर्षा होने के संकेत- चींटी मुँह में अंडे लेकर ऊपर को चढ़े, पूर्व या उत्तर की पवन चलने लगे, सूर्य अधिक तपने लगे, चिड़िया धूल या रेत में स्नान करे, गाय सूर्य की तरफ मुँह कर देखने लगे, पपैया (पपीहा) पी-पी निरंतर बोले, मेंढक जमीन पर फिरे और बोले, बिल्ली और कुत्ता नाखून से जमीन खोदे, कुत्ता घर से बाहर न जाए, थान पर घोड़े उछलने लगें, प्रातः उमस (गर्मी) हो जाए, कोयल बोले, हवा जल्दी-जल्दी अपनी दिशा बदल दे तो उस दिन स्थानीय रूप से अतिशीघ्र अच्छी वर्षा के अचूक संकेत होते हैं।
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