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भाग्य विधाता नहीं, मनुष्य लिखता है
पं. अशोक पँवार 'मयंक'
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कोई भी बच्चा अशुभ ग्रहों में न हो शुभ ग्रहों का प्रभाव उसके जीवन में हो। इसके लिए हमें भाग्य विधाता के भरोसे नहीं रहना चाहिए। पुरुष व स्त्री के संगम से ही स्त्री को गर्भ धारण होता है। हाँ कुछेक केस में कृत्रिम गर्भधारण भी होता है, लेकिन बात कोई भी हो। बच्चे के जन्म के समय ग्रहों की शुभ स्थिति हो तो ऐसा हमारे वश में ही है न कि भाग्य विधाता के। बच्चा जन्म 9 माह में लेता है तो किसी जननी को सातमासा या अष्टमासा बच्चा भी हो सकता है।

कुल मिलाकर बच्चे का जन्म 7 से 9 माह के मध्य ही होता है। कुछेक केस में 10 से 12 माह के मध्य भी सुनने को मिला है। लेकिन ऐसा केस बिरले ही होता है। आजकल शुभ मुहूर्त में बच्चे का जन्म सिजेरियन द्वारा भी करवाया जाता है, लेकिन वो उचित नहीं है। प्राकृतिक ही रूप से जन्म होना ही सही होता है।

जब बच्चा जन्म ले रहा है या सिजेरियन द्वारा जन्म कराया जा रहा है। उस समय ग्रहों की युति ग्रहों की स्थिति क्या है। वो किस दिन किस स्थिति में जन्म ले रहा है या तिथि, दिन-वार भी सही है। शुभ मुहूर्त भी है लेकिन ग्रहों की युति की समझ हर किसी को नहीं होती।
  कोई भी बच्चा अशुभ ग्रहों में न हो शुभ ग्रहों का प्रभाव उसके जीवन में हो। इसके लिए हमें भाग्य विधाता के भरोसे नहीं रहना चाहिए। पुरुष व स्त्री के संगम से ही स्त्री को गर्भ धारण होता है। हाँ कुछेक केस में कृत्रिम गर्भधारण भी होता है।      


अशुभ योग हो व बच्चे का जन्म शुभ मुहूर्त में हो तो वो किसी भी प्रकार के अशुभ योगों से बचा नहीं रह सकता। बच्चे को अशुभ योगों से बचाना ही हर दंपति के हाथ में होता है। अशुभ योग में सबसे खतरनाक योग शनि, मंगल की युति या दृष्टि संबंध ही मेरे अनुभव में आया है।

ऐसी स्थिति वाला जातक करोड़ों में खेलने वाला कंगाल हो गया। लाख प्रयास करने पर भी सफलता हाथ नहीं लगी। किसी-किसी घर में एक नहीं सभी को अशुभ योग में जन्मते देखा। खुशहाल परिवार मेरे ही सामने बर्बाद होता देखा गया है। जब से मैंने इसी पर ध्यान दिया कि क्यों न हम इन अशुभ योगों में बच्चे का जन्म ही न होने दें।

संतान इच्छुक दंपति इस ओर ध्यान देकर लाभान्वित हो सकते हैं व अशुभ योग से अपने बच्चे को बचा सकते हैं। बच्चे का प्लान करने वाले दंपति कुछ विशेष समयावधि में स्त्री को गर्भ धारण कराए तो उनका बच्चा अशुभ योगों से बचा रह सकता है।

इस‍के लिए हमें यह ध्यान रखना होगा कि बच्चा जन्म ले उस माह में अशुभ ग्रहों की युति न हो न ही दृष्टि संबंध हो। बस आपका बच्चा अशुभ योग से बच जाएगा व उसके जीवन में बाधाएँ नहीं आएँगी।
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