एकादशमेश मंगल जो आयभाव व शत्रु माना जाता है, षष्ठ भाव का स्वामी होकर यदि लग्न में हो तो मांगलिक दोष नहीं माना जाएगा, क्योंकि सप्तम भाव वर या कन्या का होता है। लग्न से मंगल सप्तम भाव पर उच्च दृष्टि डालेगा। इस कारण मंगल दोष नहीं लगता है। लग्न में मंगल होने के कारण ऐसे जातक स्वप्रयत्नों से धनलाभ पाते हैं। उन्हें माता, भूमि, भवन का सुख मिलता है।
पत्नी या पति तेजस्वी स्वभाव के होते हैं। आयु उत्तम होती है। लग्न के साथ सूर्य हो तो ऐसे जातक को मित्रों, भाइयों का पूर्ण सहयोग मिलता है। शत्रु नहीं होते हैं, पराक्रमी होता है। चंद्र साथ में होने पर कुंडली में समस्त दोषों का निवारण होता है। ऐसा जातक धन-कुटुम्ब से पूर्ण होता है। वाक् शक्ति अच्छी होती है। बुध साथ हो तो ऐसा जातक सफल व्यापारी, राजनीतिज्ञ भी हो सकता है। इसमें हिम्मत गजब की होती है।
गुरु साथ होने पर गणितज्ञ और ज्ञानवान होता है। ऐसे जातक अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार होते हैं, मंगल दोष नहीं होता है। शुक्र साथ होने पर ऐसे जातक सेक्सी होते हैं और उनके संबंध अन्यत्र भी हो सकते हैं। वे विद्या और लेखन में अच्छे होते हैं। शनि साथ हो तो आय में कमी, शत्रु से परेशान, स्वयं मेहनत करने पर भी सफलता नहीं मिलती। ऐसी स्थिति में मंगल का उपाय व सोना-चाँदी-ताँबे के तारों में गुँथी हुई अँगूठी बनावाकर पहनें। राहु साथ होने पर सफल राजनीतिज्ञ बन सकता है। ऐसे जातक चतुर चालाक भी होते हैं। | | एकादशमेश मंगल जो आयभाव व शत्रु माना जाता है, षष्ठ भाव का स्वामी होकर यदि लग्न में हो तो मांगलिक दोष नहीं माना जाएगा, क्योंकि सप्तम भाव वर या कन्या का होता है। लग्न से मंगल सप्तम भाव पर उच्च दृष्टि डालेगा। इस कारण मंगल दोष नहीं लगता है। |
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केतु साथ हो तो जीवन में एक बार एक्सीडेंट होता है या सिर पर चोट आदि लगती है। एकादशेश मंगल द्वितीय भाव में हो तो उस जातक का धन कुटुम्बी लोग हजम कर जाते हैं या शेयर आदि में हो तो धन नष्ट हो जाता है। वाणी के भी कड़क होते हैं। सूर्य साथ होने पर वाणी दोष संभव है। पराक्रम द्वारा थोड़ी सफलता मिलती है।
चंद्र साथ हो तो मंगल का नीच भंग होने से ऐसे जातक धनवान होते हैं। वाणी मधुर लेकिन सख्त होती है। बुध साथ हो तो अपने बल पर कुटुम्ब का सहयोग करने वाले होते हैं। गुरु साथ होने पर राज्य कृपा, पिता से लाभ होता है। शुक्र साथ हो तो आवाज मधुर होती है, ऐसे जातक गायन में सफल हो सकते हैं।
शनि साथ हो तो जीवनसाथी को खतरा होता है। कुटुम्बियों से नहीं बनती है। धन की बचत नहीं होती है। आँखों की ज्योति कम हो जाती है या चोट लगती है। राहु साथ हो तो अनावश्यक परेशानियाँ आती हैं।
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