- कन्हैयालाल मंगलानी हमारे प्राचीनकाल के ग्रंथों में स्वप्न विज्ञान को काफी महत्व दिया गया है। स्वप्न परमात्मा की ओर से होने वाली घटनाओं के पूर्व संकेत होते हैं। स्वप्न का प्रभाव निश्चित रूप से हर मनुष्य पर पड़ता है।
यदि कोई अच्छा-सा स्वप्न दिखाई दे तो हम खुश होते हैं, किंतु बुरा दिखाई दे तो घबराकर तुरंत ज्योतिषियों के पास पहुँच जाते हैं। स्वप्न तो छोटे-छोटे निरीह बालकों को भी नहीं छोड़ते हैं। वे नींद में कभी हँसते हैं और कभी डर से रोने लगते हैं।
स्वप्न के आधार पर फलकथन करने में ज्योतिषियों को आसानी होती है। सपनों में कुछ भी कर सकने की आजादी होती है। चाहे तो मछली को सड़क पर दौड़ा दें या गरूड़ को पानी में तैरते हुए देखें। जब मनुष्य गहरी नींद में होता है तो उसका इलेक्ट्रो एनसेफलोग्राफ (ईईजी) अल्फा तरंगों को स्थिर गति में दिखाता है, जिसमें सामान्य श्वास, नाड़ी धीमी और शरीर का तापमान कम हो जाता है। परंतु स्वप्न अवस्था में गतिशीलता बढ़ जाती है। | | हमारे प्राचीनकाल के ग्रंथों में स्वप्न विज्ञान को काफी महत्व दिया गया है। स्वप्न परमात्मा की ओर से होने वाली घटनाओं के पूर्व संकेत होते हैं। स्वप्न का प्रभाव निश्चित रूप से हर मनुष्य पर पड़ता है। यदि कोई अच्छा-सा स्वप्न दिखाई दे तो हम खुश होते हैं। |
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साँस तेज, नाड़ी तेज और तापमान भी अधिक रहता है। यह अवस्था प्रायः रात में 4-5 बार आती है। इस अवस्था में शरीर के अंग गतिमान होते हैं। नाड़ी बढ़ी हुई और मस्तिष्क जागृति वाली स्थिति का प्रकार दर्शाता है।
सपने देखना मानव जीवन की एक आवश्यक आवश्यकता है। सपने देखने में कमी होने का मतलब है आप में प्रोटीन की कमी है या फिर आप पर्सनॉलिटी डिसऑर्डर के शिकार हैं।
* साँप- भारतीय परंपरा में मदमस्त साँप को देखने का अर्थ है, कुंडली का जागृत होना तथा आंतरिक प्रेरणा एवं बाहरी सजग दृष्टिकोण के बीच संघर्ष के रहते सपनों में हिलते सर्प दिखाई देते हैं।
* पक्षी- पक्षी आत्मा या वासनाओं से मुक्ति का प्रतीक होता है। स्वप्न में पक्षी किस अवस्था में दिखता है उसी से आत्मा की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है।
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