गुरु का गोचरीय भ्रमण 22 नवंबर 2007 से प्रात: 5 बजे से धनु राशि पर प्रवेश करेगा। गुरु सौरमंडल में सबसे वजनी व विशाल ग्रह है। गुरु का प्रभाव मानव जीवन पर सर्वश्रेष्ठ पड़ता है। गुरु की उच्च राशि कर्क व नीच राशि मकर है। इसकी महादशा 16 वर्ष की है। इसका रंग पीला, धातु स्वर्ण, रत्न पुखराज है।
गुरु प्रधान जातकों का चेहरा गोल, सिर पर बालों की मात्रा कम ही रहती है। जिस जातक की पत्रिका में गुरु स्वराशि धनु, मीन उच्च राशि कर्क मित्र राशि सिंह, मेष, वृश्चिक में हो तो अत्यंत प्रभावशील होकर उस जातक को महत्वाकांक्षी, पृथक्करण की क्षमता देने वाला, संगठनकर्ता, प्रशासनिक सेवाओं में सफलता का कारक बनता है। स्थान भेद से इसका भाव अच्छा या बुरा भी मिलता है। यदि शुभ होकर जन्मपत्रिका में बैठ जाए व उत्तम पुखराज धारण किया जाए तो निश्चित ही उस जातक को अच्छी सफलता दिलाता है। ऐसे जातक राजनीति, जज, प्रोफेसर आदि क्षेत्रों में देखे गए है। आइए जानें बारह राशियों पर किस प्रकार प्रभाव देगा।
मेष राशि या मेष लग्न वाले जातक को गुरु का गोचरीय भ्रमण नवम् धर्म, प्रतिष्ठा, भाग्य से भ्रमण करेगा। जिनकी पत्रिका में गुरु धनु, मीन मेष, कर्क का होगा उन्हें राजनीति में, प्रतिष्ठित पद में, वाद-विवाद प्रतियोगिता में, आईएएस की परीक्षाओं में सफलता दिलाएगा। ऐसे जातक को पुखराज सोने में बनवाकर तर्जनी में शुभ मुहूर्त में धारण करना अतिश्रेष्ठ फलदायी रहेगा। | गुरु का गोचरीय भ्रमण 22 नवंबर 2007 से प्रात: 5 बजे से धनु राशि पर प्रवेश करेगा। गुरु सौरमंडल में सबसे वजनी व विशाल ग्रह है। गुरु का प्रभाव मानव जीवन पर सर्वश्रेष्ठ पड़ता है। गुरु की उच्च राशि कर्क व नीच राशि मकर है। इसकी महादशा 16 वर्ष की है। |
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वृषभ राशि या वृषभ लग्न वालों को गुरु अष्टम भाव से भ्रमण करेगा। आर्थिक मामलों में मिली-जुली स्थिति रहेगी वहीं आयु, स्वास्थ्य आदि में लाभकारी रहेगा। यश बढ़ेगा। जनता के बीच प्रसिद्धि मिलेगी। स्थानीय राजनीति में या कोई विशेष कार्य में सफलता देगा। ऐसे जातक पीला रुमाल अवश्य रखें। पुखराज नहीं पहनें। गुरु की उत्तम स्थिति मेष, मीन, कर्क, सिंह व धनु वृश्चिक में हो तो फल ठीक मिलेगा।
मिथुन राशि या लग्न वालों के लिए गुरु का गोचरीय भ्रमण सप्तम भाव से करेगा। जिनकी शादी नहीं हुई है व विवाह योग्य हैं, उनकी नवंबर 22 के बाद से 2008 तक विवाह योग बनेंगे। उनकी पत्नी धर्मनिष्ठ होगी। यदि गुरु सप्तम में हो तो अति शुभ परिणाम देगा। व्यापार-व्यवसाय में सफलता मिलेगी। दाम्पत्य जीवन मधुर रहेगा। विवाह बाद आर्थिक उन्नति अच्छी होगी। पारिवारिक सुख-शांति रहेगी। गुरु की इस लग्न में स्थिति मीन, मेष, कर्क, सिंह, कन्या में उत्तम फलदायी रहेगी। इन्हें पुखराज न पहनकर कोई भी एक पीला कपड़ा पहनना चाहिए। पीली वस्तु दान न दें।
कर्क राशि या लग्न वालों के लिए गुरु का गोचरीय भ्रमण षष्ट भाव से होगा। इनके लिए शत्रु भाव से होने से शत्रु पर कुशलनीति से सफलता मिलेगी। भाग्य में कुछ देरी होगी। मामा पक्ष से लाभ होगा। कर्ज दूर होगा। कुटुंब के व्यक्तियों से सहयोग मिलेगा। गुरु की इस लग्न में स्थिति मीन, कर्क, मेष, सिंह, कन्या में हो तो फल अच्छे मिलेंगे। इन्हें पुखराज धारण करना चाहिए।
सिंह राशि या लग्न वालों को गुरु का गोचरीय भ्रमण पंचम भाव से होगा। विद्यार्थी वर्ग के लिए समय उत्तम रहेगा। पढ़ाई में थोड़ा-सा ध्यान दें तो अच्छी सफलता मिलेगी। संतान सुखी रहेगी। भाग्योन्नति व प्रभाव में वृद्धि होगी, प्रतिष्ठा बढ़ेगी, लेखन-प्रकाशन-पत्रकारिता से जुड़े व्यक्ति भी लाभान्वित होंगे। गुरु की स्थिति धनु, मेष, सिंह, कर्क, वृश्चिक में हो तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। ऐसे जातक पुखराज पहनें तो उत्तम रहेगा।
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