सप्तमेश चंद्र मकर लग्न में होगा। सप्तमेश पत्नी भाव व दैनिक व्यवसाय का माना जाता है। इस भाव से सेक्स भी देखा जाता है। चंद्र की गति अन्य ग्रहों से सबसे तेज है। यह मन का कारक है। सप्तमेश चंद्र नवम भाव में हो तो उस जातक को विवाह बाद पत्नी से लाभ होगा। यदि बुध भी साथ हो तो ऐसा जातक पत्नी व दैनिक व्यवसाय के मामलों में भाग्यशाली होगा।
ऐसे जातक सवा पाँच रत्ती का पन्ना पहने तो अति शुभ रहेगा। चंद्र के साथ मंगल का होना आय में वृद्धिदायक होगा। माता से लाभ भूमि-भवन से युक्त होगा। सूर्य साथ हो तो भाग्य पक्ष में बाधा का कारण बनता है। गुरु साथ में हो तो अपने पराक्रम से लाभ मिलें। भाइयों, मित्रों से लाभ रहे। शुक्र साथ होने पर नीच का होगा। विद्या में, राज्य में, नौकरी में पिता से हानि रहती है अत: ऐसे जातक 30 सेंट का हीरा पहनें। शनि साथ होने पर ऐसा जातक धर्मनिष्ठ, भाग्यशाली रहेगा।
राहू साथ हो तो 26 वर्ष बाद सफलता मिले। ऐसे जातक उत्तम धार का गोमेद पहनें। केतु साथ होने पर भाग्य में बाधा आए। उन्हें कुत्ते को मीठी रोटी खिलाना लाभदायक होगा। सप्तमेश चंद्र दशम में हो तो पत्नी सर्विस करने वाली होगी। शुक्र साथ होने पर उसका जीवनसाथी सुंदर होगा। ऐसे जातक आभूषण, कलात्मक वस्तु, इत्र, कॉस्मेटिक, इलेक्ट्रॉनिक्स के व्यापार में सफल होते है। मिष्ठान्न भंडार में भी सफल रहेंगे। सूर्य साथ हो तो व्यापार में क्षति, राज्य पक्ष से दंड मिले। पिता से हानि हो। ऐसे जातक सूर्य को प्रात: जल चढ़ावें। | सप्तमेश चंद्र मकर लग्न में होगा। सप्तमेश पत्नी भाव व दैनिक व्यवसाय का माना जाता है। इस भाव से सेक्स भी देखा जाता है। चंद्र की गति अन्य ग्रहों से सबसे तेज है। यह मन का कारक है। सप्तमेश चंद्र नवम भाव में हो तो उस जातक को विवाह बाद पत्नी से लाभ होगा। |
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मंगल साथ हो तो माता, जनता से संबंधित कार्य से लाभ मिले। बुध साथ हो तो भाग्य बल से सफल हो। गुरु साथ होने पर साधारण किस्म का गजकेसरी योग बनेगा व मध्यम ही लाभ होगा। शनि साथ होने पर ऐसा जातक प्रशासनिक सेवा में, इंजीनियर में सफल होता है। राजनीति में भी सफलता पा सकता है। राहू साथ होने पर विशेष लाभ वाली बात नहीं। केतु हो तो पिता न रहे। नौकरी आदि में उतार-चढ़ाव रहे। चंद्रमा की स्थिति एकादश में हो तो पत्नी से नुकसान रहे या पत्नी अस्वस्थ रहे जिससे खर्चे बढ़े।
संतान विद्या अच्छी हो। मंगल साथ हो तो आर्थिक लाभ ठीक रहे। सूर्य साथ होने पर अधिक नुकसान हो। बुध साथ हो तो भाग्य बल से धन लाभ रहे। गुरु साथ होने पर श्रेष्ठ फल मिले। आय भी उत्तम हो। शुक्र साथ हो तो भोग-विलास पर खर्च होगा। शनि साथ हो तो स्वप्रयत्नों से लाभ मिलें। राहू साथ हो तो आकस्मिक खर्चे रहे। धन हानि भी रहे। केतु साथ हो तो धन लाभ अकस्मात मिलें।
चंद्र द्वादश में हो तो उस जातक का जीवनसाथी बाहर से मिले। गुरु साथ हो तो उसका जीवनसाथी श्रेष्ठ हो व लाभ भी रहे। सूर्य साथ होने पर सामान्य लाभ रहे। मंगल साथ हो तो विदेश से या जन्म स्थान से दूर लाभ रहे। बुध साथ हो तो भाग्य विदेश में या जन्म स्थान से दूर चमकेगा। शुक्र साथ हो तो विद्या हेतु बाहर जाना पड़े। शनि साथ हो तो धन की बचत कम हो। राहू साथ हो तो चश्मा जल्द लगे। केतु साथ हो तो बाहर से लाभ हो लेकिन नेत्र को चोट भी लग सकती है।
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