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तुला के गुरु का विभिन्न राशियों पर प्रभाव
पं. अशोक पँवार 'मयंक'

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गुरु आकाश मंडल में सबसे विशालकाय व भारी होने के साथ इनका प्रभाव भी मानव जीवन पर धर्म, न्याय, ईमानदारी, संगठनकर्ता के रूप में, बड़ों का आदर करने वालों में, प्रशासनिक क्षेत्र के व्यक्तियों में, लेखन से जुड़े व्यक्तियों में देखने को मिलता है।

गुरु का रंग पीला होने के कारण ही इनके रत्न पुखराज, सुनेला, गोल्डन टोपाज हैं। इनकी महादशा स्थिति के अनुसार 16 वर्ष की होती है। इस दशाकाल में बुरा व्यक्ति भी सुधर जाता है या फिर उनके मन में बदलाव आता है। यदि गुरु की जन्म में उत्तम स्थिति हो तो वह जातक ऊँचे पद पर जाता है।

28 सितंबर को प्रातः 5.35 पर शुक्र की तुला राशि में साहस, बल, पराक्रम मंगल के नक्षत्र चित्रा में तृतीय चरण में गुरु का प्रवेश होगा। गुरु जब तक मंगल के नक्षत्र में रहेंगे, तब तक शुभ परिणामों में वृद्धि करेंगे। जैसे ही राहु के नक्षत्र में आएँगे वैसे ही दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। इसका बाजार, जनता व राजनीति पर विशेष प्रभाव रहेगा। शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव चिंता का कारण भी बन सकता है। मानव जीवन पर किस प्रकार का प्रभाव रहेगा, आइए जानें।
गुरु आकाश मंडल में सबसे विशालकाय व भारी होने के साथ इनका प्रभाव भी मानव जीवन पर धर्म, न्याय, ईमानदारी, संगठनकर्ता के रूप में, बड़ों का आदर करने वालों में, प्रशासनिक क्षेत्र के व्यक्तियों में, लेखन से जुड़े व्यक्तियों में देखने को मिलता है।


मेष- लग्न या राशि वालों के लिए गुरु का गोचरीय भ्रमण सप्तम भाव से होगा यदि आप अविवाहित हैं तो विवाह के बंधन में बँधेंगे या विवाह संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा होगी। स्वयं कोई परीक्षा आदि में बैठे हैं, तो सफल होंगे। पराक्रम द्वारा धन का लाभ भी मिलेगा। शेयर, सट्टा आदि में सावधानी रखना होगी।

वृषभ- लग्न या राशि वालों के लिए बाहरी संबंध बनेंगे। विदेश या स्वदेश में ही यात्राओं का योग बनता रहेगा साथ ही आवक के रास्ते खुलेंगे। वाणी का प्रभाव भी बढ़ेगा परंतु नौकरीपेशा व्यक्ति कार्य के प्रति सजग रहें।

मिथुन- लग्न या राशि वालों के गुरु का गोचरीय भ्रमण पंचम भाव में होने से आर्थिक लाभ के योग बनेंगे। राजकीय मामलों में, नौकरी हेतु आवेदन में, प्रमोशन में सफलता पाएँगे। प्रभाव में वृद्धि होगी। धर्म के प्रति थोड़ी अरुचि रहेगी।
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